21 मई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में एक युवक खेत में बेबस पड़ा तड़प रहा था और पांच-छह हमलावर उस पर लाठियों से ताबड़तोड़ वार कर रहे थे। महज 26 सेकंड के वीडियो में युवक पर 60 से ज्यादा बार लाठियां बरसाई गईं। वीडियो देखकर लोगों के मन में सवाल उठे- युवक कौन है, हमलावर कौन हैं और क्या वह बच पाया? भास्कर ने इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पीड़ित को ढूंढ निकाला। काफी कोशिशों के बाद वह बात करने को राजी हुआ। युवक का नाम संदीप कुमावत है और उस पर 11 मई को हमला हुआ था। संदीप ने पुलिस को शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने 10 दिन तक कोई एक्शन नहीं लिया। एक किसान ने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया तो पुलिस की लापरवाही सामने आई। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया। संदीप पर हमला क्यों हुआ और पुलिस की लापरवाही कैसे सामने आई, पढ़िए रिपोर्ट… उस दिन क्या हुआ: संदीप कैसे हमलावरों के निशाने पर आया
उज्जैन जिले के पिपलियाहाना गांव का रहने वाला संदीप कुमावत अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। वह आसपास के गांवों में डीजे (DJ) चलाने का काम करता है। घटना 11 मई की है। संदीप उज्जैन से घर लौट रहा था। उज्जैन-उन्हेल हाईवे से गांव के रास्ते पर मुड़ते ही मंदिर के पास 8-10 लड़कों ने उसकी बाइक रोक ली। वे उसे जबरदस्ती एक खेत में ले गए। वहां उन्होंने उससे 5 हजार रुपए महीना ‘हफ्ता’ देने की मांग की। मना करने पर लठ्ठ लिए हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। संदीप बताते हैं, “वे मुझे करीब तीन मिनट तक पीटते रहे। उन्होंने अपने मुंह पर कपड़ा बांध रखा था और पीटते हुए वीडियो भी बना रहे थे।” पुलिस की भूमिका पर सवाल: वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई
संदीप ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 11 मई को मारपीट के तुरंत बाद वे भैरवगढ़ थाना पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने सिर्फ आवेदन लेकर छोड़ दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। असहनीय दर्द के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जहां 5 दिन इलाज चला। संदीप का आरोप है कि पुलिसकर्मी ढाबों पर इन्हीं बदमाशों के साथ पार्टियां करते हैं, इसलिए उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। पुलिस ने केस 20 मई को वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज किया। संदीप इस वीडियो के सामने आने को एक ‘करिश्मा’ मानते हैं। दरअसल, बदमाशों ने यह वीडियो गांव के एक किसान को भेजकर धमकी दी थी कि “पैसे दे, वरना तेरा हाल भी संदीप जैसा कर देंगे।” किसान ने डरने के बजाय वीडियो अपने परिचित को भेज दिया और वहां से यह वायरल हो गया। उधर, पुलिस का तर्क अलग है। भैरवगढ़ थाने के जांच अधिकारी एएसआई राजेश के अनुसार, वे उस समय एक लड़की के अपहरण के केस में व्यस्त थे, इसलिए प्रकरण दर्ज करने में देरी हुई। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ‘ढाबा गैंग’ का खौफ: सूदखोरी और कब्जे के आरोप
उज्जैन-उन्हेल रोड पर सक्रिय इन बदमाशों को स्थानीय लोग ‘ढाबा गैंग’ के नाम से जानते हैं। करीब 1200 की आबादी वाले पिपलियाहाना गांव में इस गैंग की दहशत है। ग्रामीणों के अनुसार, यह गैंग हफ्ता वसूली के साथ 10 प्रतिशत ब्याज पर पैसे भी चलाती है। पैसा नहीं लौटाने पर ये जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। संदीप के साथियों का कहना है कि गैंग में 25 से 30 लड़के हैं। 21 दिन तक छिपकर रहने को मजबूर संदीप
संदीप पिछले 21 दिनों से जान बचाकर रिश्तेदारों के यहां छिपकर रह रहे थे। उन्होंने डीजे का काम भी बंद कर दिया है, क्योंकि उसके लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है। संदीप बताते हैं, “आज भी अगर गांव में कोई अजनबी दिखता है, तो लगता है कि कहीं वह ढाबा गैंग का आदमी तो नहीं? मैं अभी भी उस सदमे से उबर नहीं पाया हूं।” पुलिस का दावा: मामला आपसी विवाद का
एक तरफ संदीप इसे हफ्ता वसूली और गैंग का आतंक बता रहे हैं, वहीं पुलिस की कहानी अलग है। एएसआई राजेश के मुताबिक, यह मामला हफ्ता वसूली का नहीं बल्कि डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद का है। पुलिस का कहना है कि कुछ दिन पहले संदीप एक गांव में डीजे बजाने गया था, जहां उसका विवाद बंटी, रूपेश और कुलदीप से हुआ था। इसी रंजिश में उन्होंने संदीप को घेरा। पुलिस का दावा है कि हमले में लकड़ी के लठ्ठ नहीं, बल्कि प्लास्टिक के पाइपों का इस्तेमाल किया गया था।
