विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को ओंकारेश्वर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किय गया। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहीं। उन्होंने सिकल सेल से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि 1.25 करोड़ लोगों के स्क्रीनिंग की लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। इस दौरान सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और इलाज को बढ़ावा देने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जागरुक करना है। सिकल सेल एनिमिया में प्रदेश सरकार ने उपलब्धि हासिल किया है। साल 2023 में राष्ट्र मिशन में जो लक्ष्य देश के सामने रखे थे, उसमें स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। जितना मुझे अवगत कराया गया है उसमें सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो गई है। लोगों को कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया इनमें ज्यादातर को लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिया गया है। सिकल सेल से जुड़े चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया है। पिछले कुछ वर्षों से समग्र रूप से
जो प्रयास किए है, वो सराहनीय है। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से एनिमिया सिकल सेल मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का दृढ़ संकल्प था, बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित निष्कर्ष देने का दूरदर्शी सोच भी थी। मुझे बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन पूरा किया गया। केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के रूप में नहीं देखा जाता है। इसे जनजातीय स्वास्थय का मुद्दा, अनुवांशिका से जुड़े जागरुकता और प्रिवेंटिव हेल्थ कैयर की चुनौती से सामाजिक आचरण में बदलाव के रूप में भी देखा गया है। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्ठभूमि में स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, AIIMS, NAHM, WHO और विभिन्न राज्यों सरकारों ने इस विषय पर विभिन्न आयामों पर काम किया है। मैं यह जानकर खुश हूं, आज मैं कुछ स्टॉल को देख रही थी। केवल एलोपेथ नहीं, आयुर्वेद भी इसमें रिसर्च करके निकाले हैं। 2027 तक लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग करना लक्ष्य कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारा लक्ष्य वर्ष 2027 से पहले स्क्रीनिंग पूरी करना है, ताकि इसके बाद उपचार और प्रबंधन पर ध्यान दिया जा सके। सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जनजातीय समाज सदैव अभियान को याद रखेगा। सरकार इस बीमारी के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सीएम बोले- 2027 तक 1.60 करोड़ स्क्रीनिंग का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है। वर्ष 2027 से पहले 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। इलाज प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. आनंद ओनकर ने बताया कि खालवा, छैगांव माखन, पुनासा और पंधाना विकासखंडों से ऐसे सरपंचों का चयन किया गया है, जिन्होंने अपने गांवों में सिकल सेल स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयोजन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग और इलाज प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें मरीजों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और बीमारी से बचाव के तरीकों पर भी प्रकाश डाला जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श भी प्रदान की गई। डॉक्टर बोले-सिकल सेल एनीमिया आनुवंशिक बीमारी डॉक्टर ओनकर ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसकी पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ोतरी को विवाह पूर्व जांच से रोका जा सकता है। विवाह से पहले युवक-युवती दोनों की जांच कर उन्हें संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है। जांच रिपोर्ट और सिकल सेल कार्ड के आधार पर संतान में बीमारी की संभावना बताई जाती है, जिसके बाद नवयुगल स्वयं निर्णय लेते हैं।
