एक गोली आज रात को दे देना… बाकी चार गोली परसों देना। और हां, गोली कड़क चाय के साथ ही खिलाना… असर जल्दी होगा। यह सलाह किसी डॉक्टर ने नहीं दी बल्कि शहर के एक मेडिकल स्टोर संचालक ने समझाई। उसने बिना कोई डॉक्टर पर्चा देखे गर्भपात की दवा रिपोर्टर को थमा दी। ग्वालियर में गर्भपात की दवाएं अब मेडिकल स्टोर्स पर ऐसे बिक रही हैं, जैसे सिरदर्द की गोली हो। न डॉक्टर की जरूरत, न जांच, न अल्ट्रासाउंड… बस पैसे दीजिए और एमटीपी किट ले जाइए। दैनिक भास्कर की रिपोर्टर ने 5 दिन तक शहर के अलग-अलग इलाकों में ग्राहक बनकर पड़ताल की। ज्यादातर दुकानों पर बिना किसी सवाल के एमटीपी किट आसानी से बेच दी गई। किसी ने महिला की उम्र नहीं पूछी। किसी ने यह जानना जरूरी नहीं समझा कि गर्भ कितने दिन का है। कई दुकानदार तो खुद डॉक्टर बन बैठे। कोई पपीता खाने की सलाह देता मिला, तो कोई कहता रहा कि डरने की जरूरत नहीं… गोली गारंटी से काम करेगी। 3 मेडिकल स्टोर्स, 3 खौफनाक सच: खुलेआम मिल रहा मौत का सामान स्टोर-1: डॉक्टर धंधा करते हैं… दवा यहां से ले जाओ पहले मेडिकल स्टोर पर रिपोर्टर ने एमटीपी किट मांगी तो दुकानदार ने तुरंत दवा निकाल दी। रिपोर्टर ने पूछा कि डॉक्टर को दिखाना जरूरी है क्या? तो उसने कहा- डॉक्टर के पास गए तो अल्ट्रासाउंड और टेस्ट कराएंगे। उनका धंधा चलता है। यहां ~500 में काम हो जाएगा। स्टोर-2: पपीता खिलाना… गर्मी बढ़ेगी, तभी असर होगी एक मेडिकल स्टोर पर दुकानदार ने दवा के साथ घरेलू नुस्खे भी बताए। कहा- एक गोली आज देना, बाकी बाद में। पपीता जरूर खिलाना… शरीर में गर्मी बढ़ेगी तो दवा असर करेगी। नारियल पानी मत देना। अगर ज्यादा ब्लीडिंग हो तो उसकी गोली भी मिल जाएगी। स्टोर-3: यह दवा ब्लैक में आती है… लेकिन फुलप्रूफ है एक संचालक ने रिपोर्टर को दवा देते हुए कहा कि यह दवा ‘ब्लैक’ में आती है, यही कारण है कि- यह पूरे एरिया में नहीं मिलेगी। हम रिस्क लेकर मंगाते हैं। 50 दिन तक की प्रेग्नेंसी साफ हो जाएगी। दुकानदार को दवा का बेसिक मेडिकल प्रोसेस तक ठीक से पता नहीं था। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. शिराली रूनवाल, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ बिना सोनोग्राफी पिल से बच्चेदानी फट सकती है बिना सोनोग्राफी कराए एमटीपी किट लेना सीधे मौत को बुलावा देना है। कई बार गर्भ बच्चेदानी की जगह ट्यूब में ठहर जाता है। ऐसे में पिल लेने से ट्यूब फट जाती है और इंटरनल ब्लीडिंग से महिला की जान जा सकती है। एनीमिया या पहले सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं में गलत डोज से गर्भाशय फटने का खतरा रहता है। 20 हफ्ते से कम की प्रेग्नेंसी में भी रजिस्टर्ड एमटीपी सेंटर और विशेषज्ञ गाइनिक की निगरानी जरूरी है। 18 से 23 साल की लड़कियां सबसे ज्यादा एमटीपी किट का यूज करती हैं। पपीता और गर्म चीजें खाने से बॉडी में इंफेक्शन फैल सकता है। यह भ्रामक जानकारी है। ब्लैक भी… 500 की किट ~1500 में बेच रहे एक होलसेल कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिल पर जितनी किट आती हैं, उससे कई गुना ज्यादा बिना रिकॉर्ड मेडिकल स्टोर्स तक पहुंचाई जाती हैं। कई दुकानों पर हर महीने 10 से 15 किट बिक रही हैं। 400-500 रु. की किट को ‘ब्लैक’ बताकर 1000 से 1500 रु. में बेचा जा रहा है।
