गणेश उत्सव से पहले रायपुर में भगवान गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद सामने आया है। मोवा क्षेत्र में 6 पैक्स और डायनासोर के आकार की गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही है। इसे लेकर संत समाज और बजरंग दल ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गणेश जी की प्रतिमा बनाते समय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद, छत्तीसगढ़ बजरंग दल के संयोजक भूषण साहू समेत अन्य सदस्य मोवा क्षेत्र में मूर्तिकारों की दुकानों पर पहुंचे। उन्होंने वहां बन रही गणेश प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर मूर्तिकारों से बातचीत भी की। संगठनों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली प्रतिमाओं पर रोक नहीं लगी तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं, मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले साल AI से बनी गणेश प्रतिमा को लेकर विवाद के बाद वे ऐसे डिजाइन से बच रहे हैं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत होने या विवाद की आशंका हो। पिछले साल रायपुर के लाखे नगर में एक गणेश प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विवाद हुआ था। हिंदू संगठनों ने प्रतिमा के डिजाइन पर आपत्ति जताई थी। मामला इतना बढ़ गया कि विरोध प्रदर्शन हुआ और पुलिस तक शिकायत पहुंची थी। पहले देखिए ये तस्वीरें- मूल स्वरूप में बदलाव पर जताई आपत्ति संत समाज और बजरंग दल के सदस्यों ने कहा कि गणेश जी की मूर्ति लोगों की आस्था से जुड़ी है। इसलिए मूर्ति बनाते समय उनके पारंपरिक स्वरूप का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मूर्तिकारों से कहा कि नए तरीके से मूर्ति बनाने के दौरान धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाए। प्रशासन से कार्रवाई की मांग मामले को लेकर संत समाज ने शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। स्वामी राजेश्वरानंद ने कहा कि गणेश जी के मूल स्वरूप में बदलाव को लेकर पहले भी आपत्ति सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की मूर्तियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संत समाज सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा। पिछले साल AI मूर्ति को लेकर हुआ था विवाद मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले साल रायपुर के लाखे नगर में एक गणेश प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विवाद हुआ था। हिंदू संगठनों ने प्रतिमा के डिजाइन पर आपत्ति जताई थी। मामला इतना बढ़ गया कि विरोध प्रदर्शन हुआ और पुलिस तक शिकायत पहुंची। इस घटना के बाद अधिकांश मूर्तिकारों ने तय किया कि धार्मिक प्रतिमाओं में AI जैसे प्रयोग नहीं करेंगे, जिससे किसी तरह का विवाद खड़ा न हो। AI की तस्वीरें लेकर पहुंच रहे ग्राहक मूर्तिकार यशवंत ने बताया कि AI से बनी तस्वीरें आकर्षक लगती हैं, लेकिन पूजा के लिए प्रतिमा बनाते समय धार्मिक मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है। इसलिए हम ऐसे डिजाइन नहीं बनाते, जिन पर बाद में विवाद की आशंका हो। हिंदूवादी संगठन बोले- अपमान हुआ तो विरोध करेंगे हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वादिनी पांडेय ने कहा कि, हमने मूर्तिकारों और समितियों से निवेदन किया है कि पिछले साल की तरह कहीं पर भी गणेश जी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई प्रतिमा स्थापित न करें। धार्मिक भावनाएं आहत होने पर क्या कार्रवाई होती है? सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीक का अपमान करता है या ऐसा काम करता है, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है। पुलिस शिकायत मिलने के बाद जांच करती है। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाती है। 125 साल पुराना है रायपुर का गणेश उत्सव इतिहासकारों के अनुसार रायपुर में सार्वजनिक गणेश उत्सव का इतिहास करीब 125 साल पुराना है। सबसे पहले पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी और बनियापारा में सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी। धीरे-धीरे गोलबाजार, सदर बाजार, रामसागरपारा और शहर के अन्य इलाकों में भी गणेश समितियां बनने लगीं। स्वतंत्रता आंदोलन के समय भी गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं था। यह लोगों को एकजुट करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम बना। इसी वजह से गणेश प्रतिमा को हमेशा आस्था और परंपरा का प्रतीक माना गया। ………………….. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… रायपुर में AI गणपति मूर्तियां बनाने से बच रहे मूर्तिकार: पिछले साल फिल्मी स्टाइल प्रतिमाओं पर हुआ था बवाल, इस साल भी हिंदू संगठनों की चेतावनी 14 सितंबर से गणेश चतुर्थी के साथ गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। रायपुर में भी बप्पा के स्वागत की तैयारियां जारी हैं। शहर के मोहल्लों, चौक-चौराहों और घरों में करीब 15 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को रूप देने का काम कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर
