ग्वालियर शहर गणेश उत्सव के रंग में डूबा हुआ है। गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख चौराहों और बाजारों तक गणपति बप्पा की अलग-अलग रूपों में प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। भव्य पंडाल और आकर्षक बिजली की सजावट के बीच गणेश प्रतिमाएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
इस बार शहर में कई ऐसी झांकियां तैयार की गई हैं, जिनमें गणपति के अनोखे स्वरूप देखने को मिल रहे हैं। कहीं बप्पा घोड़े पर सवार हैं, कहीं शेषनाग उनकी रक्षा करते दिख रहे हैं, तो कहीं भगवान शिव की गोद में बाल गणेश बैठे हैं।
शिंदे की छावनी के खलासीपुरा में स्थापित गणपति की करीब 14 फीट ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। इस बार प्रतिमा को पिछले साल से अलग रूप दिया गया है। प्रतिमा की सूंड और चरणों पर गोल्डन वर्क किया गया है, जिससे यह और भव्य दिख रही है।
आयोजक आलोक राठौर ने बताया कि इस बार गणपति बप्पा घोड़े पर सवार होकर आए हैं। उनके साथ मुशकराज और रिद्धि-सिद्धि भी सजे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
जेंसी नाला स्थित ऊंट पुल के पास सजी गणपति की झांकी भी अपने अनोखे रूप के कारण चर्चा में है। यहां भगवान गणेश मुशकराज के कंधों पर सवार दिख रहे हैं। साथ में रिद्धि-सिद्धि की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
आयोजक सचिन सोनी ने बताया कि वे करीब 29 वर्षों से गणपति बप्पा की सेवा कर रहे हैं। हर साल प्रतिमा को अलग और खास रूप में स्थापित किया जाता है। इस बार की झांकी शांति, समृद्धि और एकता का संदेश दे रही है।
माधव प्लाजा के पास स्थापित गणपति की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां बाल गणेश अपने पिता भगवान भोलेनाथ की गोद में बैठे हैं। यह प्रतिमा पिता-पुत्र के प्रेम और स्नेह को दिखाती है। आयोजक हरीश पाल ने बताया कि झांकी के जरिए पिता-पुत्र के रिश्ते को दर्शाया गया है।
