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बैल को बचाने में 3 मौतें…₹100 में गई जानें:बचकर निकला युवक गंभीर, बोला- कुएं में उतरते ही दम घुटने लगा; परिजन बोले- हमारा क्या होगा?

कुएं के अंदर दो लोग पहले ही बेहोश हो गए थे। उन्हें निकालने मैं और राहुल रस्सी के सहारे उतरे। जैसे ही पैर नीचे टिकाया, चक्कर आने लगे। दम घुटने लगा। मैं इतना ही बोल पाया- हमें जल्दी निकालो, नहीं तो मर जाएंगे। इसके बाद होश नहीं रहा कि क्या हुआ। यह कहना है सतना जिला अस्पताल में भर्ती रामचंद्र यादव का। वे 3 जुलाई की शाम मैहर के खरमसेड़ा गांव में दो लोगों को बचाने राहुल यादव के साथ कुएं में उतरे थे। करीब 30 फीट गहरे इस कुएं में बैल गिर गया था। उसे निकालने के लिए कुएं में उतरे कृष्णा यादव (28) और वीरेंद्र यादव (47) बेहोश हो गए थे। इसके बाद राहुल यादव (34) और रामचंद्र कुएं में उतरे, लेकिन उन्हें छोड़कर बाकी तीनों की दम घुटने से मौत हो गई। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर खरमसेड़ा गांव पहुंची। यहां मृतकों के परिजन से बात की। रामचंद्र से भी जाना कि आखिर घटना वाले दिन क्या हुआ था? पढ़िए, रिपोर्ट… बदहवास पत्नी बोली- चाय बन गई, वो आ रहे होंगे खरमसेड़ा गांव में झोपड़ी के सामने कुछ महिला बैठी हैं। उन्हीं के बीच नीली साड़ी में बदहवास पिंकी यादव को एक लड़की संभालने की कोशिश कर रही है। 23 साल की पिंकी, कृष्णा की पत्नी है, जो बैल को बचाने कुएं में उतरे थे। चेहरे पर पानी के छींटे मारने के बाद वो लड़की कहती है- जीजी, जीजी…क्या हुआ? पिंकी कांपते हुए उंगली भी नहीं उठा पा रही है। बुदबुदाते हुए कहती है, ‘वो आ रहे होंगे। उनके लिए चाय बन गई है। वो आ रहे होंगे।’ इतना कहते ही फिर बेसुध हो जाती है। पत्नी से कहा था फोन कर दूंगा, तू चाय बनाकर रखना पिंकी कुछ संभली तो बोली- वो शाम को काम से लौटकर आए थे। बच्चों के साथ खाना खाया। फिर बोले कि तू भी जल्दी से खाना खा ले। मैं खाना खाने बैठी। वो रोज की तरह बच्चों से बात करने लगे। कुछ दिन से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। मैं उनसे अमरपाटन जाकर डॉक्टर को दिखाने की जिद कर रही थी। मैंने कहा- आज डॉक्टर के पास चले जाओ। वे अमरपाटन के लिए निकल गए। जाते-जाते कहने लगे- गोल्डी की अम्मा, तू जबरन का टेंशन ले रही है। मुझे कुछ नहीं हुआ है। तेरी जिद के कारण जा रहा हूं। जब डॉक्टर के यहां से निकलूंगा, तो फोन कर दूंगा। तू चाय बनाकर रखना। इतना कहते ही पिंकी दोबारा बेसुध सी हो जाती है। फिर कहने लगती है- वो आ रहे होंगे। चाय बन रही है, गोल्डी देख तो तेरे पापा आ गए क्या, अब तक क्यों नहीं लौटे? अब क्या होगा मुझे गोल्डी की अम्मा कौन कहेगा? अम्मा-पिताजी का क्या होगा? कृष्णा यादव अपने पीछे एक बेटा, एक बेटी और बूढ़े मां-पिता को छोड़ गए हैं। तीनों आपस में रिश्तेदार, मजदूरी करते थे जिस कुएं में कृष्णा और उसके साथियों की मौत हुई, वह करीब 30 फीट गहरा और 40 साल पुराना है। लंबे समय से खुला पड़ा है। इसके मालिक रामनिवास कुशवाहा हैं। गांववालों ने कई बार इसे बंद करने के लिए या जाली लगाने को कहा, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। 