मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रहीं हर्षा रिछारिया ने संन्यास लेने के एक माह के भीतर ही प्रवचन की शुरुआत कर दी है। शुक्रवार को उज्जैन से करीब 22 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुरा गांव से उन्होंने अपने प्रवचन की शुरुआत की। यहां 108 कुंडीय यज्ञ के दौरान उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से करीब डेढ़ घंटे तक देवी शक्ति, माता सती और 52 शक्तिपीठों का महत्व बताया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनका प्रवचन सुनने पहुंचे। कार्यक्रम के जगह-जगह लगाए गए होर्डिंग्स अब संन्यास के बाद उन्होंने प्रवचन की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। लक्ष्मीपुरा गांव में आयोजित कार्यक्रम के लिए जगह-जगह बड़े होर्डिंग लगाए गए थे, जिन पर “देवी प्रवचन – हर्षानंद गिरी” लिखकर उनकी तस्वीरें लगाई गई थीं। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुए प्रवचन में हर्षा ने राजा दक्ष और माता सती की कथा से शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिना निमंत्रण कहीं नहीं जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने 52 शक्तिपीठों और हिंदी वर्णमाला के 52 अक्षरों को जोड़ते हुए धार्मिक व्याख्या भी की। हर्षा बोली कि हिंदी वर्णमाला में जैसे 52 शब्द होते हैं, वैसे ही शक्ति पीठ भी 52 हैं, इनसे निकले बीज मन्त्र निकले हर 52 वर्ण माला बनी। मंच से हर्षा ने शक्ति पीठ के दर्शन की मान्यता बताई। उन्होंने कहा कि पहले पूरी पृथ्वी सनातनी थी। 19 अप्रैल को किया था संन्यास ग्रहण 19 अप्रैल को उज्जैन स्थित मोनी आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज के सानिध्य में हर्षा ने विधिवत संन्यास ग्रहण किया था। संन्यास के बाद उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर ‘स्वामी हर्षानंद गिरी’ नाम अपनाया। उनके संन्यास को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और सवाल भी उठे, लेकिन हर्षा लगातार अपने विरोधियों को जवाब देती रहीं। अपने प्रवचन में यह बोलीं ‘हर्षानंद गिरी’ प्रवचन के दौरान हर्षा ने कहा कि शक्तिपीठों से बीज मंत्रों की उत्पत्ति हुई और उनसे ही वर्णमाला बनी। उन्होंने यह भी कहा कि “पहले पूरी पृथ्वी सनातनी थी।” पहली बार इतने बड़े मंच से प्रवचन देने पहुंचीं हर्षा बीच-बीच में लिखित नोट्स देखकर बोलती नजर आईं। बाद में उन्होंने कहा कि वे मंच पर आने से पहले काफी घबराई हुई थीं। कैमरे के सामने बोलना और हजारों लोगों के सामने बोलना अलग अनुभव है, लेकिन गुरु और माता के आशीर्वाद से वे प्रवचन कर पाईं। बिन गुरु कृपा संभव नहीं
प्रवचन के दौरान हर्षानंद गिरी ने कहा कि बिना गुरु और माता रानी की कृपा के कथा संभव नहीं है। शुक्रवार को माता रानी का विशेष दिन बताते हुए उन्होंने मातृशक्ति को प्रणाम किया और कहा कि “आप हैं तो हम हैं।” उन्होंने कहा कि इस सृष्टि में महादेव और जगत जननी आदि शक्ति ऐसी शक्तियां हैं, जिनका न आदि है और न अंत। देवी चेतना और जागृति का स्वरूप हैं, जिनके प्राकट्य का वर्णन किसी शास्त्र में नहीं मिलता। हर्षानंद गिरी ने यह भी कहा कि देवी कथा सुनना भी माता रानी की विशेष कृपा से ही संभव होता है। महादेव-आदिशक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हर्षानंद गिरी ने प्रवचन में कहा कि महादेव और आदिशक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। उन्होंने समझाया कि जैसे माता-पिता दोनों का समान महत्व होता है, वैसे ही शिव और शक्ति भी कभी अलग नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि हर शिव मंदिर में भगवती और हर देवी मंदिर में महादेव विराजमान होते हैं। देवी भागवत और शिव महापुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं। हर्षानंद गिरी ने श्रद्धालुओं से माता भगवती का स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्चे मन से पुकारने पर मां स्वयं अपने भक्तों की रक्षा और कल्याण के लिए आती हैं। स्थानीय नेता भी पहुंचे प्रवचन के दौरान व्यास गद्दी पर बैठीं हर्षा के चरण स्पर्श करने के लिए लोगों की कतार लग गई। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया सहित कई स्थानीय नेता और श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रवचन समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने उन्हें दक्षिणा भी भेंट की। कार्यक्रम में लक्ष्मीपुरा, कायथा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ये खबर भी पढ़ें… हर्षा रिछारिया बोलीं-भावनात्मक कमजोरी से शुरू होता है लव जिहाद महाकुंभ से चर्चा में आईं भोपाल की हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका एक वीडियो है, जिसमें उन्होंने ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील और विवादित मुद्दे पर अपनी बात रखी है। खास बात यह है कि उन्होंने इस विषय को किसी सामान्य बहस की तरह नहीं, बल्कि अपने निजी अनुभव से जोड़ते हुए समझाने की कोशिश की है।पूरी खबर पढ़ें
