कहते हैं कि अगर हौसला बुलंद हो और कुछ नया करने की चाह हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं। खेल के मैदान पर चौके-छक्के लगाने वाले नेशनल क्रिकेटर शिवम शर्मा (राजौरिया) ने 24 साल की उम्र में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने न सिर्फ खेल में राज्य का नाम रोशन किया, बल्कि खेती को एक नए और मुनाफेदार बिजनेस मॉडल के रूप में स्थापित कर आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। एक समय बैट थामने वाले शिवम आज नेपियर घास की खेती के दम पर सालाना लाखों रुपए का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। एक बार का निवेश,10 साल तक बंपर मुनाफा
शिवम के अनुसार नेपियर घास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक बार लागत और सालों साल मुनाफा मिलता है।,इसे एक बार लगाने के बाद यह लगातार 10 से 15 साल तक उपज देती रहती है। साल भर में इस घास की 5 से 6 बार कटाई की जा सकती है। यह हर प्रकार की जमीन में उग सकती है, बशर्ते वहां सिंचाई की अच्छी व्यवस्था हो। इसे हर 15 दिन में पानी और प्रत्येक कटाई के बाद खाद की जरूरत होती है।
शिवम के मुताबिक, प्रति बीघा खेत से साल भर में लगभग 600 क्विंटल माल निकलता है। इस हरे चारे को वह गौशालाओं और डेयरी संचालकों को 250 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बेचते हैं। सभी खर्चे निकालने के बाद उन्हें प्रति बीघा 80,000 से 1 लाख रूपए तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। इसी मुनाफे के दम पर आज उन्होंने खेती का रकबा 5 बीघा से बढ़कर 100 बीघा तक पहुंच चुका है। इसमें से 90 बीघा जमीन आसपास के गांवों में किराए पर लेकर खेती कर रहे हैं। मेरठ के एक दौरे ने बदली किस्मत
यह कहानी साल 2021 में शुरू हुई, जब शिवम क्रिकेट का सामान खरीदने मेरठ गए थे। वहां उन्होंने अपने एक साथी खिलाड़ी के पिता को डेयरी फार्मिंग और उसके चारे के लिए नेपियर घास की खेती करते देखा। बस यहीं से उनके मन में साइड बिजनेस के तौर पर इसकी खेती करने का विचार आया। शुरुआत आसान नहीं थी। शिवम ने पहली बार 60,000 खर्च कर ब्राजील से नेपियर की कलमें (गांठें) मंगवाईं, लेकिन डिलीवरी में देरी के कारण वे खराब हो गईं। भारी नुकसान के बावजूद शिवम ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा मेरठ से कलमें मंगवाईं और महज 5 बीघा जमीन से अपने इस सफर की नई शुरुआत की। ऐसे करें नेपियर घास की खेती
युवा किसान का कहना है कि घास की खेती एक बीघा में करीब 20 हजार रुपए की शुरुआती लागत से शुरू की जा सकती है। इसकी 5,000 गांठें (कलमें) लगती हैं, जिनकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए होती है। खेत तैयार करने के बाद 2×2 फीट की दूरी पर रोपाई की जाती है। रोपाई में चार मजदूरों की मजदूरी करीब 2 हजार रुपए और अन्य खर्च मिलाकर कुल लागत 20 हजार रुपए आती है। एक बार लगाने के बाद यह फसल 10 से 15 साल तक लगातार उत्पादन देती है।
