Homeदेशबृजभूषण भावुक होकर बोले-रेपिस्ट कहा, अच्छा होता गोली मार देते:लालच देकर जिन...

बृजभूषण भावुक होकर बोले-रेपिस्ट कहा, अच्छा होता गोली मार देते:लालच देकर जिन बच्चों से केस कराया, उन्होंने ही पोल खोली

‘जिस तरीके से मुझे रेपिस्ट कहा गया, इससे अच्छा होता कि सीधे गोली मार देते। तब उतना कष्ट नहीं होता।’ ये कहते हुए भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण भावुक हो जाते हैं। 3 अगस्त को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण केस में उन्हें निर्दोष करार दिया। ‘दैनिक भास्कर’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में बृजभूषण सिंह ने भविष्य की सियासी रणनीति, महिला पहलवानों के आरोपों और कोर्ट में गवाही पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा- ऐसे आरोपों से लड़ना मुश्किल होता है, मैं टूट गया था। जिन बच्चों को लालच देकर केस के लिए तैयार किया। उन्होंने ही बाद में पोल खोल दी। पढ़िए बृजभूषण सिंह की पूरी बातचीत… कोर्ट में दो महिला पहलवान आरोपों से पलट गईं, क्या ये मददगार साबित हुआ? बृजभूषण: हां, इससे बहुत मदद मिली, क्योंकि वह स्वयं पीड़िता थीं। जितने भी पीड़ित थे, ये अलग-अलग जगह के रहने वाले हैं। लेकिन सबका एड्रेस कहीं न कहीं एक ही जगह से जुड़ता है। सबका एड्रेस बजरंग पूनिया का आवास, सोनीपत था। जज ने भी पूछा कि सबका एड्रेस सोनीपत क्यों है? एक फ्लैट में कितने लोग रहते हैं? इनके पास कोई जवाब नहीं था। दरअसल, बजरंग पूनिया के आवास पर वकील बैठते थे, जज बैठते थे। उनको ट्रेनिंग कराई जाती थी, उनके बयान दिलाए जाते थे। ये सारी बातें उन्हीं पीड़िताओं में से दो खिलाड़ियों ने जज साहब और कोर्ट के सामने रख दीं। आपको रेपिस्ट कहा गया, नेताओं ने भी नाम लेकर निशाना साधा? बृजभूषण: देखिए, यह जो आरोप मेरे ऊपर लगा है ना… (भावुक हो जाते हैं)। अभी करण भूषण (बृजभूषण के बेटे) का बयान आया, आपने देखा होगा। वो कैसे टूट गए थे। हम भी टूटे थे, लेकिन अब जो चीजें सामने आ गईं, उससे तो लड़ना था। मैं लड़ा और आज बेदाग निकलकर आया हूं। लेकिन जिस तरीके से मुझे रेपिस्ट बताया जाता था, वह कष्टकारी था। एक बड़बोला सांसद (चंद्रशेखर आजाद) कहता था कि मैं विश्नोहरपुर (बृजभूषण का गांव) से खींचकर ले जाऊंगा। संयोग से खाप पंचायत (हरियाणा) ने ऑर्डर नहीं दिया, नहीं तो बेचारा खींच ले जाता मुझको। इतने बड़े-बड़े बड़बोले आ गए थे। अब कोई उनसे पूछे कि खींचकर ले आओगे कि नहीं लाओगे। कोर्ट से बरी हुए तो गोंडा में ‘दबदबा है’ पोस्टर लगाए गए, क्या यह सही है? बृजभूषण: दबदबा नहीं है…। गोरखपुर में मेरी पढ़ाई-लिखाई हुई। अयोध्या आया तो छात्र संघ की राजनीति की। 55 साल से मैंने कभी जनता और उनकी समस्या से मुंह नहीं मोड़ा। उसी का परिणाम था कि दो दिन में पूरे प्रदेश से लोग मुझसे मिलने आए। यह दबदबा नहीं है। यह मेरा प्रभाव है। क्या आपकी इच्छा फिर संसद में जाने की है? बृजभूषण: मैं राजनीति में जो क्लेम करता हूं, उसके पीछे मेरा एक भाव है। मैं हटाया गया, षड्यंत्र करके हटाया गया। इसलिए मेरे मन में इच्छा है कि जिस सदन से मैं एक तरह से बेइज्जत होकर आया, उस सदन में एक बार साफ-सुथरा होकर जाऊं। यह मेरी इच्छा है। अब बाकी पार्टी की