पचमढ़ी मे सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच नागद्वारी की पद यात्रा शुरू होती है। 16 किलो मीटर का रास्ता जितना खूबसूरत है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। फिसलन भरी चढ़ाइयां, पथरीले रास्ते, पानी और उफनते नाले… कई जगह एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ गहरी खाई। इसके बावजूद हर साल 5 लाख श्रद्धालु इसी कठिन रास्ते से नागद्वारी तक पहुंचने निकलते हैं। आखिर ऐसी क्या आस्था है, जो लोगों को इन मुश्किल रास्तों पर चलने की ताकत देती है? दैनिक भास्कर की टीम भी श्रद्धालुओं के साथ इस यात्रा पर निकली। रास्ते में क्या-क्या चुनौतियां मिलीं? श्रद्धालुओं के अनुभव कैसे रहे? और नागद्वारी से जुड़ी वे कौन-सी मान्यताएं हैं, जिनकी वजह से लोग यहां खिंचे चले आते हैं? देखिए नागद्वारी यात्रा का रोमांचक सफर, रास्ते की चुनौतियां, श्रद्धालुओं के अनुभव और आस्था की पूरी कहानी… 12 अगस्त सुबह।
