भोपाल के पिपलानी के होटल में युवक-युवती को पुलिसकर्मी बनकर धमकाने और करीब 70 हजार रुपए की वसूली के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, साजिश की नई परतें सामने आ रही हैं। पुलिस जांच में फर्जी ID के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। खास बात यह है कि कथित तौर पर फर्जी पहचान तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद ली गई और इसी पहचान के आधार पर होटल में कमरा बुक कराया गया। अब पुलिस होटल की CCTV फुटेज, बुकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि पूरी साजिश किसने और कैसे रची। पुलिस के मुताबिक, मामले में अब तक अबूजर, रघुवीर गोयल और करुणा शाही को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कथित मास्टरमाइंड यावर खान फरार है। जांच में यावर की भूमिका, होटल तक पहुंचने की योजना और आरोपियों के आपसी संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि होटल में युवक-युवती तक आरोपी किस तरह पहुंचे और फर्जी पहचान तैयार करने से लेकर वसूली तक की कड़ियां आपस में कैसे जुड़ी हैं। पहले फर्जी पहचान, फिर होटल में एंट्री पुलिस के मुताबिक, 3 अगस्त की शाम करीब 6 बजे बरखेड़ी खुर्द निवासी युवक पिपलानी इलाके के एक होटल में युवती के साथ कमरे में मौजूद था। इसी दौरान चार लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि सामान्य कपड़ों में आए इन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और युवक-युवती से पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद युवक को कार्रवाई और केस में फंसाने की धमकी दी गई। आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को मददगार बताते हुए मामला खत्म कराने की बात कही। डर का माहौल बनाकर युवक से रुपए की मांग की गई। पुलिस जांच के अनुसार, युवक के खाते से करीब 60 हजार रुपए ट्रांसफर करवाए गए। हालांकि रकम को लेकर पुलिस के सामने 60 से 70 हजार रुपए तक की जानकारी सामने आई है। घटना के करीब चार-पांच दिन बाद युवक ने पिपलानी थाने पहुंचकर शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंची। ChatGPT से तैयार कराई फर्जी ID जांच में सामने आए डिजिटल एंगल ने मामले को नया मोड़ दिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। फर्जी पहचान तैयार करने में ChatGPT के इस्तेमाल की जानकारी भी जांच में सामने आई है। यानी कथित साजिश सिर्फ होटल के कमरे तक पहुंचकर वसूली करने तक सीमित नहीं थी। आरोप है कि पहले पहचान छिपाने की तैयारी की गई, फिर उसी पहचान के आधार पर होटल में कमरा बुक कराया गया और इसके बाद युवक को निशाना बनाया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी ID किसने तैयार की, उसमें किस तरह की जानकारी इस्तेमाल की गई और उसे होटल में जमा कराने वाला कौन था। होटल में जमा दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा रहा है। होटल में ठहरे आरोपियों की ID भी संदिग्ध पुलिस की जांच में होटल में ठहरे आरोपियों की पहचान भी संदिग्ध मिली है। पुलिस होटल में जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है। होटल संचालक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगा रही है कि फर्जी ID के आधार पर कमरा कैसे बुक हुआ और होटल प्रबंधन ने दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर तक किया था। होटल में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश है कि आरोपी कब होटल पहुंचे, कौन किसके साथ आया और कमरे में जाने से पहले उनकी क्या गतिविधियां थीं। न वर्दी, न असली पहचान; फिर भी खुद को बताया पुलिस अफसर इस मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है। आरोपी पुलिस की वर्दी में नहीं थे। वे सामान्य कपड़ों में होटल पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर युवक-युवती से पूछताछ करने लगे। इसके बाद कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया गया। युवक को केस में फंसाने की धमकी देकर रुपए लेने का आरोप है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने पुलिसकर्मी होने का दावा किस आधार पर किया और क्या उन्हें पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ी कोई जानकारी पहले से थी। बैरसिया निवासी आरोपी रघुवीर गोयल की गिरफ्तारी के बाद इस पहलू की भी जांच की जा रही है। उसकी पत्नी पुलिस विभाग में हवलदार बताई गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पारिवारिक कनेक्शन का कहीं कथित साजिश में इस्तेमाल तो नहीं हुआ। आरोपी करुणा शाही स्टेशन से गिरफ्तार मामले की आरोपी करुणा शाही घटना के बाद भोपाल से बाहर चली गई थी। पुलिस के अनुसार, वह खाटूश्याम गई थी। बाद में पुलिस ने उसे स्टेशन से गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि होटल पहुंचने से पहले उसकी किन-किन आरोपियों से बातचीत हुई थी और घटना के बाद वह किन लोगों के संपर्क में रही। पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि युवक के साथ होटल में मौजूद युवती की भूमिका क्या थी। उसके आरोपियों से पहले से संपर्क होने या नहीं होने की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने उसकी भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है। पैसों के ट्रांजेक्शन से खुलेगा साजिश का राज जांच में पैसों का ट्रांजेक्शन भी अहम कड़ी बन गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवक से रकम किस खाते में ट्रांसफर कराई गई और उसके बाद वह पैसा कहां गया। मोबाइल फोन और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच से पुलिस को कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है। पुलिस यह भी देख रही है कि आरोपियों के बीच घटना से पहले हुई बातचीत, होटल बुकिंग और रुपए की मांग के बीच कोई सीधा कनेक्शन है या नहीं। अगर ऐसा कनेक्शन मिलता है तो इससे घटना के पहले से प्लान किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। नाबालिग से जुड़े मामले की भी जांच घटना की जांच के दौरान नाबालिग लड़की से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, युवक फारुख के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की अलग-अलग कड़ियों की जांच कर रही है। एक तरफ होटल में कथित फर्जी पुलिसकर्मी बनकर की गई वसूली है, वहीं दूसरी तरफ नाबालिग से जुड़े आरोपों की कानूनी जांच की जा रही है। CCTV से मोबाइल तक, हर रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस मामले में पुलिस की जांच अब कई स्तरों पर चल रही है। होटल का CCTV, बुकिंग रिकॉर्ड, जमा कराई गई ID, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। इन रिकॉर्ड के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवक और युवती तक आरोपी कैसे पहुंचे, होटल की बुकिंग किसने की, फर्जी ID तैयार करने की जिम्मेदारी किसकी थी, कमरे में पुलिस बनकर पहुंचने का फैसला किसने लिया और वसूली की रकम आखिर किसके पास पहुंची। तीन आरोपी गिरफ्तार, यावर खान की तलाश जारी पिपलानी पुलिस अब तक अबूजर, रघुवीर गोयल और करुणा शाही को गिरफ्तार कर चुकी है। तीनों से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ की गई और बाद में उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। वहीं यावर खान अभी फरार है। पुलिस उसे कथित मास्टरमाइंड मानकर उसकी तलाश कर रही है। उसके पकड़े जाने के बाद फर्जी ID तैयार करने, होटल की बुकिंग, कथित पुलिस बनकर पहुंचने और युवक से रुपए वसूलने की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इस मामले का सबसे अहम नया पहलू फर्जी ID और उसके लिए ChatGPT के कथित इस्तेमाल का है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह सिर्फ एक युवक को निशाना बनाने की योजना थी या आरोपियों ने इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी फंसाने की तैयारी कर रखी थी। डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के आपसी संपर्कों की जांच इसी सवाल का जवाब तलाशने में अहम साबित हो सकती है।
