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फ्रांस में गर्मी से 58 लोगों की मौत:न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद करना पड़ा; हीटवेव की चपेट में 26 यूरोपीय देश, इटली-ब्रिटेन में रेड अलर्ट

फ्रांस में गर्मी के कारण 58 लोगों की मौत हो गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, झीलों और नहरों में नहाने जा रहे हैं। इसके चलते पिछले कुछ दिनों में 40 लोगों की डूबकर मौत हो गई है। इनमें ज्यादातर युवा शामिल हैं। इसके साथ ही, 2 बच्चों समेत 18 लोगों की गर्मी में लू के चलते मौत हो गई। हीटवेव के चलते फ्रांस में गोलफेश न्यूक्लियर पावर प्लांट को सोमवार रात बंद करना पड़ा। इसकी वजह यह है कि प्लांट को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली गारोन नदी का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है। फ्रांस ही नहीं यूरोप के 26 देश हीटवेव की चपेट में हैं। स्पेन, इटली और ब्रिटेन समेत 14 देशों में गर्मी को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। इनमें से ज्यादातर देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंचने के करीब है। फ्रांस में गर्मी की 4 तस्वीरें देखें फ्रांस में पब्लिक में शराब पीने पर रोक लगी फ्रांस में सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पाबंदी लगा दी है। मौसम एजेंसी ने बताया कि सोमवार रात देश ने 1947 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद की सबसे गर्म रात दर्ज की। कई हिस्सों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। भीषण गर्मी के कारण 1,350 से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए हैं। गर्मी के कारण सरकार ने ‘फेत द ला म्यूजिक’ नामक वार्षिक म्यूजिक फैसटीवल के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर प्रतिबंध लगा दिया। यह म्यूजिक फैसटीवल हर साल पूरे फ्रांस में आयोजित होता है। इसमें लाखों लोग सड़कों पर उतरकर हिस्सा लेते हैं। सरकार को आशंका थी कि अत्यधिक गर्मी में शराब का सेवन लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में यह प्रतिबंध लागू किया गया। फ्रांस की मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने सोमवार को कहा कि मौजूदा हीटवेव की गंभीरता अगस्त 2003 की गर्मी से काफी मिलती-जुलती है। 2003 में फ्रांस में 16 दिनों तक चली भीषण हीटवेव के कारण करीब 15 हजार लोगों की मौत हो गई थी। इसे यूरोप के इतिहास की सबसे घातक गर्मी की घटनाओं में गिना जाता है। ब्रिटेन में टूट सकता है 50 साल पुराना रिकॉर्ड ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को तापमान 39°C से अधिक पहुंच सकता है। अगर ऐसा हुआ तो जून का 35.6°C का राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट जाएगा, जो 1976 में दर्ज किया गया था। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अधिक नमी के कारण गर्मी का असर ज्यादा महसूस होगा। मौसम विभाग ने बुधवार और गुरुवार के लिए रेड एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग जारी की है। यह चेतावनी तब जारी की जाती है जब गर्मी लोगों के स्वास्थ्य, परिवहन और जरूरी सेवाओं पर गंभीर असर डाल सकती है। ब्रिटेन में ट्रॉपिकल नाइट्स की स्थिति बनने की आशंका है। यानी रात में भी तापमान 20°C से नीचे नहीं जाएगा। स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम और इटली भी बेहाल स्पेन के कई हिस्सों में तापमान 38-40°C से ऊपर बना हुआ है। कुछ हिस्से में रविवार रात से सोमवार सुबह तक तापमान 30°C से नीचे नहीं गया। मौसम विभाग के मुताबिक यह ट्रॉपिकल नाइट की स्थिति है, जब रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलती। जर्मनी में भी गर्मी का असर दिखाई दे रहा है। एक हफ्ते में नदी में नहाने से 5 लोगों की मौत हो गई। बवेरिया की झीलों में 2 युवकों की डूबने से मौत हुई, जबकि बाल्टिक सागर में एक महिला की जान चली गई। बेल्जियम के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा गर्मी देश के इतिहास की सबसे भीषण हीटवेव बन सकती है। तापमान बढ़ने के कारण कई स्कूलों ने आधे दिन की क्लास शुरू कर दी हैं। इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रोम और मिलान समेत 15 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया है। बुधवार को यह संख्या बढ़कर 16 हो सकती है। रोम में नई इलेक्ट्रिक बसों की बैटरियां तेजी से खत्म हो रही हैं, क्योंकि एयर कंडीशनर लगातार चलाने पड़ रहे हैं। क्यों पड़ रही है इतनी भीषण गर्मी? मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक यूरोप में पड़ रही भीषण गर्मी की बड़ी वजह हीट डोम और ओमेगा ब्लॉक का एक साथ बनना है। ओमेगा ब्लॉक ऐसी मौसमीय स्थिति है, जिसमें हवा का बहाव सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ पाता। इसके कारण हीट डोम बनता है, जो ढक्कन की तरह गर्म हवा को जमीन के ऊपर फंसा देता है। गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती और कई दिनों तक तापमान लगातार बढ़ता रहता है। यही वजह है कि यूरोप के कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। मौजूदा हालात की तुलना अगस्त 2003 की ऐतिहासिक यूरोपीय हीटवेव से की जा रही है। उस दौरान 16 दिनों तक चली गर्मी के कारण पूरे यूरोप में लगभग 80 हजार मौतें हुई थीं। यूरोप में केवल 20% घरों में AC वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में बन रही एल नीनो स्थिति भी इस गर्मी को बढ़ा रही है। जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि कोयला, तेल और गैस के लगातार उपयोग से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। इसके कारण हीटवेव जैसी घटनाएं पहले के मुकाबले अधिक बार, लंबे समय तक और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप के अधिकांश घरों में एयर कंडीशनर (AC) नहीं होने के कारण लोगों को गर्मी से बचने में ज्यादा कठिनाई हो रही है। यूरोप में केवल करीब 20% घरों में AC हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा लगभग 90% है। ऐसे में लंबे समय तक पड़ने वाली गर्मी का असर लोगों की सेहत पर ज्यादा पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक, चक्कर आना और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे ब्रिटेन में मौजूद सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी पर बंद होने का खतरा बढ़ गया है। जिस इमारत में यह रेस्तरां चलता है, उसका मालिक क्राउन एस्टेट है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति संस्था है, जो राजा या रानी के नाम पर चलती है। पूरी खबर पढ़ें

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