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भोपाल के नवाब हमीदुल्ला ने जिन्ना को लिखा खत:कहा- पाकिस्तान हमारी सहायता किस प्रकार करेगा; संधि, विलय या समझौते की शर्तें क्या होंगी

सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला लेकर आए हैं। हम आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराएंगे। पढ़िए आज की कहानी… मेरे प्रिय कायदे-आजम, मैं दिल्ली केवल आपसे मिलने और अपने तथा भोपाल राज्य के भविष्य के बारे में आपका मार्गदर्शन लेने आया हूं। आप इस समय भारत के सबसे व्यस्त व्यक्ति हैं, इसलिए मैं संक्षेप में केवल उन बातों का उल्लेख कर रहा हूं, जिन पर आने वाले दिनों में मुझे सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने हैं। पिछले आठ-दस वर्षों से मैं पाकिस्तान के उद्देश्य का निष्ठापूर्वक समर्थन करता रहा हूं। मैंने पूरी कोशिश की कि भारत की देशी रियासतें पाकिस्तान के गठन में बाधा न बनें। लगातार कई दिनों और रातों के अथक प्रयासों के बाद 29 मार्च को मैं इस दिशा में सफल हुआ और अधिकांश हिंदू रियासतों को संविधान सभा से दूर रखने में भूमिका निभाई। पाकिस्तान बनने के बाद मेरा वह कार्य समाप्त हो गया। अब मैंने अपने स्तर पर भोपाल सहित मुस्लिम रियासतों की स्वतंत्रता बनाए रखने का दायित्व लिया है, पर मुझे किसी भी हिंदू शासक का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने मुझ पर विश्वास नहीं किया। जिस एक मित्र से मुझे आशा थी, उन्होंने भी साथ छोड़ दिया। भोपाल, जिसकी लगभग 80% आबादी हिंदू है, भारत के बीचो-बीच स्थित है और चारों ओर मेरे विरोधी हैं। पाकिस्तान मेरी कोई प्रत्यक्ष सहायता नहीं कर सकता और मैं भी ऐसी कोई स्थिति नहीं बनने दूंगा, जिससे वह भारत के साथ संघर्ष में उलझे। इंग्लैंड पहले ही हमें निराश कर चुका है। भारत चाहे तो कोयला, पेट्रोल, मशीनरी, हथियार और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोककर हमें पूरी तरह दबाव में ला सकता है। वह स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट देने से भी इनकार करने की धमकी दे रहा है। मैं भयभीत नहीं हूं और अंत तक डटा रहूंगा, लेकिन हमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि पाकिस्तान हमारी सहायता किस प्रकार करेगा? यदि पाकिस्तान के साथ संधि, विलय या अन्य समझौता होता है तो उसकी शर्तें क्या होंगी और उन्हें कैसे लागू किया जाएगा? मैं किसी भी स्थिति में भारत में विलय (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार नहीं हूं। यदि ऐसा कभी करना भी पड़ा, तो वह केवल मेरे उत्तराधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए। मेरी व्यक्तिगत इच्छा सिंहासन छोड़कर इस्लाम और पाकिस्तान की सेवा करने की है। यदि मुझे पाकिस्तान की किसी भूमिका में सेवा करने का अवसर मिले, तो मैं उसे अपना सौभाग्य मानूूंगा। यदि आपको मेरी जरूरत नहीं है या मेरा पाकिस्तान आना आपके लिए असुविधाजनक हो, तो कृपया स्पष्ट रूप से बता दीजिए। यदि पाकिस्तान में मेरे लिए कोई स्थान नहीं है, तो मुझे भारत छोड़कर कहीं और रहने की तैयारी करनी होगी। आपका विश्वासी, हमीदुल्लाह खान (पत्र का विवरण ‘जिन्ना पेपर्स’ Vol. IV’ में दर्ज है, जिसे पाकिस्तान सरकार ने प्रकाशित किया था।) (कल पार्ट 5 में पढ़िए नई कहानी)

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