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रेगुलर टीचर आने पर भी गेस्ट फैकल्टी नहीं होंगे टर्मिनेट:हाईकोर्ट का आदेश- दूसरे स्थान पर देनी होगी नौकरी; सरकार की जिम्मेदारी तय

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि रेगुलर टीचर आने पर भी कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के टीचर मौजूद रहेंगे, उन्हें नौकरी से टर्मिनेट नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा कि यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि किसी रिक्त पद पर इनकी तैनाती की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि अगर गेस्ट फैकल्टी किसी अन्य पद स्थान पर काम करने की मांग करता है, उसे स्थिति में गेस्ट फैकल्टी टीचर को हटाया जा सकता है। बता दें कि रीवा आईटीआई में पदस्थ गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा की याचिका पर हाईकोर्ट ने यह है फैसला सुनाया है। दरअसल रीवा निवासी गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा ने 29 जून 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सुमन वर्मा मनगवां कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्य कर रही थी, वहां पहले ही नियमित शिक्षक भावना डहेरिया की नियुक्ति हो चुकी है, इसी के बाद मामला गेस्ट फैकल्टी की सेवा समाप्ति के सवाल पर पहुंच गया। जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसी स्थिति में गेस्ट फैकल्टी की नौकरी समाप्त करने की वजह उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध किसी अन्य स्थान पर नौकरी करने का मौका दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में ग्वालियर बेंच द्वारा 20 मई 2025 को दिए गए अंतरिम आदेश का भी हवाला दिया। यह आदेश जीए अहलूवालिया की कोर्ट का था और इस सिद्धांत को लागू किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि गेस्ट फैकल्टी को दूसरी जगह पर स्थापना की पेशकश की जाती है, और वह उसे स्वीकार नहीं करती है, ज्वाइन करने से इनकार किया जाता है, तो सरकार को अधिकार होगा की सेवा समाप्ति की कार्यवाही कर सकती है। इतना ही नहीं इनकार करने की स्थिति में संबंधित गेस्ट फैकल्टी से लिखित सहमति या असहमति भी ली जाएगी। हाईकोर्ट का यह आदेश प्रदेश भर में कार्यरत हजारों गेस्ट फैकल्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, यदि किसी संस्थान में रेगुलर शिक्षक की नियुक्ति होती है, तो केवल उसी आधार पर गेस्ट फैकल्टी को तत्काल हटाने की वजह पहले उन्हें किसी अन्य पद पर समायोजित करने की प्रक्रिया अपनानी होगी। जस्टिस विवेक कुमार की एकलपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं, की याचिकाकर्ता की सेवा समाप्त करने की वजह उन्हें राज्य के किसी भी हिस्से में उपलब्ध रिक्त पद की पेशकश की जाए, यदि सरकार के बाद भी नियुक्ति देने से इंकार करती है, तो याचिकाकर्ता के पास टर्मिनेशन को चैलेंज करने का विकल्प मौजूद रहेगा।

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