भोपाल से गोरखपुर जाने वाली बस का सामान्य किराया 1,700 से 1,800 रुपए है। अब इसके लिए 3 हजार रुपए से ज्यादा देने पड़ रहे हैं। जाना जरूरी था, इसलिए दोस्तों से उधार लेकर टिकट खरीदा। बिहार के रहने वाले प्रिंस भोपाल के एक निजी कॉलेज में पढ़ते हैं। उन्होंने अपने दोस्त पवन के साथ बिहार जाने के लिए ट्रेन का टिकट बुक कराया था, लेकिन टिकट कन्फर्म नहीं हुआ। दोनों ने बस से गोरखपुर और फिर वहां से बिहार जाने का प्लान बनाया। बुकिंग ऐप पर किराया देखा तो सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा था। प्रिंस को दोस्तों से उधार लेकर टिकट खरीदना पड़ा। यह समस्या सिर्फ प्रिंस और पवन की नहीं है। दीवाली के दौरान मध्य प्रदेश के कई प्रमुख रूटों पर बसों के टिकट महंगे हो गए हैं। कुछ रूटों पर बस का किराया फ्लाइट के टिकट से भी ज्यादा है। सरकार ने 5 अगस्त से बसों की संशोधित किराया दरें लागू की थीं। नियमों के मुताबिक, निर्धारित दर से ज्यादा किराया नहीं वसूला जा सकता। इसके बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। परिवहन विभाग का कहना है कि ज्यादा किराया वसूलने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कुछ रूट पर फ्लाइट से महंगा बस का टिकट ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर मध्य प्रदेश से चलने वाली लंबी दूरी की बसों के टिकट महंगे दिखाई दे रहे हैं। भोपाल-अहमदाबाद रूट पर फ्लाइट का टिकट ₹5,500 से ₹6,500 के बीच दिख रहा है, जबकि बीआर ट्रैवल्स की लग्जरी बस का किराया ₹7,000 है।यानी, बस का टिकट फ्लाइट से करीब 8 से 27% महंगा है। इसी तरह भोपाल-रीवा रूट पर फ्लाइट का टिकट करीब ₹3,700 और स्लीपर बस का किराया ₹5,000 तक है। इस रूट पर बस का टिकट फ्लाइट से करीब 35% महंगा है। भोपाल-ग्वालियर रूट पर जय भवानी ट्रैवल्स की बस का टिकट ₹10,000 तक दिख रहा है। चार लोगों के आने-जाने का खर्च ₹20 हजार से ₹28 हजार तक चार लोगों के परिवार को दीवाली पर घर जाने के लिए एक तरफ का बस किराया ₹10,000 से ₹14,000 तक पड़ रहा है। आने-जाने का खर्च ₹20,000 से ₹28,000 तक पहुंच सकता है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों के लिए चलने वाली एसी स्लीपर और लग्जरी बसों में कम कीमत वाली सीटें पहले ही बुक हो चुकी हैं। अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महंगी सीटें ही उपलब्ध दिखाई दे रही हैं। सरकार ने तय की किराया दरें, फिर भी ज्यादा कीमत पर टिकट सरकार ने 5 अगस्त 2026 से बस किराए की संशोधित दरें लागू की थीं। साधारण बस का किराया ₹1.25 से बढ़ाकर ₹2 प्रति यात्री प्रति किमी और न्यूनतम किराया ₹7 से बढ़ाकर ₹10 किया गया। नई दरों के मुताबिक, 100 किमी की यात्रा के लिए साधारण बस का किराया ₹200, स्लीपर का ₹280 और सुपर लग्जरी एसी बस का ₹350 होगा। डीजल, रखरखाव और परिचालन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने किराया बढ़ाने की मांग की थी। एसोसिएशन ने 7 अगस्त से हड़ताल की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद सरकार ने संशोधित दरों का गजट नोटिफिकेशन जारी किया। नए किराया नियमों में यात्रियों के लिए 4 प्रावधान सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के तहत भी ₹2 प्रति किमी की दर तय की थी। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड में निगरानी का दावा किया गया था। इसके बावजूद ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर कई रूटों के किराए तय दरों से काफी ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। बस संचालकों की दलील: त्योहार के बाद खाली लौटती हैं बसें बस संचालकों का कहना है कि दीवाली पर बसों की मांग बढ़ जाती है। डीजल, टोल टैक्स, कर्मचारियों के वेतन और रखरखाव का खर्च भी बढ़ा है। संचालकों का तर्क है कि त्योहार के बाद बसें अक्सर खाली लौटती हैं। पीक सीजन में वे अतिरिक्त कमाई से बाकी दिनों का नुकसान पूरा करते हैं। उनका यह भी दावा है कि लंबी दूरी की ज्यादातर बसें टूरिस्ट परमिट पर चलती हैं और उन पर राज्य सरकार की निर्धारित किराया दरें लागू नहीं होतीं। यात्रियों की परेशानी: त्योहार मनाएं या बजट संभालें? भोपाल से रीवा जाने वाले एक यात्री ने बताया, ‘ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिला। मजबूरी में ऐप खोला तो बस का किराया ₹5,000 दिखा। त्योहार साल में एक बार आता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाया जाए।’ इंदौर से जबलपुर जाने वाले एक अन्य यात्री के मुताबिक, ‘अब बस का किराया देखकर यात्रा रद्द करने का मन करता है। सरकार को ऑनलाइन ऐप पर दिख रहे किराए पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।’ आरटीओ बोले- ज्यादा किराया वसूलने पर कार्रवाई करेंगे भोपाल के आरटीओ अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने कहा, “हमारी नजर सभी तरह की बसों पर है। बस संचालकों से बात कर रहे हैं, ताकि दीवाली पर यात्रियों से अनुचित किराया न वसूला जाए। निर्धारित दर से ज्यादा किराया लेने वालों को नोटिस जारी कर कार्रवाई करेंगे।”
