बीना और खुरई ब्लॉक की तीन सीसी सड़कों पर कई स्थानों पर दो से चार इंच तक के गहरे गैप और दरारें बन गई हैं। इन दरारों में वाहनों के पहिए फंसने से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। इस गंभीर समस्या को लेकर किसान नेताओं ने आंदोलन की चेतावनी दी है। सड़कों के बीच बने ये गैप इतने चौड़े हैं कि इनमें मोटरसाइकिल के पहिए आसानी से फंस जाते हैं। इसके कारण बाइक सवार आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। कई जगहों पर तो सड़क पूरी तरह से फट गई है, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो गई है। ऐसी ही एक सड़क बीना के कंजिया से खिमलासा तक 37 किलोमीटर लंबी है। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPRDC) ने 78 लाख की लागत से इस सीसी सड़क का निर्माण कार्य एक कंपनी को सौंपा था। हालांकि, कंपनी ने यह कार्य एक पेटी ठेकेदार को दिया, जिसने निर्माण में लापरवाही बरती। खिमलासा से कुछ ही दूरी पर सड़क के बीच कई इंच गहरी और चौड़ी दरारें स्पष्ट देखी जा सकती हैं। इन दरारों में पहिए फंसने से वाहन चालक, विशेषकर ओवरटेक करते समय या रात के अंधेरे में यात्रा करते समय, गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। घटिया निर्माण का खामियाजा अब वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। उत्तरप्रदेश को जोड़ती है यह सड़क खिमलासा से कंजिया होते हुए यह सड़क उत्तरप्रदेश को जोड़ती है। यहां से रोजाना करीब 4 हजार से ज्यादा वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। इसमें भारी वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। इसी के साथ यहां से बड़ी संख्या में बाइक सवार भी निकलते हैं। यह सड़क अशोकनगर जिले को भी जोड़ती है। जब इस सड़क पर भारी वाहन को बाइक सवार ओवरटेक करते है या रात के समय सामने के वाहनों की लाईट की चकाचौंध की वजह से बाइक सवार के पहिए इन दरारों में फंस जाते है और वह दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। हादसों में हो चुकी मौंतें किसान नेता इंदर सिंह ने कहा कि हाल ही में भगवान सिंह यादव (54) निवासी उमरिया की करोंदा रेलवे गेट के पास सड़क की दरार में बाइक का आगे का पहिया फंस जाने से सिर में आई चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। इस तरह अब तक करीब 5 से ज्यादा लोगों की मौत सड़क की दरारों की वजह से हुई है। यदि प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता है तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे। दूसरी सड़क- खुरई से रजवांस, दूरी 32 किमी करोड़ों रुपए की लागत से विकास के काम तो होते हैं, लेकिन विभागीय अफसरों की अनदेखी के चलते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर नहीं रखी जाती। सड़क के काम की मॉनिटरिंग, मैंटेनेंस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके चलते बाइक सवार दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। ऐसे ही एमपीआरडीसी की बनाई गई खुरई से रजवांस करीब 32 किलोमीटर लंबाई वाली सीमेंट सड़क काफी जगह-जगह से दो पाटों में बंटती चली जा रही है। यह दो पाटों के बीच में सड़क का जोड़ दो पहिया वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी व दुर्घटना का कारण लगातार बनता चला जा रहा है। जिसके कारण उक्त सड़क मार्ग की जो बड़ी-बड़ी दरारें और सड़क के जोड़ के कारण दो पहिया वाहन चालक आए दिन अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार बनते चले जा रहे हैं। उजनेट गांव के प्रहलाद ने बताया कि कुछ माह पहले इस सड़क के बीच में बने गैप में उनके पिता की बाइक फंस गई थी जिसकी वजह से बाइक सवार माता-पिता दोनों घायल हो गए थे। तीसरी सड़क- भरछा तिराहा से पीरघाट, दूरी 7 किमी खिमलासा- कंजिया की मुख्य सड़क पर स्थित भरछा तिराहा से पीर घाट तक करीब 7 किमी तक एमपीआरडीसी ने सीसी सड़क बनाई है। यह सड़क उत्तर प्रदेश को जोड़ती है। इस सड़क में जगह-जगह बड़े-बड़े गैप आ गए हैं। सड़क के बीच यह गैप ऐसे हैं, जिसमें मोटर साईकिल का पहिया फंस जाए, लगातार बढ़ रहे इस गैप से अब दोपहिया वाहन चालकों के हादसाग्रस्त होने का भी खतरा बढ़ गया है। सड़क की दरार में फंसने से हो रहे कई हादसे ग्रामीण लालसिंह प्रजापति ने बताया कि इन सीसी सड़कों में जगह-जगह दरारें होने से आए दिन बाइक सवार सबसे ज्यादा दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। वीरसिंह लोधी, जितेंद्र भार्गव ने बताया कि दो पहिया वाहन चालक की गाड़ी का पहिया ओवरटेक करते हुए सड़क की दरारों में आ जाता है, जिससे वाहन चालक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। राघवेंद्र प्रजापति, धर्मेंद्र घोषी, गोविंद रघुवंशी ने बताया कि इन सड़कों पर दरारें होने से आए दिन बाइक सवार हादसे का शिकार हो रहे हैं। इन सड़कों पर सप्ताह में छोटी-बड़ी करीब पांच दुर्घटनाएं दरारों की वजह से हो रही हैं।
