मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। ऊर्जा मंत्री की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली
वैसे तो ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर किसी न किसी जगह झाड़ू उठाए, सफाई करते या लोगों के बीच नजर आ ही जाते हैं। कभी नाली में उतर जाते हैं, कभी अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं, कभी बिजली के पोल पर चढ़ जाते हैं, तो कभी घर-घर जाकर पूछते हैं कि सरकार अच्छा काम तो कर रही है न? लेकिन इस बार शिवपुरी के सिरसौद क्षेत्र में बिजली कटौती से परेशान लोगों ने मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने उनकी प्रतीकात्मक अर्थी बनाई, उसके पास बैठकर मातम मनाया, फिर अंतिम यात्रा निकाली और प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती की शिकायत उन्होंने कई बार बिजली कंपनी और खुद ऊर्जा मंत्री से भी की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। हालात नहीं बदले, इसलिए गुस्साए लोगों ने विरोध का यह अलग तरीका अपनाया। अब लोग तंज कस रहे हैं कि अगर मंत्री रील बनाने और प्रतीकात्मक आयोजनों से थोड़ा समय निकालकर बिजली व्यवस्था सुधारने पर भी उतना ही ध्यान देते, तो शायद विरोध की यह नौबत नहीं आती। हालांकि, लोकतंत्र में जनता जब नाराज होती है, तो उसका गुस्सा नेताओं को इसी तरह झेलना पड़ता है। महापौर ने निगम कमिश्नर को सुनाई खरी-खोटी
मुरैना में जरा सी बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ दी। कई इलाकों में सड़कों पर जलभराव हो गया। हालात का जायजा लेने निकलीं महापौर शारदा सोलंकी इस अव्यवस्था को देखकर नगर निगम कमिश्नर पर भड़क गईं। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। जबकि हर साल बरसात में जलभराव की यही समस्या सामने आती है। उनका कहना था कि समय रहते नालों की सफाई हो जाती, तो सड़कों पर पानी भरने की नौबत ही नहीं आती। इसी दौरान महापौर नगर निगम कमिश्नर को खरी-खरी सुना रही थीं, तभी कमिश्नर ने जवाब दिया- मैं अपने हिसाब से काम करूंगा। यह सुनते ही महापौर और नाराज हो गईं। उन्होंने कहा- अगर आपको अपने हिसाब से ही काम करना है, तो मुझे लिखकर दे दीजिए। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि बरसात से पहले न तो महापौर ने तैयारी सुनिश्चित कराई और न ही नगर निगम प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए। बारिश ने पोल खोली तो जिम्मेदारी तय करने के बजाय सड़क पर ही नोकझोंक शुरू हो गई। लेकिन ये पब्लिक है… ये सब देख भी रही है और समझ भी रही है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गाया दर्द भरा गाना
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे एक दर्द भरा गाना ‘जाने कहां गए वो दिन… कहते थे तेरी राह में… नजरों को हम बिछाएंगे…’ गाते नजर आ रहे हैं। वैसे तो विजयवर्गीय अपनी बेबाकी के साथ-साथ गायकी का शौक भी कई बार दिखा चुके हैं। लेकिन इस बार उन्होंने दर्द भरा गीत छेड़ा तो लोगों ने फिर अपने-अपने मतलब निकालने शुरू कर दिए। गाने के बोल को उनकी राजनीतिक स्थिति से जोड़कर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। बता दें कि कुछ दिन पहले ही एक कार्यक्रम में उन्होंने इंदौर नगर और ग्रामीण भाजपा जिलाध्यक्षों की ओर इशारा करते हुए कहा था कि इन दोनों का अच्छा समय चल रहा है। मैं इनके बीच में बैठा हूं, हो सकता है शायद मेरा भी अच्छा समय आ जाए। बस फिर क्या था… अब लोग उनके इस गाने को उसी बयान से जोड़कर राजनीतिक मायने तलाशने में जुट गए हैं। हालांकि, गाना गाना अलग बात है और उसके मायने निकालना अलग। लेकिन राजनीति में सुर से ज्यादा चर्चा अक्सर उसके इशारों की होती है। और अब अंदर की बात..
किसान आंदोलन के पीछे पूर्व मंत्री का खेला
मूंग खरीदी की मांग को लेकर किसानों ने दो दिन तक राजधानी में डेरा डाले रखा। हालांकि सरकार ने किसानों की मांगें मान ली। लेकिन अंदर की बात ये है कि किसानों को ये आंदोलन करने के लिए किसने कहा। सुना है कि पर्दे के पीछे से ये एक पूर्व मंत्री का खेला था। ये वही मंत्री हैं, जिन्होंने लंबे समय तक खेती-किसानी का विभाग संभाला था। ये उसी संभाग के एक जिले से आते हैं, जहां के किसानों ने राजधानी में आकर अपना दम दिखाया। इनपुट सहयोग – कपिल मिश्रा (शिवपुरी), दुष्यंत सिकरवार (मुरैना) ये भी पढ़ें –
मोदी को गालियां देने पर भड़के पं. प्रदीप मिश्रा: पटवारी की जीत की रट, भाजपा बोली-उन्हें हार दिख रही नीट पेपर लीक मामले में हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में पीएम मोदी को गालियां दिए जाने पर पंडित प्रदीप मिश्रा भड़क गए। उन्होंने कहा- जिस व्यक्ति ने सनातन धर्म को मजबूत किया, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को मजबूत किया और आज तुम उनकी माता और बहन को गोली दोगे, इसे कौन स्वीकार करेगा? पूरी खबर पढ़ें
