मैं महेंद्र पाल चौहान, धार का निवासी हूं। बिजली कंपनी में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर मेरा चयन हो गया था, इसलिए मैंने पुलिस विभाग की नौकरी नहीं जॉइन की। मैं विभा यादव, खंडवा से हूं। मेरा चयन दूसरे विभाग में भी हुआ था, लेकिन बिजली कंपनी में नियुक्ति मिलने की उम्मीद में वह अवसर छोड़ दिया। मैं रणजीत सिंह, छिंदवाड़ा का रहने वाला हूं। स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर काम कर रहा था। बिजली कंपनी में चयन होने के बाद वहां की नौकरी छोड़ दी, लेकिन यहां भी नियुक्ति नहीं मिली। ये केवल तीन युवाओं की कहानी नहीं, बल्कि उन 350 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों की पीड़ा है, जो पिछले एक वर्ष से नियुक्ति के इंतजार में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बिजली कंपनी कह रही है कि उसके पास पद नहीं हैं। आखिर क्या है पूरा मामला और बिना पद के भर्ती कैसे निकाली गई? अगर पद खाली थे तो नियुक्ति क्यों नहीं दी जा रही? पढ़िए, रिपोर्ट… 350 से ज्यादा अभ्यर्थियों को नियुक्ति का इंतजार दरअसल, मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने वर्ष 2024 में वर्ग-3 के 818 पदों पर भर्ती निकाली। परीक्षा के बाद परिणाम घोषित हुआ, दस्तावेज सत्यापन भी पूरा हो गया। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद करीब 250 अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल गई, लेकिन 350 से अधिक चयनित अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अब न नई नौकरी मिल रही है और न ही पुरानी बची। सवाल उठता है कि यदि पद नहीं थे तो भर्ती निकाली ही क्यों गई? हाईकोर्ट के दखल के बाद 250 लोगों को मिली नौकरी मार्च 2025 में परीक्षा हुई और उसी साल 28 मई को पहला परिणाम घोषित किया गया। हालांकि, महज दो घंटे बाद परिणाम वेबसाइट से हटा लिया गया। विभाग ने इसकी कोई वजह नहीं बताई। दो दिन बाद 30 मई को संशोधित परिणाम जारी किया गया। इसके आधार पर 23 और 24 जून 2025 को चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन भी कर लिया गया। सामान्यतः दस्तावेज सत्यापन के बाद नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाती है, इसलिए अभ्यर्थियों को भरोसा था कि अब जॉइनिंग मिल जाएगी। इसी बीच उत्तर कुंजी में दो प्रश्नों को लेकर विवाद हुआ और मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। अदालत के निर्देश पर 5 जनवरी 2026 को संशोधित परिणाम जारी किया गया। इसके बाद करीब 250 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन 350 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को यह कहकर रोक दिया गया कि अब विभाग के पास रिक्त पद उपलब्ध नहीं हैं। सत्यापन पूरा, अधिकारी कह रहे पद समाप्त हो गए छिंदवाड़ा की रागिनी चौरे कहती हैं कि हजारों अभ्यर्थियों के बीच प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद उनका चयन हुआ। दस्तावेज सत्यापन भी पूरा हो गया, लेकिन अब अधिकारी कह रहे हैं कि पद समाप्त हो गए हैं। रागिनी पूछती हैं, “अगर पद ही नहीं थे तो भर्ती निकाली क्यों? मैंने अच्छी प्राइवेट जॉब छोड़ दी। अब न वहां लौट सकती हूं और न यहां नियुक्ति मिल रही है। आखिर हमारे भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?” नौकरी छोड़ी, अब बेरोजगार होकर भटक रहे सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इन अभ्यर्थियों में से कई लोग पहले कहीं न कहीं नौकरी कर रहे थे। किसी ने निजी कंपनी की नौकरी छोड़ी तो किसी ने सरकारी विभाग में मिला अवसर ठुकरा दिया। उन्हें विश्वास था कि बिजली कंपनी में स्थायी नियुक्ति मिल जाएगी। अब स्थिति यह है कि न उन्हें बिजली कंपनी में नियुक्ति मिल रही है और न पहले वाली नौकरी वापस मिल सकती है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस तरह का फैसला उनके कॅरियर और आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रहार है। एक साल से आंदोलन जारी, कोई नहीं सुन रहा चयनित अभ्यर्थी एक साल से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। पहले उन्होंने भोपाल में धरना दिया और अब इंदौर स्थित बिजली कंपनी के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थी कृष्णा बताते हैं कि वे गरीब परिवार से हैं। परिवार मजदूरी कर किसी तरह घर चलाता है। चयन होने पर पूरे परिवार को लगा था कि अब आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी, लेकिन आज भी नियुक्ति नहीं मिली। कृष्णा कहते हैं, “हमारे साथ परीक्षा देने वाले कई अभ्यर्थियों को जॉइनिंग मिल गई, लेकिन हमें सिर्फ यह कहकर रोक दिया गया कि पद नहीं हैं। अगर पद नहीं थे तो भर्ती प्रक्रिया शुरू ही क्यों की गई?” कंपनी का दावा- जल्द निकलेगा समाधान मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश चौहान का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान मामला हाईकोर्ट में चले जाने से नियुक्ति में देरी हुई। ये खबर भी पढ़ें… बेरोजगार थे, किन्नर बन गए, कमाई 60 हजार रुपए महीना जबलपुर में रेलवे सुरक्षा बल की कार्रवाई में सामने आया है कि कई किन्नर असल में युवक हैं, जो सिर्फ आसान कमाई और आर्थिक तंगी के कारण किन्नर का रूप धारण कर घूम रहे हैं। RPF ने 6 महीनों में करीब 120 से ज्यादा लोगों को पकड़ा, जिनमें से 60% युवक निकले। इनकी महीने की कमाई 60,000 तक हो जाती है। पढ़ें पूरी खबर…
