मध्य प्रदेश के डिप्टी CM जगदीश देवड़ा के OSD रहे दीपम रायचुरा को सस्पेंड कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सोमवार रात को यह आदेश जारी किया। दैनिक भास्कर में शराब दुकान टेंडर में गड़बड़ी उजागर होने के बाद उन्हें OSD पद से हटाया गया था। अब जांच में 2.75 करोड़ रुपए की फर्जी FDR स्वीकारने और बिना पार्टनरशिप डीड लाइसेंस ट्रांसफर करने जैसी गड़बड़ियां सामने आने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। रायचुरा पर भोपाल में दो शराब दुकानें दिलाने के बदले एक करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप भी है। ₹930 करोड़ की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के बयान के बाद खुलासा हुआ। रायचुरा को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने का दावा किया था। गोगिया ने दावा किया था- कि 50 लाख रुपए कैश और 50 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर किए थे। जांच में 2.75 करोड़ की FDR फर्जी मिली आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के मुताबिक- शराब दुकान की सिक्योरिटी के लिए AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपए की FDR स्वीकार की गई थी। इस पर 12 मई 2024 की तारीख थी। 20 मई को सत्यापन की बात दर्ज थी। बाद में बैंक ने पत्र देकर बताया कि उसने यह FDR जारी ही नहीं की थी। FDR के सत्यापन की जिम्मेदारी आबकारी उपनिरीक्षक वर्षा उइके की थी। उन्होंने जांच में कहा कि उन्हें सत्यापन के लिए कोई पत्र नहीं मिला। FDR पर बैंक की शाखा का नाम भी नहीं था। इसके बावजूद लाइसेंसी जसवंत के ईमेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई। जांच में FDR और सत्यापन रिपोर्ट दोनों फर्जी पाई गईं। 1.37 करोड़ की सिक्योरिटी 22 दिन देर से जमा हुई जांच के मुताबिक, 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपए की नकद राशि 50% सिक्योरिटी के रूप में जमा होनी थी। यह राशि निर्धारित समय से 22 दिन देर से जमा हुई। इसके बावजूद देरी पर कार्रवाई नहीं की गई और दूसरी सिक्योरिटी लिए बिना ही राशि को समायोजित कर लिया गया। बिना पार्टनरशिप डीड के लाइसेंस ट्रांसफर मेसर्स मां माइंस के लाइसेंस ट्रांसफर में भी गड़बड़ी सामने आई। ट्रांसफर की राशि 10 जुलाई 2024 को मिली थी, जबकि कलेक्टर भोपाल का आदेश 27 दिसंबर 2024 को जारी हुआ। जांच के मुताबिक, ट्रांसफर से पहले पार्टनरशिप डीड नहीं ली गई। आदेश में विजय सिंह को भागीदार बताया गया, लेकिन सप्लीमेंट्री पार्टनरशिप डीड में उनका नाम नहीं था। इसके बावजूद विजय सिंह की 76 लाख रुपए की बैंक गारंटी स्वीकार कर ली गई। यह गारंटी ICICI बैंक, नेहरू नगर, भिलाई से जुड़ी थी। 15 जुलाई 2024 को जमा हुई थी। जांच में पाया गया कि विजय सिंह न तो मूल लाइसेंसधारी थे और न ही फर्म के भागीदार। उनका फर्म से कोई लिखित संबंध भी नहीं था। व्यक्तिगत खाते के चेक भी स्वीकारे जांच में विजय सिंह के व्यक्तिगत बैंक खाते से जुड़े चेक स्वीकार करने पर भी सवाल उठे। इससे सरकारी राजस्व की वसूली ऐसे व्यक्ति पर निर्भर हो गई, जिसका लाइसेंसी फर्म से कानूनी संबंध नहीं था। जांच में प्रताप धाकड़ और विजय सिंह को मेसर्स मां माइंस और बिलखरिया कंपोजिट शराब दुकान का भागीदार या लाइसेंसी बताया गया, जबकि विजय सिंह का नाम पार्टनरशिप डीड में नहीं था। इसी तरह आशीष धाकड़ को भी मेसर्स मां माइंस का भागीदार बताया गया, जबकि वे न फर्म के मालिक थे और न ही सप्लीमेंट्री पार्टनरशिप डीड में उनका नाम था। निलंबन अवधि में ग्वालियर रहेगा मुख्यालय आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जांच के आधार पर रायचुरा को निलंबित करने का आदेश जारी किया। रायचुरा जिला आबकारी अधिकारी, द्वितीय श्रेणी के पद पर हैं। राज्यस्तरीय उड़नदस्ते में प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर रहेगा। ………………….. यह खबर भी पढ़ें उपमुख्यमंत्री के OSD को 1 करोड़…8 क्लबों में लगा पैसा मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचुरा को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर ₹930 करोड़ की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के उस बयान के बाद चर्चा में आई, जिसमें उसने रायचुरा को ₹1 करोड़ की रिश्वत देने का दावा किया है। पढ़ें पूरी खबर…
