श्रीलंका के कोलंबो में हुए Manhunt International 2026 के ग्रैंड फिनाले से एक रात पहले जबलपुर के निपुण सिंह झील किनारे अकेले बैठे थे। आंखों में आंसू थे और मन में कई सवाल। स्विमवियर राउंड के बाद उन्हें यूरोपीय और अफ्रीकी प्रतिभागियों के बीच खुद को लेकर हल्का संदेह होने लगा था। मानसिक तनाव के इस दौर में उन्होंने हेडफोन लगाया और भारत का राष्ट्रीय गान सुना। राष्ट्रगान ने उन्हें फिर से संभाला और अगले दिन मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का आत्मविश्वास दिया। कोलंबो से अपने गृह नगर लौटकर आए निपुण से दैनिक भास्कर ने की बात। 25 साल में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन श्रीलंका के कोलंबो में 9 सितंबर को हुए फिनाले में निपुण ने आखिरकार फर्स्ट रनर-अप का खिताब हासिल किया। अंतिम मुकाबला भारत और फ्रांस के बीच था। फ्रांस के डायलन पालमरीनी विजेता बने, जबकि निपुण दूसरे स्थान पर रहे। यह पिछले 25 साल में मैनहंट इंटरनेशनल में भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इससे पहले 2001 में राजीव सिंह विजेता बने थे। टॉप-20 में 16वें, टॉप-10 में 8वें नंबर पर नाम फिनाले की रात जब टॉप-20 प्रतिभागियों के नाम घोषित हुए तो निपुण का नाम 16वें नंबर पर आया। इसके बाद टॉप-10 में वे 8वें स्थान पर चुने गए। हर राउंड के साथ दबाव बढ़ता गया। आखिर में मंच पर भारत और फ्रांस के प्रतिनिधि ही बचे थे। जज ने दोनों प्रतिभागियों के हाथ थाम रखे थे। लंबे इंतजार के बाद फ्रांस के प्रतिनिधि का हाथ विजेता के तौर पर ऊपर उठा। एक पल के लिए निपुण का दिल बैठ गया, लेकिन उन्होंने फर्स्ट रनर-अप की उपलब्धि को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। अलग देश, अलग भाषा… फिर भी बने दोस्त निपुण के मुताबिक, Manhunt International का अनुभव उनके लिए रोलर-कोस्टर राइड जैसा रहा। दुनिया के अलग-अलग देशों से आए प्रतिभागियों को प्रतियोगिता में उनके देश के नाम से पुकारा जाता था। निपुण की पहचान वहां ‘इंडिया’ बन चुकी थी। कई प्रतिभागियों को अंग्रेजी अच्छी तरह नहीं आती थी। ऐसे में वे फोन के ट्रांसलेटर से एक-दूसरे से बात करते और भावनाएं समझने की कोशिश करते थे। किसी का दोस्त देर से आता तो उसका सामान पैक करने में मदद मिलती। किसी को खाना पसंद नहीं आता तो दूसरे उसके लिए खाने का इंतजाम करते। निपुण के मुताबिक, अलग भाषा और संस्कृति के बावजूद इन दिनों में इंसानियत के आधार पर दोस्ती का रिश्ता बना। सिवनी में जन्म, तबला सीखा और बास्केटबॉल में नेशनल खेला निपुण का जन्म 6 अगस्त 1999 को सिवनी में हुआ। उनके दादा-दादी और नाना-नानी सिवनी में ही रहते हैं। पिता SBI में कार्यरत थे। ट्रांसफर के कारण निपुण की शुरुआती पढ़ाई जबलपुर के सेंट अलोयसियस कॉलेज, रिमझा में हुई। उन्होंने चौथी से दसवीं कक्षा तक तबला वादन सीखा। गिटार भी बजाते हैं। सातवीं कक्षा से बास्केटबॉल खेल रहे निपुण दो बार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। वे कॉलेज और यूनिवर्सिटी टीम के कप्तान भी रहे। हाल ही में कर्नाटक स्टेट चैंपियनशिप भी जीती। JEE से मणिपाल, IT जॉब से मॉडलिंग तक 11वीं-12वीं में गणित-विज्ञान लेने के बाद निपुण ने JEE की तैयारी की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में JEE Mains और Advanced क्लियर कर मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया। कॉलेज में तीन साल थिएटर किया। अंतिम वर्ष में जापानी एडवरटाइजिंग एजेंसी Merkle, a dentsu company में Decisioning Specialist के रूप में चयन हुआ। मॉडलिंग में उनकी एंट्री भी अचानक हुई। जिम में एक प्रोड्यूसर ने उनकी कद-काठी देखकर मॉडलिंग की सलाह दी। कॉलेज के फैशन क्लब का अनुभव काम आया और उन्होंने ई-कॉमर्स व कैंपेन से शुरुआत की। बाद में रनवे मॉडलिंग में पहुंचे और सीनियर्स के कहने पर Rubaru Mr. India प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वे इसके विजेता बने और फिर Manhunt International में भारत का प्रतिनिधित्व किया। अब बॉलीवुड में जाना चाहते हैं निपुण अपनी IT जॉब जारी रखते हुए मॉडलिंग और ब्रांड कोलैबोरेशन पर काम करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य बॉलीवुड में कदम रखना और अभिनेता के रूप में पहचान बनाना है। वे छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए रोल मॉडल बनना चाहते हैं। निपुण अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार, बहन-जीजाजी, मेंटर्स और प्रशंसकों को देते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को फर्स्ट रनर-अप का खिताब दिलाने के बाद अब वे अपने गृह नगर सिवनी लौटकर परिवार और दोस्तों के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाएंगे।
