रतलाम के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की कोर्ट ने बहुचर्चित राजीव नगर ट्रिपल मर्डर केस में अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने हत्या और लूट के मामले में तीन आरोपियों को तिहरे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। इन आरोपियों ने 25 नवंबर 2020 को छोटी दीपावली की रात गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा और बेटी दिव्या की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी दिलीप देवल घटना के कुछ दिनों बाद ही पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। किराएदार नर्स को स्कूटी नहीं दिखी, तब हुआ खुलासा
घटना का खुलासा वारदात की अगली सुबह 8 बजे हुआ था। मकान के ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली किराएदार नर्स ज्वेलिका को घर के बाहर अपनी एक्टिवा स्कूटी नहीं दिखी। वह स्कूटी के बारे में पूछने मकान मालिक के कमरे में ऊपर गई। कमरे के अंदर का नजारा देखकर वह घबरा गई। गोविंद सोलंकी, पत्नी शारदा और बेटी दिव्या के शव जमीन पर पड़े थे। तीनों के सिर में गोली लगी थी और खून बह रहा था। ज्वेलिका ने तुरंत पड़ोसियों को जानकारी दी, जिसके बाद थाना औद्योगिक क्षेत्र पुलिस मौके पर पहुंची और केस दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज से पकड़े गए आरोपी, मुख्य आरोपी का हुआ एनकाउंटर
तत्कालीन थाना प्रभारी रेवलसिंह बरड़े की टीम ने घटनास्थल और आने-जाने वाले रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में आरोपी फरियादी ज्वेलिका की सफेद स्कूटी लेकर भागते हुए और इंद्रा नगर के नूरी गेस्ट हाउस में जाते दिखे। पुलिस ने गेस्ट हाउस के फुटेज के आधार पर सबसे पहले अनुराग उर्फ बॉबी को गिरफ्तार किया। उसने पूछताछ में दिलीप देवल, लाला भाबोर और गोलू बिलवाल के साथ मिलकर हत्या की बात कबूली। इसके बाद पुलिस ने गोलू और लाला को भी गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी दिलीप देवल को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसने देसी पिस्टल से फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दिलीप देवल मारा गया। पुलिस ने उसके किराए के घर से पिस्टल, जिंदा कारतूस और लूटे गए जेवरात जब्त किए थे। डीएनए और बैलेस्टिक रिपोर्ट बनी सजा का मुख्य आधार
अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि कोर्ट में 111 भौतिक वस्तुएं, 210 दस्तावेज और 33 गवाह पेश किए गए। सजा का मुख्य आधार परिस्थितिजन्य साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट और बैलेस्टिक रिपोर्ट रहे। आरोपियों के कपड़ों और चप्पलों पर मृतकों का डीएनए मिला था। इसके अलावा, वारदात के बाद भागने में इस्तेमाल की गई स्कूटी के हैंडल पर आरोपी लाला का डीएनए पाया गया। बैलेस्टिक जांच में यह साबित हुआ कि मुख्य आरोपी दिलीप के घर से बरामद पिस्टल से ही गोलियां चलाई गई थीं। इन सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने अनुराग उर्फ बॉबी (33), गोलू उर्फ गौरव (29) और लाला भाबोर (27) को दोषी ठहराते हुए तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पटाखों के शोर में छिपाई गोलियों की आवाज, पहले भी की थी हत्या
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी दिलीप देवल हत्या कर लूटपाट करने का आदी था। उसने वारदात के लिए छोटी दीपावली का दिन इसलिए चुना था ताकि पटाखों के शोर में गोलियों की आवाज किसी को सुनाई न दे। दिलीप गुजरात के दाहोद में भी हत्या के आरोप में जेल में बंद था और पैरोल से फरार होकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे रतलाम में रह रहा था। आरोपी अनुराग ने पूछताछ में यह भी बताया था कि दिलीप देवल ने अपने साथियों के साथ मिलकर 18 मई 2020 को रतलाम के कस्तूरबा नगर में प्रेमकुंवर सिसोदिया की भी लूट के इरादे से हत्या की थी। दिलीप देवल के एनकाउंटर के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उसे ‘नरपिशाच’ करार देते हुए कहा था कि ऐसे लोगों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। पुलिस ने इस मामले को जघन्य और सनसनीखेज अपराधों की श्रेणी में रखा था और सभी आरोपी 2 दिसंबर 2020 से ही जेल में बंद हैं।
