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महावीर जन्म कल्याणक विवाद- 15 दिन में क्षतिपूर्ति की मांग:लेटरहेड के दुरुपयोग और छवि धूमिल करने के आरोप; नोटिस में कहा- 7 दिन में माफी मांगे

इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के मौके पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम से जुड़े विवाद में 50 लाख रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा है। नोटिस में श्वेताम्बर जैन महासंघ न्यास के पदाधिकारियों पर अधिकारिक लेटरहेड के दुरुपयोग, मानहानिकारक टिप्पणियां प्रकाशित करने और सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह नोटिस नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अक्षय जैन की ओर से एडवोकेट राजेश जोशी के माध्यम से दिया है। 1 मई 2026 को भेजे गए नोटिस में कहा है कि महासंघ से जारी स्पष्टीकरण में अधिकारिक लेटरहेड का उपयोग कर निराधार और अपमानजनक टिप्पणियां प्रकाशित की गईं। नोटिस के अनुसार यह पत्र केवल आंतरिक उपयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में वितरित किया गया और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किया गया, जिससे संबंधित पक्ष की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा। नोटिस में उल्लेख किया है कि संबंधित व्यक्ति (अक्षय जैन) पिछले 40 वर्षों से व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनकी साख स्थापित रही है। वे अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंदौर रिटेल गारमेंट्स व्यापारी संघ सहित विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि जारी पत्र के माध्यम से उनकी चार दशक पुरानी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। ट्रैक्टर प्रकरण में इवेंट कंपनी ने मानी गलती विधिक नोटिस में कहा गया है कि महावीर जन्म कल्याणक के दिन नवकारसी आयोजन में ट्रैक्टर खड़े होने से उत्पन्न विवाद वाहन चालक की वजह से हुआ था। इस घटना को लेकर इवेंट कंपनी के संचालक ने लिखित में अपनी गलती स्वीकार करते हुए श्री नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के समक्ष माफी भी दी थी। इसके बावजूद 29 दिन बाद आरोपों का उल्लेख करते हुए पत्र जारी करना दुर्भावनापूर्ण और पूर्वनियोजित बताया गया है। संस्था के मंच से व्यक्तिगत आरोप लगाने का आरोप नोटिस में 29 अप्रैल को आयोजित बैठक के मिनट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संस्था के पद और मंच का उपयोग कर व्यक्तिगत आरोपों को संस्थागत स्वरूप दिया गया, जिससे न केवल संस्था की गरिमा प्रभावित हुई बल्कि एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ सामाजिक धारणा बनाने का प्रयास किया गया। नोटिस में कहा है कि यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 (मानहानि) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) के अंतर्गत दंडनीय है। साथ ही इसे दीवानी क्षति के दावे के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है। विधिक नोटिस में 15 दिनों के भीतर 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है, जो प्रतिष्ठा हानि, मानसिक पीड़ा और सामाजिक क्षति के प्रतिकर के रूप में मांगी गई है। इसके अलावा 25 हजार विधिक खर्च के रूप में भी मांगे गए हैं। साथ ही 7 दिनों के भीतर मिनट्स वापस लेने, अधिकारिक लेटरहेड पर बिना शर्त लिखित माफी जारी करने, सोशल मीडिया व व्हाट्सएप पर सार्वजनिक क्षमायाचना प्रकाशित करने और भविष्य में ऐसे कृत्यों से परहेज करने की मांग की गई है नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में मांगें पूरी नहीं की गईं, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाएगा और अलग से दीवानी वाद भी दायर किया जाएगा।

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