भोपाल में बहू के सुसाइड केस में रिटायर्ड जिला प्रधान न्यायाधीश एवं जिला उपभोक्ता फोरम बैंच-2 की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को कोर्ट से जमानत मिलने पर परिजनों ने नाराजगी जाहिर की है। विरोध के चलते चार दिन बाद भी वह शव लेने को तैयार नहीं हैं। अब उनकी मांग है कि मृतक का पीएम दिल्ली एम्स में होना चाहिए। केस की जांच मध्य प्रदेश के बाहर की पुलिस को सौंपी जानी चाहिए। वहीं पुलिस का कहना है कि आरोपी पति की तलाश की जा रही है। लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। जिसमें उसके घर और ऑफिस भी शामिल हैं। मामले में शनिवार को पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने SIT का गठन किया है। जिसका नेतृत्व में स्रोत एसीपी रजनीश कश्यप कौल करेंगे। दरअसल, गिरिबाला सिंह की बहू और उनके बेटे समर्थ सिंह की पत्नी ट्विशा ने मंगलवार रात बाग मुंगालिया एक्सटेंशन स्थित घर की छत पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। परिजन एफआईआर पर अड़े हुए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस दबाव में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर रही थी। गुरुवार रात पुलिस ने एसीपी के जांच प्रतिवेदन पर गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज कर लिया था। इस मामले में गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से जमानत मिल गई है। अब उनके बेटे समर्थ की जमानत पर सोमवार को कोर्ट में सुनवाई होगी। परिजनों को नोटिस जारी करने की तैयारी में पुलिस पुलिस अब मृतकों के परिजनों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है। जिसमें उन्हें शव सुपुर्द करने की बात कही जाएगी। वहीं परिजनों का कहना है कि ट्विशा ने सुसाइड नहीं किया, उसकी हत्या की गई। रिटायर्ड जज के प्रभाव में बेहद साधारण धाराओं में केस दर्ज किया जिससे आरोपियाें को जमानत का लाभ मिल गया। आरोपी बेहद रसूखदार हैं, उन्हें भोपाल एम्स की पीएम रिपोर्ट पर भी भरोसा नहीं है। लिहाजा वे चाहते हैं दिल्ली एम्स में बॉडी का पीएम कराया जाए। बेल एप्लीकेशन के साथ ट्रांजेक्शन के सबूत दिए गिरीबाला सिंह की ओर से कोर्ट में पेश बेल एप्लीकेशन में उन पर लगे तमाम आरोप निराधार बताए गए। इसमें स्पष्ट किया गया कि दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप अनर्गल हैं। ट्विशा से कभी किसी प्रकार के दहेज की मांग नहीं की गई। प्रति माह ट्विशा को जरूरतों के हिसाब से पैसा दिया जाता था। यह पैसा उसे ऑनलाइन खाते में दिया जाता था। प्रमाण के तौर पर ऑन लाइन दी ट्रांजेक्शन को कोर्ट में पेश किया गया है। जिसमें 50 हजार रुपए लेकर पांच हजार रुपए तक के कई ट्रांजेक्शन शामिल हैं। इसी के साथ ट्विशा का मनो चिकित्सक के पास इलाज चल रहा था। इसके प्रमाण के तौर पर इलाज के पर्चे भी कोर्ट को सौंपे गए हैं। गिरीबाला की ओर से तर्क दिया गया कि यदि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था तो उसे खर्च के लिए रकम क्यों ही दी जाती। जिसके आधार पर कोर्ट ने अग्रिम जमानत को मंजूर कर लिया। ये खबर भी पढ़िए… 1. भोपाल में रिटायर्ड जज की प्रेग्नेंट बहू ने लगाई फांसी
भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रिटायर्ड महिला जज की प्रेग्नेंट बहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बेटी के हाथ और कान पर चोट के नीले निशान हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. भोपाल में रिटायर्ड जज और वकील बेटे पर FIR भोपाल के ट्विशा सुसाइड मामले में उनकी सास रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने बताया कि मां-बेटे के खिलाफ हत्या, दहेज के लिए प्रताड़ित करने सहित अन्य धाराओं में केस बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
