हनुमान मंदिर के पुजारी गोविंद तिवारी शनिवार सुबह बेटे राहुल के लिए लड़की देखने खुजनेर जा रहे थे। घर से निकलते समय पत्नी सुशीला से कहा था- “अगर रिश्ता तय हुआ तो शाम होने से पहले अच्छी खबर दूंगा।” लेकिन घर अच्छी खबर नहीं, उनकी मौत की सूचना पहुंची। रास्ते में कार तालाब में गिर गई। हादसे में गोविंद तिवारी समेत पांच दोस्तों की मौत हो गई। गांव में अब हर जुबान पर यही बात है कि जो दोस्त जिंदगीभर हर सुख-दुख में साथ रहे, वे मौत में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ सके। 25 जुलाई को राजगढ़ जिले के खुजनेर थाना क्षेत्र में भीलखेड़ी जोड़ के पास कार डैम में गिर गई थी। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। सभी शुजालपुर के अरनियाखुर्द और अरंडिया गांव के रहने वाले थे। 3 किमी दूरी पर बसे दो गांव अरंडिया व अरनिया खुर्द में एक ही दिन सूर्यास्त के बाद 5 अर्थियां उठी। रास्ते में नाश्ता किया, होटल वाले ने दी थी सलाह गोविंद तिवारी अपने चचेरे भाई कमल तिवारी, शंकर नाथ, अरंडिया गांव के अरविंद वर्मा और रोहित वर्मा के साथ सुबह करीब 10 बजे रवाना हुए। रास्ते में अरनियाखुर्द की एक होटल पर पांचों ने नाश्ता किया। होटल संचालक लखन मेवाड़ा बताते हैं, “मैंने मजाक में कहा था कि अगर दूर जा रहे हो तो ड्राइवर साथ ले जाओ, लेकिन रोहित ने मना कर दिया। करीब दो घंटे बाद पांच लोगों की मौत की खबर आ गई।” इतना कहते-कहते उनकी आंखें भर आती हैं। बेटे का रिश्ता देखने निकले थे पुजारी गोविंद तिवारी हनुमान मंदिर के पुजारी थे। परिजनों के मुताबिक शनिवार सुबह मंदिर में पूजा-पाठ के बाद वे जल्दी घर लौट आए थे। पत्नी से कहा कि अगर रिश्ता तय हुआ तो खुजनेर के पास स्थित खाटूश्याम मंदिर में दर्शन करेंगे और फिर घर लौट आएंगे। परिवार पूरे दिन उनके फोन का इंतजार करता रहा, लेकिन दोपहर में रिश्ते की खबर नहीं, हादसे की सूचना पहुंची। एक गांव में पसरा सन्नाटा, साथ उठीं पांच अर्थियां हादसे के बाद दैनिक भास्कर की टीम शुजालपुर से 26 किलोमीटर दूर अरनियाखुर्द गांव पहुंची। गांव में सन्नाटा पसरा था। मृतकों के घरों के बाहर लोग दालान में बैठे थे। हर कोई एक ही बात कह रहा था कि पांचों दोस्त हर सुख-दुख में साथ रहे और आखिरी सफर भी साथ ही तय किया। पोस्टमार्टम के बाद पांचों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक ही गांव में एक साथ पांच अर्थियां उठीं तो पूरे गांव की आंखें नम थीं। चचेरे भाई थे, लेकिन रिश्ता सगे भाइयों से बढ़कर हादसे में गोविंद तिवारी के चचेरे भाई कमल तिवारी की भी मौत हुई। कमल राम मंदिर के पूर्व पुजारी होने के साथ खेती भी करते थे। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। शंकर नाथ अविवाहित थे और पशु श्रृंगार सामग्री बेचते थे। परिवार के छगनलाल तिवारी कहते हैं, “गोविंद और कमल चचेरे भाई जरूर थे, लेकिन रिश्ता सगे भाइयों से भी बढ़कर था। शंकर नाथ भी हर छोटे-बड़े काम में साथ रहते थे। तीनों जिंदगीभर साथ रहे और हमें छोड़कर भी साथ ही चले गए। अलग-अलग चिताएं थीं, लेकिन अग्नि एक साथ दी गई।” अरविंद के परिवार पर दूसरी बार टूटा दुख अरंडिया गांव के अरविंद वर्मा विवाहित थे। उनके दो बेटे हैं। परिवार पर पहले भी दुख टूट चुका था। कुछ साल पहले उनके छोटे भाई की पेड़ से गिरने से मौत हो गई थी। अब सड़क हादसे में अरविंद की भी जान चली गई। परिवार दूसरी बार इस तरह के सदमे से गुजर रहा है। रोहित की आखिरी पोस्ट अब गांव को रुला रही रोहित वर्मा पान की दुकान चलाते थे। वे पार्ट टाइम बस कंडक्टर का भी काम करते थे। पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में उनकी मां ही हैं, जिनका अब वही अकेला सहारा थे। उन्हें सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौक था। रोहित के रिश्तेदार कृपाल वर्मा बताते हैं कि बड़ी मन्नतों के बाद उनका जन्म हुआ था। वे सुबह से शाम तक काम में लगे रहते थे। पान की दुकान संभालने के साथ बसों में भी काम करते थे। हादसे से पहले रोहित ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। उसमें यह शेर सुनाई देता है— “जानता नहीं मैं वो फूल हूं, जो एक बार टूट गया तो फिर खिलेगा नहीं…
अगर परखोगे तो बहुत बुरा हूं मैं, समझोगे मेरे जैसा मिलेगा नहीं… दोस्त बोले- उस दिन एक बार भी मुलाकात नहीं हुई रोहित के दोस्त दीपक वर्मा कहते हैं, “हमारा गांव छोटा है। दिन में चार-पांच बार मुलाकात हो जाती थी, लेकिन उस दिन न जाने ऐसा क्या हुआ कि उससे एक बार भी मुलाकात नहीं हो पाई। दोपहर में उसकी मौत की खबर आ गई।” अरंडिया गांव में अरविंद वर्मा और रोहित वर्मा का अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया। पूरे गांव में अब भी मातम पसरा है। हर किसी की जुबान पर बस यही बात है कि पांच दोस्त एक साथ निकले थे और आखिरी सफर भी साथ ही पूरा कर गए। ——————–
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