जबलपुर में बुजुर्ग माता-पिता की शिकायतों पर कलेक्टर कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में राहत दी है। वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत अपीलों पर सुनवाई करते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने एसडीएम के आदेश निरस्त कर दिए। कोर्ट ने एक मामले में बेटे और दूसरे में बहू को एक महीने के भीतर मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। बेटे को मकान और दुकान खाली करने के आदेश कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 70 वर्षीय बुजुर्ग पिता की अपील स्वीकार करते हुए उनके 50 वर्षीय बेटे को बेलबाग स्थित मकान और दुकान का कब्जा एक महीने के भीतर खाली करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही एसडीएम रांझी के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है। मदन महल निवासी 70 वर्षीय बसंत कुमार रामचंदानी ने कलेक्टर कोर्ट में अपील दायर कर बताया था कि उन्होंने बेलबाग मेन रोड स्थित 1050 वर्गफुट का दो मंजिला मकान वर्ष 1983 में अपनी कमाई से खरीदा था। इसमें दुकानें भी शामिल हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने इस संपत्ति की वसीयत अपने बेटे सुनील कुमार रामचंदानी के पक्ष में पंजीकृत कराई थी। बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि वसीयत बेटे के नाम करने के बाद वह उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने लगा। इतना ही नहीं, उन्हें अपने ही घर से बाहर निकाल दिया गया। बसंत कुमार ने जुलाई 2025 में वसीयत निरस्त करा दी थी। इसके बावजूद बेटे का संपत्ति पर कब्जा बना रहा। बुजुर्ग के अनुसार, बेटे के पास खेरमाई मंदिर के सामने कृपाल चौक, गुप्तेश्वर वार्ड और मदन महल रोड स्थित महानद्दा में दो मकान हैं। कृपाल चौक स्थित मकान से उसे 80 हजार रुपए मासिक किराया मिलता है, जबकि महानद्दा स्थित बंगले में वह परिवार के साथ रहता है। इसके बावजूद पिता को भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा। एसडीएम के आदेश के खिलाफ की थी अपील बुजुर्ग पिता ने पहले एसडीएम रांझी के समक्ष बेदखली का आवेदन दिया था। एसडीएम कोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को आदेश दिया था कि यह संपत्ति से जुड़ा विवाद है और भरण-पोषण का मामला नहीं बनता। एसडीएम ने बेटे को पिता से विवाद नहीं करने और उन्हें शांतिपूर्वक रहने देने के निर्देश दिए थे। मकान खाली कराने का स्पष्ट आदेश नहीं होने पर पिता ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 16 के तहत कलेक्टर कोर्ट में अपील की। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कहा कि बुजुर्ग पिता को अपनी स्वअर्जित संपत्ति में जीवन के अंतिम पड़ाव पर बिना विवाद के शांतिपूर्वक रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में यह चिंताजनक है कि बुजुर्ग पिता को अपने ही बेटे से प्रताड़ना झेलनी पड़े। बेटा सक्षम है और उसके पास रहने के अन्य साधन भी हैं, इसलिए उसे पिता की संपत्ति से अलग रहना चाहिए। कलेक्टर ने बेटे सुनील कुमार रामचंदानी को परिवार और सामान सहित एक महीने के भीतर संपत्ति खाली कर पिता को सौंपने का आदेश दिया है। तहसीलदार रांझी और थाना प्रभारी बेलबाग को आदेश का समय-सीमा में पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। बहू को भी एक महीने में मकान खाली करने के निर्देश दूसरे मामले में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 87 वर्षीय बुजुर्ग रूपलाल कोरी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी बहू रेनू कोरी को एक महीने के भीतर मकान खाली करने का आदेश दिया है। गोहलपुर थाना क्षेत्र के त्रिमूर्ति नगर (डॉ. राममनोहर लोहिया वार्ड क्रमांक 29) निवासी रूपलाल कोरी टेलीग्राफ फैक्ट्री से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी बचत से वर्ष 1986 में 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था। उनके पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। रूपलाल कोरी ने कलेक्टर कोर्ट में अपील में बताया कि उनके दिवंगत बेटे राकेश कोरी की पत्नी रेनू कोरी ने मकान के कमरों और दुकान पर कब्जा कर रखा है। मकान पुराना और जर्जर होने के कारण जब उन्होंने मरम्मत कराने की कोशिश की, तो उसमें बाधा डाली गई। इससे उन्हें बुढ़ापे में मानसिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। एसडीएम ने बताया था पारिवारिक विवाद रूपलाल कोरी ने पहले एसडीएम अधारताल के समक्ष बेदखली का आवेदन दिया था। एसडीएम कोर्ट ने 15 मई 2026 को इसे संपत्ति और बंटवारे का पारिवारिक विवाद बताते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था और सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी थी। इस आदेश के खिलाफ बुजुर्ग ने हाईकोर्ट का रुख किया। वहां से समयबद्ध निराकरण के निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर कोर्ट में अपील दायर की गई। सुनवाई के दौरान रेनू कोरी ने तर्क दिया कि मकान का पुनर्निर्माण उनके दिवंगत पति की आय से हुआ था। पति की मृत्यु के बाद वह और उनका बेटा संपत्ति के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने खुद को विधवा और शारीरिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए कहा कि संपत्ति को लेकर सिविल कोर्ट में मामला लंबित है, इसलिए वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत बेदखली की कार्रवाई उचित नहीं है। सुनवाई के बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने एसडीएम अधारताल का पुराना आदेश निरस्त कर दिया। उन्होंने पाया कि बहू के पास वैकल्पिक आवास भी उपलब्ध है। आदेश में कहा गया कि बुजुर्गों को अपनी स्वअर्जित संपत्ति में शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने का वैधानिक अधिकार है। कलेक्टर ने रेनू कोरी को आदेश प्राप्त होने के एक महीने के भीतर परिवार और सामान सहित मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में अपीलकर्ता के सम्मान, सुरक्षा या संपत्ति को प्रभावित करने वाला कोई कृत्य नहीं किया जाएगा। तहसीलदार अधारताल और थाना प्रभारी गोहलपुर को आदेश का समय-सीमा में पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
