मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। राज्यसभा चुनाव- भाजपा ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन
मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से राज्यसभा की दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस की जीत तय है। लेकिन भाजपा की नजर तीसरी सीट पर भी है। दरअसल, भाजपा नेताओं के हालिया बयानों ने सियासी गलियारों में नया सस्पेंस खड़ा कर दिया है। किसने क्या कहा? मंत्री राकेश सिंह – ये आपसे किसने कहा कि हम लड़ रहे हैं और ये किसने कहा कि नहीं लड़ रहे हैं? मंत्री गोविंद सिंह राजपूत – अभी संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, कुछ भी हो सकता है। विधायक भूपेंद्र सिंह – अगर पार्टी तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो हम जीतेंगे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय – परिस्थितियां बनेंगी तो देखेंगे। भाजपा नेताओं की इन रहस्यमयी पहेलियों ने कांग्रेस को ऐसा उलझाया है कि पार्टी अब इनके मायने तलाशती फिर रही है। इनके जवाब खोज रही है। हालांकि अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए कांग्रेस ने भी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी का दावा है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं और उसकी प्रत्याशी सौ फीसदी राज्यसभा पहुंचेगी। लेकिन जिस तरह भाजपा ने तीसरी सीट को लेकर सस्पेंस का ताना-बाना बुना है, उससे यह मुकाबला चुनाव कम और सस्पेंस थ्रिलर ज्यादा नजर आने लगा है। भाजपा की सियासी माया को देखते हुए कांग्रेस के लिए फिलहाल यही कहा जा सकता है- ‘ये चुनाव नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए… एक-एक विधायक बचाना है और राज्यसभा तक जाना है।’ राज्यसभा के लिए नामांकन में दिखा वीआईपी काफिला
मध्य प्रदेश में भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों के नामांकन के दौरान नेताओं का बड़ा काफिला चर्चा का विषय बन गया। विधानसभा पहुंचने के लिए भाजपा नेताओं का जत्था करीब 30 से 35 गाड़ियों के साथ पहुंचा। दिलचस्प बात यह है कि हाल के दिनों में भाजपा और सरकार की ओर से ईंधन बचाने, पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात लगातार कही जाती रही है। कई मौकों पर ई-रिक्शा, ई-स्कूटर और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को लेकर संदेश भी दिए गए हैं। लेकिन राज्यसभा नामांकन के मौके पर ऐसा कोई दृश्य देखने को नहीं मिला। न तो ई-रिक्शा नजर आया, न ई-स्कूटर और न ही ईंधन की बचत के लिए किसी सामूहिक बस या साझा परिवहन व्यवस्था का उपयोग दिखाई दिया। इसके बजाय नेताओं का लंबा-चौड़ा काफिला विधानसभा पहुंचा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम क्या सिर्फ फोटो और वीडियो तक ही सीमित है, या फिर उसका पालन राजनीतिक आयोजनों में भी होना चाहिए। राज्यसभा नामांकन के दौरान दिखे इस काफिले ने एक बार फिर नेताओं के संदेश और व्यवहार के बीच के अंतर पर बहस छेड़ दी है। चर्चा में जीतू पटवारी का ‘कांग्रेस की सरकार’ बनाने का दावा
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार 2028 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने का दावा कर रहे हैं। उनके ये दावे अब चर्चा का विषय बन गए हैं, क्योंकि ये दावे शेयर बाजार के आंकड़ों जैसे लगते हैं। इनमें उतार-चढ़ाव आता रहता है। दरअसल, हाल ही में जीतू पटवारी ने दावा किया था कि ‘मध्य प्रदेश में 5 लाख प्रतिशत कांग्रेस की सरकार बनेगी’। इसके बाद उन्होंने कहा कि ‘500 प्रतिशत कांग्रेस की सरकार बनेगी’। जीतू पटवारी दो दिन के भीतर दिए गए इन दोनों बयानों में 5 लाख प्रतिशत से सीधे 500 प्रतिशत पर आ गए। मतलब उनके दावे में 4 लाख 99 हजार 500 अंकों की गिरावट आ गई। हालांकि, उन्होंने सरकार बनाने के ‘मुंगेरीलाल के सपने’ वाले सीएम के बयान पर अपने अंदाज में जवाब भी दिया। उन्होंने कहा- मुख्यमंत्री जी, मैं वचन देता हूं। जैसे 500 रुपए का, 1000 रुपए का नोट धारक को वचन देता है, वैसा वचन देता हूं कि 2028 में कांग्रेस की सरकार बनेगी। यहां दिलचस्प बात ये है कि 1000 रुपए के नोट अब चलन में नहीं हैं। महिला कलेक्टर और प्रभारी मंत्री की नहीं बैठ रही पटरी
एक महिला कलेक्टर और प्रभारी मंत्री की पटरी नहीं बैठ रही। मंत्री को बताया गया कि ट्रांसफर पोस्टिंग के सारे काम कलेक्ट्रेट से हो रहे हैं। मंत्री के पास कोई पहुंच ही नहीं रहा। समर्थक तो ये भी कह रहे कि कलेक्टर पर लक्ष्मी जी मेहरबान है। मामला एक आदिवासी जिले का है। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल) ये भी पढ़ें –
मंत्री विजयवर्गीय ने उड़ाई कांग्रेस की नींद: भावुक रजनीश बोले-मुझे भाजपा की ‘अदृश्य आंखों’ ने चुना प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति में अलग ही ट्रेंड सेट कर दिया है। जिसे कामयाबी की चाबी मानकर हर कोई फॉलो कर रहा है। मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आम की चर्चा किए जाने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अपने आम के बगीचे में पहुंच गए। उन्होंने आम को फलों का राजा बताते हुए इसकी खूबियां गिनाईं। पूरी खबर पढ़ें