3 जुलाई की शाम कुएं में बैल गिर गया। रामनिवास ने कहा कि बैल निकाल दो। जो खर्चा-पानी होगा, दे देंगे। तीनों युवक 100-200 रुपए के लिए कुएं में उतर गए। बारिश के दौरान कुएं में घुटनों तक कीचड़ समेत पानी है। पिछले 10 साल से इसका पानी इस्तेमाल करना बंद था। कृष्णा के भाई कृष्णपाल यादव ने बताया कि जान गंवाने वाले तीनों युवक आपस में रिश्तेदार थे। मजदूरी करके परिवार चला रहे थे। नगर परिषद और रामनिवास कुशवाहा की लापरवाही से तीनों की मौत हो गई। पिता बोले- बुढ़ापे की लाठी छिन गई राहुल के पिता मोतीलाल यादव कहते हैं- मैं खेत से दूध लेकर घर लौट रहा था। मुझे नहीं पता कि राहुल को बैल निकालने के लिए किसी ने बुलाया था या वह खुद गया था। मुझे पता चला तो कुएं की तरफ भागा। वहां पहुंचते ही लोगों ने मुझे पकड़ लिया। वो तो मेरे बुढ़ापे की लाठी था। बीच रास्ते में ही अकेला छोड़कर चला गया। बहुत गरीब लोग हैं हम। समाज के लोगों की मदद से अंतिम संस्कार किया है। उसके दो बेटे हैं, उनकी देखभाल और परवरिश कैसे होगी, कुछ समझ नहीं आ रहा। हादसे में जान गंवाने वाला तीसरा युवक वीरेंद्र यादव दूसरों का खेत अधिया (बंटाई) पर लेकर मजदूरी करता था। तीन बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी थी। तीनों ही युवक अपने-अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। रामचंद्र बोला- तलहटी पर पैर टिकाते ही दम घुटने लगा रामचंद्र यादव कहते हैं- उस दिन मैं घर से निकला ही था कि कुएं के पास हो-हल्ला देखा। वहां पहुंचा तो पता चला कि कृष्णा और वीरेंद्र बैल को निकालने कुएं में उतरे थे। करीब 20 मिनट हो गए, लेकिन वो ऊपर नहीं आए। इतना सुनते ही मैं और राहुल रस्सी के सहारे कुएं में उतर गए। जैसे-जैसे कुएं में उतरते गए, अजीब सी गंध आने लगी। तलहटी पर पैर टिकाते ही चक्कर के साथ दम घुटने लगा। मैं समझ गया कि यहां गैस है। जोर से चिल्लाया- ऊपर खींचो, मर जाऊंगा। इसके बाद मुझे होश नहीं कि मुझे किसने निकाला, कैसे ऊपर आया? जब होश में आया, तो खुद को अस्पताल में पाया। कुएं में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड की ज्यादा मात्रा मिली कलेक्टर विदिशा मुखर्जी के आदेश पर शनिवार दोपहर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम गांव में पहुंची। इसमें वरिष्ठ वैज्ञानिक जीके बैगा, डॉ. राज गुप्ता, एसडीएम आरती सिंह और टीआई विजय त्रिपाठी शामिल थे। बैगा ने बताया कि आधुनिक गैस डिटेक्टर मशीन के माध्यम से कुएं की जांच की है। कुएं में काफी मात्रा में गैसों का रिसाव पाया गया है। सबसे ज्यादा मीथेन गैस जमा थी, साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी अधिक थी। ऑक्सीजन पूरी तरह शून्य होने और इन गैसों के फेफड़ों में जाते ही ग्रामीण चंद सेकंड में अचेत हो गए। कुएं को मिट्‌टी डालकर समतल करेंगे, मालिक पर लेंगे एक्शन अमरपाटन एसडीएम आरती सिंह ने बताया कि कुएं को सील किया गया है। इसे मिट्टी डलवाकर समतल कराया जाएगा। मामले की जांच की जा रही है। वहीं, एसडीओपी ख्याति मिश्रा का कहना है कि कुआं मालिक पर भी एक्शन होगा। कुएं में बैल की भी मौत हो चुकी है। अन्य कोई जनहानि न हो, इसलिए बैल के शव को निकाले बिना ही उसे सील कराने के निर्देश दिए गए हैं। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… कुएं में गिरा बैल, बचाने उतरे 3 लोगों की मौत मैहर जिले में खरामसेड़ा गांव के कुएं में गिरे बैल को बाहर निकालने 4 ग्रामीण एक-एक कर कुएं में उतरे। भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण चारों बेहोश हो गए। ग्रामीणों ने सूझबूझ से बचाव अभियान चलाकर चारों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक तीन लोगों की मौत हो गई थी। पढ़ें पूरी खबर…

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