उत्तर प्रदेश में व्यवस्था बदलने के लिए युवा अगर सड़क पर उतरकर हिंसा करते हैं तो उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। राज्य सरकार ने अलग-अलग विभागों, परिषदों, निगमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती से चुने जाने वाले अभ्यर्थियों के चरित्र प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों में यह बदलाव किया है। यूपी में नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. देवराज ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद नए नियम जारी किए हैं। इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति ऐसे संगठन का सदस्य है, जिसका मकसद हिंसा के जरिए समाज की व्यवस्था बदलना है, तो उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा। हालांकि, किसी को उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। नए नियमों के तहत हत्या, डकैती, बलात्कार, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियों, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में आरोपी या दोषी पाए जाने पर अभ्यर्थी को भी सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। हाल ही में दिल्ली, लखनऊ समेत देशभर में कई जेन-जी आंदोलन हुए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी प्रदर्शन हुए। कुछ संगठनों ने आंदोलन के दौरान सत्ता बदलने (रिजीम चेंज) का आह्वान भी किया था। भाजपा ने इन प्रदर्शनों को हिंसा के जरिए सत्ता बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। जांच शुरू के 3 साल बाद भी एक्टिव माना जाएगा 21 साल की उम्र पूरी करने के बाद अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ समाज की व्यवस्था बदलने से जुड़ी हिंसा में शामिल होने का मामला दर्ज होता है। या जांच की तारीख से तीन साल के भीतर वह व्यवस्था बदलने से जुड़ी किसी गतिविधि में शामिल पाया जाता है, तो इसे इस बात का संकेत माना जाएगा कि वह अब भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय है। हालांकि, इस दौरान उसके विचार और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दिखता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर विचार किया जा सकता है। FIR दर्ज होने पर नौकरी से बाहर नहीं होंगे नए नियमों में साफ किया गया है कि सिर्फ एफआईआर होने या जांच चलने से किसी अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। मामले में बरी होने, समझौता होने या किशोर न्याय कानून के तहत आने वाले मामलों में भी उसे अयोग्य नहीं माना जाएगा। पहले से सरकारी नौकरी कर रहे कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं होगा। अगर चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तो भी अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र देने से नहीं रोका जाएगा। स्वघोषणा पत्र और तय फॉर्म भरवाकर अस्थायी नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। अगर अभ्यर्थी गलत जानकारी देता है या चरित्र सत्यापन में अयोग्य पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी। 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट जिला पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को किसी भी युवा के सत्यापन का आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट नियुक्ति अधिकारी को देनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी गृह विभाग करेगा।
