शहडोल जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) से तालाब निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए। भास्कर पड़ताल में यहां भी करोड़ों रुपए की गड़बड़ी सामने आई है। वर्ष 2022-23 की कार्ययोजना में डीएमएफ मद से तालाब निर्माण, घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण के 43 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए, जिनके लिए 7.48 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए। इनमें 24 नए तालाब निर्माण की परियोजनाएं थीं, जिनका बजट 5.75 करोड़ रुपए था। डीएमएफ के रिकॉर्ड के अनुसार, एक तालाब की औसत लागत 25 लाख रुपए है। पड़ताल में सामने आया कि नए तालाब निर्माण के नाम पर स्वीकृत आधे से अधिक प्रोजेक्ट ऐसे तालाबों पर हैं, जो वर्षों से पहले ही अस्तित्व में हैं। यानी जिन स्थानों पर नए तालाब बनने का दावा किया गया, वहां नया निर्माण नहीं मिला। इसी तरह हाईवे किनारे बने गड्ढों को भी तालाब बताकर 25-25 लाख रुपए का भुगतान ले लिया गया। रोड के लिए मुरम निकालने से हुए गड्ढे को तालाब बताकर 25 लाख निकाले जयसिंहनगर ब्लॉक के जोरा गांव के पास रीवा-शहडोल हाईवे निर्माण के दौरान खोदे गए एक गड्ढे को ही तालाब घोषित कर दिया गया। हाईवे के लिए मुरम निकालने से सड़क किनारे करीब 2 से ढाई एकड़ का बड़ा गड्ढा बन गया था। इसके लिए ₹25 लाख रुपए आवंटित। पुराने तालाब की पाल टूटी, नए के नाम पर ₹20.56 लाख रुपए मंजूर जयसिंहनगर ब्लॉक की बरना पंचायत के झिरिया में 20 साल पुराना तालाब है। 3 साल पहले इसकी पाल टूट गई। नियमतः इसकी मरम्मत होनी चाहिए थी, लेकिन इस पुराने तालाब के स्थान पर ₹20.56 लाख की लागत से ‘नवीन तालाब निर्माण’ की स्वीकृति जारी कर दी गई। नाले की पिचिंग को बनाया तालाब : ब्योहारी ब्लॉक के तेंदुहा गांव में बाणसागर डैम किनारे दर्री नाले की पुलिया और पिचिंग पहले ही डीएमएफ के ₹12 लाख से हो चुकी थी। बाद में इसी नाले को सांसद के प्रस्ताव पर ₹25 लाख की लागत से ‘नवीन तालाब निर्माण’ बताकर स्वीकृत कर दिया गया। मौके पर नया तालाब नहीं मिला, लेकिन भुगतान हो गया। डीएमएफ से पुराने तालाब नहीं बनाए जा सकते। हाईवे के लिए जहां मुरम निकाली जाती है, वहां तालाब बनाने के निर्देश सरकार ने दो-तीन साल पहले दिए थे। संबंधित स्थल पर उसी गाइडलाइन के तहत तालाब बनाया गया होगा। फिर भी जिला पंचायत सीईओ से जांच कराऊंगा।’- केदार सिंह, कलेक्टर, शहडोल
