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भास्कर अपडेट्स:कोर्ट बोला- देर रात पुरुष से बात महिला के चरित्र पर संदेह का आधार नहीं

दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि महज इसलिए कि कोई महिला देर रात फोन पर किसी पुरुष से बात करती है, उसके चरित्र पर सवाल उठाने या उसकी निजता में दखल देने को उचित ठहराने का कारण नहीं हो सकता। इसके लिए उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को सुरक्षित रखने की भी जरूरत नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुनाली गुप्ता ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के सीडीआर को संरक्षित करने के लिए दायर अपील को खारिज करते हुए की। न्यायाधीश ने कहा, ‘किसी व्यक्ति से बात करने मात्र से महिला के चरित्र पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि यह आरोप न लगाया गया हो कि महिला का उक्त पुरुष के साथ कोई अवैध, संबंध है।’ आज की अन्य बड़ी खबरें… महाराष्ट्र में विपक्ष की बैठक, 23 विधायक गायब, पवार भी बैठक में नहीं पहुंचे
महाराष्ट्र के मानसून सत्र के बीच महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में बड़ी दरार सामने आई है। मुंबई में विपक्ष की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक से 23 विधायक गायब रहे। हैरानी की बात है कि एनसीपी (शरद) के सुप्रीमो शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल भी इस बैठक में नहीं पहुंचे। सांसदों की बगावत झेल रहे शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे का इस पर दर्द छलक पड़ा। उन्होंने सहयोगियों पर तंज कसते हुए पूछा, ‘क्या हम वाकई सच में एक साथ हैं?’ हालांकि, पवार गुट ने अनुपस्थिति की वजह निजी कारण बताई है, लेकिन इससे राज्य की सियासत गरमा गई है। इससे पहले उद्धव गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की सेना में शामिल हो चु​के हैं। डिजिटल अरेस्ट: 16 राज्यों के 80 ठिकानों पर सीबीआई छापे
सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम करने वाले नेटवर्क को तोड़ने के लिए 16 राज्यों में 80 जगहों पर तलाशी ली। अफसरों के मुताबिक ठगों ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट जैसी दिखने वाली यूआरएल वाली फर्जी साइट बनाकर सैकड़ों लोगों को फंसाया। ऑपरेशन चक्र के चौथे चरण के तहत 60 स्पेशल टीमें उतरीं। सीबीआई के अनुसार, साइबर ठगी का ये नेटवर्क साइबर फ्रॉड के 200 से ज्यादा मामलों से जुड़ा है। तलाशी के बाद सीबीआई ने चेन्नई से बी. नरेश और कोलकाता से संजीब साहा को गिरफ्तार किया है। इन पर 2 करोड़ रुपए के संदिग्ध अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने का शक है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में ठग खुद को पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों के अफसर या न्यायिक अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। किसी अपराध में फंसाने की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

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