रीवा के शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को नि:शुल्क वितरित की जाने वाली पाठ्य पुस्तकों के वितरण में रीवा में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पाठ्य पुस्तक निगम के गोदाम से करीब दो ट्रक के बराबर 450 बंडल किताबें गायब मिली हैं। इन किताबों की अनुमानित कीमत 35 से 36 लाख रुपए बताई जा रही है। मामले के सामने आते ही रीवा से लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया। मामले में चोरहटा थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जबकि भोपाल से पहुंची टीम ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ही शासकीय विद्यालयों में वितरित होने वाली किताबों में अनियमितता का मामला उजागर हुआ था। इसके बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए किताबों के वितरण के निर्देश दिए। जब गोदाम के स्टॉक का मिलान किया गया तो बड़ी संख्या में किताबें गायब मिलीं। सूत्रों के अनुसार, जिन किताबों को सरकारी स्कूलों तक पहुंचना था, वे कई विद्यालयों में नहीं पहुंचीं। वहीं, इन्हीं किताबों के खुले बाजार में बिकने की शिकायतें भी सामने आई थीं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गोदाम में कुछ ऐसी किताबें रखी मिली हैं, जो रिकॉर्ड में पहले ही वितरित या समाप्त दर्शाई जा चुकी थीं। आशंका जताई जा रही है कि बदले हुए सिलेबस की पुस्तकों को बाद में वापस रखकर कागजी खानापूर्ति की गई हो। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल स्तर से अधिकारियों की टीम रीवा पहुंची है। टीम गोदाम के स्टॉक, वितरण रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। जांच में और भी अनियमितताओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। थाना प्रभारी पवन शुक्ला ने बताया कि पाठ्य पुस्तक निगम के गोदाम से 450 बंडल किताबें गायब मिली हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 35 से 36 लाख रुपए है। इस संबंध में चोरहटा थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की विवेचना की जा रही है। जांच के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
