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मिलिंद महाजन के शोरूम विवाद में करोसिया को झटका:पुलिस अफसरों पर कार्रवाई की मांग खारिज; कोर्ट ने परिवाद और बयानों में पाया अंतर

इंदौर में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के ऑटोमोबाइल शोरूम से जुड़े विवाद में पुलिस अधिकारियों को कोर्ट से राहत मिली है। विशेष एससी-एसटी न्यायालय ने सोमवार को सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया की ओर से दायर परिवाद खारिज कर दिया। इसमें पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा, एसीपी आशीष पटेल और आजादनगर थाने के तत्कालीन टीआई नीरज मेढ़ा सहित अन्य लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। आरोपों और बयानों में अंतर कोर्ट ने परिवाद में लगाए गए आरोपों, करोसिया के बयानों, पुलिस प्रतिवेदन और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान परिवाद में उल्लेखित कुछ आरोपों और करोसिया के बयानों के बीच अंतर सामने आया। इन तथ्यों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया। इससे संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों को राहत मिली है। शोरूम विवाद के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर मिलिंद महाजन की कंपनी मिडवेस्ट ऑटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड के शोरूम और सर्विस सेंटर में 6 दिसंबर 2024 को हुए विवाद, हमले और तोड़फोड़ के मामले में प्रताप करोसिया के रिश्तेदार सौरभ करोसिया सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला बढ़ने के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराएं लगाई गईं और उनका जुलूस भी निकाला गया था। गारंटी में वाहन की सर्विसिंग के लिए राशि मांगने का आरोप करोसिया ने परिवाद में आरोप लगाया था कि वे अपने टैंकर की सर्विसिंग कराने शोरूम पहुंचे थे। वाहन गारंटी अवधि में होने के बावजूद उनसे राशि मांगी गई। इसका विरोध करने पर उन्हें घेरकर बंधक बनाया गया और बाद में उनके खिलाफ ही आजादनगर थाने में प्रकरण दर्ज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि 9 दिसंबर 2024 को करीब 300 लोगों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर आरोपियों का जुलूस निकालने और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। करोसिया के मुताबिक इसके बाद पुलिस ने मामले में धाराएं बढ़ाईं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें हथकड़ी लगाकर शोरूम ले जाने की कार्रवाई भी पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा के निर्देश पर की गई थी। परिवाद में जातिसूचक शब्द कहने, गाली-गलौज करने और कमोड से मूत्र मिला पानी पीने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। परिवाद और बयानों में अंतर को कोर्ट माना अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परिवाद में लगाए गए आरोपों की तुलना करोसिया के बयानों और पुलिस प्रतिवेदन से की। कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत सामग्री में कुछ गंभीर आरोपों का उल्लेख परिवाद और बयानों में एक समान नहीं पाया गया। जातिसूचक शब्द कहने और बंधक बनाने जैसे आरोपों को लेकर भी कोर्ट ने बयानों में सामने आए अंतर पर विचार किया।

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