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13 साल की लड़की का रेप कर खाई में फेंका:सीबीआई जांच खारिज कर कोर्ट ने दी आरोपियों को सजा; 7 साल बाद फैसला

क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा, 30 अप्रैल 2019 को भोपाल की मनुआभान टेकरी घूमने गई 13 साल की नित्या अचानक लापता हो गई थी। रातभर तलाश के बाद उसका शव करीब 100 फीट गहरी खाई में मिला। पोस्टमार्टम में सिर पर गंभीर चोट के साथ यौन हिंसा के सबूत भी सामने आए। पुलिस की जांच दो युवकों तक पहुंची। दोनों गिरफ्तार कर लिए गए। पूछताछ में हत्या और दुष्कर्म की कहानी सामने आई। लगा कि केस सुलझ गया है। लेकिन परिवार पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं था। मध्य प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच के लिए चिट्‌ठी लिखी। सीबीआई ने जांच में दोनों युवकों को बेकसूर करार दे दिया। आगे की कहानी इस पार्ट में पढ़िए- भोपाल कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और कार्रवाई समाप्त करने के आवेदन को निरस्त कर दिया। दोनों आरोपियों अविनाश साहू और जस्टिन राज के खिलाफ अदालत की कार्रवाई जारी रही। अब अभियोजन के सामने चुनौती थी- सीबीआई की जांच के विपरीत अपने मामले को सबूतों के साथ साबित करना। अभियोजन ने मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर भरोसा किया। इनमें सबसे महत्वपूर्ण था- नित्या की बुआ का बयान। बुआ के बयान ने फिर जोड़ी टेकरी की कड़ियां बुआ ने अदालत को बताया कि उसने अविनाश के साथ टेकरी जाने की योजना दो-तीन दिन पहले बनाई थी। 30 अप्रैल को नित्या उसके घर आई और साथ चलने के लिए तैयार हो गई। उसने अविनाश को फोन किया और दोनों एक्टिवा से टेकरी चले गए। रास्ते में उसने जस्टिन को बताया कि वे टेकरी जा रहे हैं।
करीब 4:30 बजे तीनों टेकरी पहुंचे। मंदिर के पीछे की ओर गए। बुआ और नित्या गुफा में लिखे नाम पढ़ रहे थे, जबकि अविनाश मोबाइल चला रहा था। अविनाश ने कहा था- नित्या नहीं मिल रही बुआ आगे पहाड़ी पर जाकर बैठ गई। कुछ देर बाद जब अविनाश वापस नहीं आया तो उसने फोन किया। मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर था। आवाज लगाने पर अविनाश हांफता हुआ और पसीने में ऊपर आया। उसने बताया कि नित्या नहीं मिल रही है। इसके बाद बुआ, अविनाश और जस्टिन उसे खोजने निकले। करीब 15-20 मिनट तलाश के बाद भी नित्या नहीं मिली। तीनों मेन रोड तक आए और फिर मंदिर लौटे। अविनाश और जस्टिन ने बुआ को सीढ़ियों पर बैठाया और मंदिर के पीछे गुफा की ओर फिर नित्या को खोजने चले गए। बचाव पक्ष ने कहा- फंसाया गया है इसके बाद अविनाश ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बचाव पक्ष ने कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। शुरुआत में एफआईआर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ थी और बाद में अविनाश को आरोपी बनाया गया। बचाव पक्ष ने डीएनए रिपोर्ट में विरोधाभास का हवाला दिया और कहा कि अविनाश की रिपोर्ट निगेटिव है। यह भी तर्क दिया गया कि सह-आरोपी जस्टिन राज को पहले ही जमानत मिल चुकी है। लेकिन कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज फॉरेंसिक साक्ष्य की एक अलग तस्वीर सामने आ रही थी। जिस डीएनए पर सवाल था, वही बना अहम साक्ष्य कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, बच्ची की वैजाइनल स्वैब स्लाइड और प्यूबिक हेयर से मिले ऑटोसोमल एसटीआर डीएनए प्रोफाइल तथा अविनाश के बाएं हाथ के नाखूनों की स्क्रैपिंग से मिले डीएनए प्रोफाइल समान पाए गए। इसके अलावा अविनाश के ब्लड सैंपल से प्राप्त डीएनए भी बच्ची के दाएं और बाएं हाथ के नाखूनों की स्क्रैपिंग से मैच बताया गया।
यानी बचाव पक्ष जिस डीएनए रिपोर्ट को विवादित बता रहा था, अदालत के सामने जांच रिकॉर्ड में उसके उलट फॉरेंसिक मिलान मौजूद था। CBI ने आवाज के जरिए परखी कहानी सीबीआई ने दोनों आरोपियों और बुआ का लेयर्ड वॉयस एनालिसिस (LVA) टेस्ट कराया। इसका इस्तेमाल पूछताछ के दौरान व्यक्ति के जवाबों में सच या झूठ के संकेत तलाशने के लिए किया जाता है। 2025 में सीबीआई ने सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, अविनाश की प्रतिक्रियाएं उसके बयानों से मेल खाती थीं और वह झूठ नहीं बोल रहा था। जस्टिन के बारे में रिपोर्ट में कुछ बातें छिपाने के संकेत बताए गए, जबकि बुआ के बारे में घटनाक्रम को लेकर अपराधबोध का उल्लेख किया गया। अब केस की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें थीं। एक तरफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और उसकी जांच से निकले निष्कर्ष थे। दूसरी तरफ अभियोजन के साक्ष्य और फॉरेंसिक मिलान। सात साल बाद आया फैसला जून 2026 में भोपाल जिला अदालत ने अविनाश साहू और जस्टिन राज दोनों को दुष्कर्म और हत्या का दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने सीबीआई के LVA/पाॅलीग्राफ संबंधी निष्कर्षों को निर्णायक नहीं माना। अदालत के मुताबिक यह परीक्षण घटना के करीब चार साल बाद किया गया था। इतने लंबे समय के बाद आरोपियों के जवाबों को उस आधार पर निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता था। इसलिए इसे खारिज कर दिया गया। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट पर सीबीआई द्वारा उठाए गए सवालों और उसकी जांच प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कीं। क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें… लापता लड़की की खाई में मिली लाश:पुलिस ने कहा- दुष्कर्म के बाद हत्या मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात भोपाल के उस चर्चित केस की, जिसने पुलिस की जांच से लेकर CBI की पड़ताल तक कई सवाल खड़े कर दिए थे। भोपाल के बड़े टूरिस्ट प्लेस में दिनदहाड़े 13 साल की बच्ची नित्या लापता हो गई। पढ़ें पूरी खबर…

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