सतना जिला अस्पताल में शनिवार को मरीज के परिजनों को क्लॉटेड (थक्का जमा हुआ) खून बेचने के मामले में जांच तेज हो गई है। दलालों के जरिए 8 हजार रुपए में खून बेचने का यह तार अब रीवा के विंध्या ब्लड बैंक एंड कंपोनेंट सेंटर तक पहुंच गया है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम अब इस पूरे नेटवर्क और मरीज की मजबूरी का फायदा उठाने वाले गिरोह की बारीकी से पड़ताल कर रही है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि रीवा के प्राइवेट ब्लड बैंक ने दो यूनिट खून के लिए प्रति यूनिट 1050 रुपए चार्ज किए थे यानी 2100 रुपए। वहीं, सतना में सक्रिय दलाल ने यही खून मरीज के परिजनों को 8 हजार रुपए में उपलब्ध कराया। परिजनों ने यह पूरी रकम अभय सिंह नामक व्यक्ति के खाते में यूपीआई (UPI) के जरिए ट्रांसफर की थी। अब जांच टीम इसी आर्थिक लेनदेन को मुख्य आधार बनाकर दलालों के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। 3 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी टीम, रीवा CMHO को लिखा जाएगा पत्र
सूत्रों के मुताबिक, जांच समिति अगले तीन दिन के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह को सौंपेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद सिविल सर्जन की ओर से रीवा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को आधिकारिक पत्र लिखा जाएगा। इस पत्र में संबंधित ब्लड बैंक की भूमिका की जांच करने के साथ ही यह भी देखा जाएगा कि खून के परिवहन में कोल्ड चेन प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं। सख्ती के चलते पड़ोसी जिलों से ऑपरेट कर रहे दलाल
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सतना में लगातार मॉनिटरिंग और सख्ती के कारण स्थानीय स्तर पर दलाली पर काफी हद तक लगाम लगी है। इसी वजह से अब दलालों ने अपना नेटवर्क बदलकर पड़ोसी जिलों के प्राइवेट ब्लड बैंकों से साठगांठ कर ली है। ये लोग गंभीर मरीजों की जरूरत और मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे कई गुना ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। शनिवार को सामने आया था मामला
जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड में सड़क हादसे में घायल रामऔतार साकेत का इलाज चल रहा है। उनके परिजनों ने शनिवार को एक दलाल के जरिए रीवा से दो यूनिट खून मंगवाया था। जब यह खून अस्पताल की लैब में क्रॉस-मैच के लिए पहुंचा, तो टेक्नीशियनों ने जांच में इसे क्लॉटेड और मरीजों के लिए अनुपयोगी पाया। इसके बाद ही अस्पताल में हंगामा हुआ और खून की दलाली का यह बड़ा मामला उजागर हुआ।
