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99.6% मिले तो रीवैल्यूवेशन की जिद…100/100 चाहिए:नंदिका बोलीं- खुद पर भरोसा है तो चांस जरूर लें, सामने चाहे जो हो

सीबीएसई 10वीं में 99.6% नंबर आने के बाद जहां ज्यादातर बच्चे और परिवार जश्न मनाते हैं, वहीं भोपाल की नंदिका गुप्ता ने कुछ अलग करने का फैसला किया। खुद पर और अपनी मेहनत पर भरोसा होने के कारण उसने साइंस और अंग्रेजी की कॉपियां रीवैल्यूएशन के लिए भेज दीं। दोनों विषयों में नंबर बढ़े और अब उसके 100% अंक हैं। नंदिका अब भोपाल के एक प्राइवेट स्कूल में 11वीं की छात्रा है। आखिर 99.6% जैसे शानदार स्कोर के बाद भी उसने रीवैल्यूएशन क्यों कराया और उसे अपने जवाबों पर इतना भरोसा कैसे था? भास्कर ने नंदिका से बात कर उसकी इस जिद, आत्मविश्वास और भविष्य के सपनों को जाना। टीचर ने मना किया, फिर भी लिया चांस नंदिका ने साइंस के साथ इंग्लिश में भी रीवैल्यूएशन कराया। इंग्लिश के एक बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) में सीबीएसई की मार्किंग स्कीम में अलग जवाब था, जबकि नंदिका ने दूसरा विकल्प चुना था। नंदिका बताती हैं, एक कविता की टोन बतानी थी। दो विकल्प थे-‘Excited’ और ‘Peaceful’। मैंने ‘Peaceful’ चुना, जबकि मार्किंग स्कीम में ‘Excited’ को सही जवाब माना गया था। मुझे भरोसा था कि ‘Peaceful’ ही सही है। मेरी इंग्लिश टीचर को भी मेरा जवाब सही लगा, लेकिन उन्हें लगा कि इसके लिए अप्लाई नहीं करना चाहिए। साइंस में भी पकड़ी बोर्ड की गलती साइंस में भी नंदिका को अपने जवाब पर पूरा भरोसा था। आंसर बुक देखने पर उसने पाया कि मार्किंग स्कीम के मुताबिक जरूरी सभी की-वर्ड्स (महत्वपूर्ण शब्द) उसके उत्तर में मौजूद थे। इसके बावजूद उसके नंबर काटे गए थे। नंदिका को भरोसा था कि रीवैल्यूएशन में उसे ये अंक मिल जाएंगे और ऐसा ही हुआ। ‘बचपन से ही ऐसी हूं, टीचर्स भी परेशान रहते थे’ सीबीएसई जैसी बड़ी अथॉरिटी के सामने अपनी बात पर कायम रहने के सवाल पर नंदिका मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं बचपन से ही ऐसी हूं। स्कूल में आंसर शीट दिखाई जाती थी, तो मैं मैम से कहती थी- मैम, मेरे इस जवाब के नंबर बढ़ाइए।” टीचर्स भी मुझसे परेशान होते थे। 99.6% और 100% के बीच कितना बड़ा अंतर? नंदिका के मुताबिक, आज 100% अंकों की वैल्यू बढ़ गई है। वह कहती हैं, आजकल बोर्ड में 90% या 95% से ऊपर अंक लाना कई बच्चों के लिए संभव है। अब 99% भी कई बच्चों के आ रहे हैं, लेकिन 100% बहुत कम बच्चों के आते हैं। अच्छे अंकों के बीच अंतर कम होने से प्रतियोगिता बढ़ गई है। आज बच्चों के पास पढ़ाई के बेहतर संसाधन हैं और एजुकेशन सिस्टम भी पहले से बेहतर हुआ है। इसलिए मेहनत, डेडिकेशन और माता-पिता के सपोर्ट से सबसे ऊपर पहुंचना बड़ी उपलब्धि है। मां बोलीं- नंबर बढ़े तो खुशी से उछल पड़ी नंदिका की मां को 99.6% नंबर आने की उम्मीद थी। इसलिए पहली बार में खुशी हुई, लेकिन असली सरप्राइज रीवैल्यूएशन के बाद मिला। मां ने बताया, जैसे ही नंदिका ने रिजल्ट देखा, उसने कहा- मम्मी, मेरी मार्कशीट अपडेट हो गई है।मुझे सभी विषयों में 100 नंबर मिले हैं। मैं खुशी से उछल पड़ी। ताली बजाई और ऊपर वाले कमरे से तुरंत नीचे आ गई। मैंने अपने पति से कहा- सुनो, नंदिका का रीवैल्यूएशन हो गया और उसके नंबर बढ़ गए। इसके बाद घर में जश्न का माहौल हो गया। आगे क्या करना चाहती है नंदिका? नंदिका के माता-पिता लेक्चरर और प्रोफेसर हैं। उसकी बड़ी बहन नयनी ने हैदराबाद के प्रतिष्ठित संस्थान नालसार (NALSAR) से लॉ किया है और अभी एक लॉ फर्म में एसोसिएट हैं। बहन से प्रेरित होकर नंदिका भी आगे लॉ करना चाहती हैं। इकोनॉमिक्स ऑनर्स भी उनके विकल्पों में है। फिलहाल वह करियर के विकल्प तलाश रही हैं। नंदिका की दूसरे बच्चों को सलाह नंदिका का मानना है कि छात्रों को अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए। वह कहती हैं, अगर आपको लगता है कि आपके साथ गलती हुई है और आपके नंबर बढ़ सकते हैं, तो अपने लिए आवाज उठानी चाहिए। सिर्फ इसलिए पीछे नहीं हटना चाहिए कि सामने बोर्ड या कोई बड़ी अथॉरिटी है।

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