मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक और अन्य बांध परियोजनाओं से प्रभावित लोगों का आंदोलन फिर तेज हो गया है। बुनियादी मांगों को लेकर वे 3 जुलाई से कूपी गांव में धरने पर बैठे हैं। विस्थापितों के नेता अमित भटनागर 6 जुलाई से आमरण अनशन पर हैं। आंदोलनकारियों का नारा है-“न्याय दो या मार दो”। छतरपुर जिला प्रशासन का कहना है कि धरने में शामिल अधिकांश लोग पन्ना जिले की परियोजनाओं से प्रभावित हैं, इसलिए यह दूसरे जिले का विषय है और वे सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकते। विस्थापितों की प्रमुख मांगें क्या हैं और अब तक उन्हें क्या मिला? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… बैराना नदी का किनारा बना आंदोलन का केंद्र छतरपुर मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर कूपी गांव की सीमा से गुजरने वाली बैराना नदी का किनारा आंदोलन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। उफनती नदी में लकड़ी की प्रतीकात्मक चिताओं पर दो आंदोलनकारी लेटे हैं। पास ही घुटनों तक पानी में खड़ी महिलाएं चेहरों और हाथों पर मिट्टी मलकर मौन प्रदर्शन कर रही हैं। यहां करीब 400 लोग मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और उनके साथ आए बच्चों की है। लगातार बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रदर्शन जारी है। आंदोलन स्थल से लगभग 50 मीटर दूर नए पुल का निर्माण चल रहा है, जिसके नीचे विस्थापितों ने रहने और भोजन बनाने की अस्थायी व्यवस्था की है। 3 जुलाई से शुरू हुआ ‘चिता आंदोलन’ तेज हो गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर आमरण अनशन पर हैं, जबकि उनके समर्थन में गांव की महिलाएं भी क्रमिक अनशन पर बैठ गई हैं। 5 परियोजनाओं के विस्थापितों की 5 कहानियां पटपुर गांव की बुजुर्ग ज्ञान रानी, जो क्रमिक अनशन पर बैठी हैं, कहती हैं, ‘कुछ समय पहले मेरे बेटे की मौत हो गई। उसका नाम मुआवजा सूची में था। इसके बाद पोते की भी मौत हो गई। सरकार ने हमारा घर बुलडोजर से गिरा दिया, लेकिन मेरी बहू को उसके पति के हिस्से का मुआवजा नहीं दिया जा रहा।’ उसका कानूनी हक भी छीन लिया गया और सिर से छत भी। अब वह दर-दर भटक रही है। जब तक हमें हमारा हक नहीं मिलेगा, हम धरना नहीं छोड़ेंगे। रुन्झ बांध परियोजना से प्रभावित राम अवतार का आरोप है, ‘अधिकारों की बात करने पर प्रशासन झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाता है। हमारे क्षेत्र में ग्राम सभा और पूर्व सूचना के बिना बांध का काम शुरू कर दिया गया। जानकारी मांगने पर पुलिस भेज दी जाती है।’ मुझ सहित कई ग्रामीणों पर फर्जी केस दर्ज हुए हैं। हमारी मांग है कि पूरी जानकारी दी जाए और सभी फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं। प्रेमलाल कुशवाहा का कहना है, ‘जमीन अधिग्रहण के समय 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा और अन्य सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला। इसी वजह से हम अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचाने के लिए इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।’ मझगवां मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित बिट्टी बाई कहती हैं, ‘हमें आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला। अधिकारी कहते हैं कि हमारा गांव डूब क्षेत्र में नहीं है, लेकिन हमारी जमीनों का सर्वे भी हुआ और अब हमें गांव छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। हमारी मांग है कि या तो उचित मुआवजा दिया जाए या गांव को आधिकारिक रूप से डूब क्षेत्र से बाहर घोषित किया जाए।’ नेगुवां लघु सिंचाई परियोजना से प्रभावित रविंद्र सिंह का आरोप है, दो साल बाद भी करीब 60% किसानों को मुआवजा नहीं मिला। जिनके अवार्ड बन चुके हैं, उन्हें भी भुगतान का इंतजार है। मुआवजे की दरों में भारी भेदभाव है। बाहरी लोगों को 54 लाख रुपये प्रति एकड़ तक मुआवजा दिया जा रहा है। स्थानीय किसानों को केवल 3.68 लाख रुपये प्रति एकड़ मिल रहे हैं। जिन लोगों को भुगतान हुआ, उन्हें भी नियमानुसार ब्याज नहीं मिला। हमारी मांग है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और सभी प्रभावितों को उनका अधिकार मिले। विकास की कीमत आदिवासी और किसान चुका रहे हैं: अमित भटनागर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर का आरोप है, “विकास परियोजनाओं की सबसे बड़ी कीमत गरीब आदिवासी और किसान चुका रहे हैं। उनके घर, जमीन और आजीविका प्रभावित हो रही है, जबकि जंगल और पर्यावरण को हुए नुकसान की भी भरपाई नहीं होती। मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा। जब न्याय नहीं मिलता और पीड़ितों को ही प्रताड़ित किया जाता है, तो आंदोलन ही आखिरी विकल्प बचता है। प्रशासन का पक्ष: धरने में शामिल लोग पन्ना जिले की परियोजनाओं से प्रभावित छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि धरने में शामिल लोग मूल रूप से पन्ना जिले की रुन्झ और मझगवां परियोजनाओं से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, इन मामलों का निराकरण पन्ना जिला प्रशासन करेगा और धरना स्थल पर केन-बेतवा परियोजना का कोई प्रभावित मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि पन्ना प्रशासन आंदोलनकारियों से चर्चा कर चुका है। साथ ही, रुन्झ और मझगवां परियोजनाओं के प्रभावितों के लिए अतिरिक्त पुनर्वास पैकेज 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.5 लाख रुपये किया गया है। ये खबर भी पढ़ें… केन-बेतवा के विस्थापित बोले-हक दो या जल समाधि दे दो पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से विस्थापित आदिवासी और किसान जल सत्याग्रह पर डटे हैं। उफनती नदी के बीच पानी में खड़े प्रदर्शनकारी उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