इच्छा जो करेगी, वह करेगी। जब आरोप लगे, कैसरगंज से सांसद थे। क्या फिर वहीं से चुनाव लड़ेंगे? बृजभूषण: राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। चुनाव लड़ना होगा तो पार्टी तय करेगी। हमारी इच्छा तो है, एक बार….। महादेव एकेडमी क्या है, आरोपों के पीछे किसे जिम्मेदार मानते हैं? बृजभूषण: एकेडमी के कर्ता-धर्ता, जन्मदाता और सहयोगी भूपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा हैं। कोई बच्चा तैयार नहीं हो रहा था, तो एक-एक बच्चे के गार्जियन को बुलाकर लालच दिया गया। किसी को डिप्टी एसपी बनाने का वादा किया गया, किसी को इंस्पेक्टर बनाने का वादा किया गया। उन्हें पैसा भी दिया गया। बाद में बच्चों को समझ आया कि उनके साथ मजाक हो रहा है और फिर इन्हीं बच्चों में से कुछ ने इनकी पोल खोल दी। हरियाणा में 50 अखाड़े हैं, लेकिन किसी दूसरे अखाड़े का कोई बच्चा नहीं आया। एक फैमिली और एक अखाड़ा। केस में 44 लोग थे, कुछ आए और कुछ पीछे हट गए? बृजभूषण: फिर भी 32 गवाह आए। करीब 127 दिन तारीखें पड़ीं। मैंने किसी भी तारीख पर एप्लिकेशन नहीं दी कि मैं नहीं आ सकता। लगभग हर तारीख पर मौजूद रहा, एक-दो तारीख पर वीडियो कॉलिंग के जरिए मौजूद रहा। हमने या हमारे वकील ने एक भी मौका नहीं लिया। छह-छह महीने का मौका इन्होंने लिया। मुख्य षड्यंत्रकारियों ने तारीखें लीं। कम से कम तीन-चार नोटिस के बाद भी ये आए और फिर बहाना बनाकर कहा कि दो महीने नहीं आ सकता। कोर्ट ने बड़े धैर्य से इनका केस सुना। क्योंकि ये चाहते थे कि केस बहुत लंबा चले। इन्हें सच्चाई मालूम थी कि यह केस कोर्ट में टिकेगा नहीं, इसलिए इसे लंबा खींचना चाहते थे। आरोप आप पर लगे, बदनामी खेल जगत की हुई? बृजभूषण: आरोप भले मेरे ऊपर था, लेकिन यह आरोप खेल जगत पर भी था। घटना इंडिया की बताई गई, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया में था। हर महिला पहलवान के माता-पिता, चाहे वे किसी भी देश के हों, भयभीत हो गए थे। क्योंकि ओलंपिक मेडल विजेता खुद को पीड़िता बता रही थीं। वर्ल्ड चैंपियन और दुनिया में नंबर-1 रही महिला खुद को पीड़िता बता रही थी। इससे पूरी दुनिया में महिला खिलाड़ियों और उनके परिवारों का माहौल तनावपूर्ण था। जजमेंट आने के बाद सारी चीजें साफ हो गईं। मैं पहले दिन से अपनी बात पर कायम था और आज वही बात सच साबित हुई। ———————————- ये खबर भी पढ़ेंः- पवन सिंह के सामने युवक को मंच से फेंका, VIDEO:मां की तस्वीर लाया था; बस्ती में पावरस्टार ने दोबारा बुलाया, फोटो खिंचवाई

यूपी के बस्ती में रविवार रात कांवड़ महोत्सव में भोजपुरी सिंगर और स्टार पवन सिंह की एक झलक पाने के लिए भीड़ बेकाबू हो गई। तमाम लोग बैरिकेड पार कर गए। सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा संभाला और भीड़ को शांत किया। इसी दौरान एक युवक मंच पर चढ़ गया। सुरक्षाकर्मियों ने उसे उठाकर मंच से नीचे फेंक दिया। यह देख पवन सिंह खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने युवक को अपने पास बुलाया और फोटो भी खिंचवाई। युवक के हाथ में पवन सिंह और उनकी मां की तस्वीर थी। युवक ने पवन सिंह को तस्वीर गिफ्ट की। पढ़ें पूरी खबर…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here