एक ई-कॉमर्स कंपनी के रिफंड सिस्टम की एक तकनीकी खामी को गुना के एक युवक ने अपनी काली कमाई का जरिया बना लिया। तरीका ऐसा कि पहले खाते में मोबाइल का पूरा पैसा वापस लिया, फिर अगले दिन कोरियर वाले से फोन की डिलीवरी भी ले ली। गुना की कैंट टीआई अनूप भार्गव के नेतृत्व में टीम ने हाईटेक ठगी का भंडाफोड़ करते हुए गुना जिले के बमोरी के विलोदा गांव के मुख्य आरोपी शेखर मीना समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की पूछताछ में पकड़े गए आरोपी ने बताया कि ऐसा करके तीन साल में तीन करोड़ रुपए ठगे। इस अंतरराज्जीय नेटवर्क में 40 से 50 लोग जुड़े हैं। पुलिस ने अब तक 13 आरोपियों को नामजद किया है। इसमें ठगी गई रकम 10 करोड़ से भी ऊपर निकल सकती है। एसपी हितिका वासल ने बताया कि मुख्य आरोपी से अहम सुराग मिले हैं। मामले में 13 नामजद हैं। कंपनी के सिस्टम में कहां कम्युनिकेशन गैप रहा, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। 10 दिन डिलीवरी टालकर कैंसिल कराते थे ऑर्डर; ऐप में अपडेट न होने का फायदा उठाकर डिलीवरी ब्वॉय से लेते थे पार्सल सिस्टम का खेल: 5 बिंदुओं में समझिए कैसे होता था यह फ्रॉड ट्रैकिंग से बचने का पैंतरा: फर्जी सिम और दूसरे राज्यों के पते: कंपनी का एल्गोरिदम एक ही पते और मोबाइल नंबर से बार-बार रिफंड मांगने पर अकाउंट ब्लॉक कर देता है। इससे बचने के लिए गिरोह फर्जी सिम कार्ड खरीदता था। हर बार नया नंबर और नए नाम से ऑर्डर होता था। कई बार डिलीवरी लोकेशन के लिए आरोपी गुजरात समेत अन्य राज्यों के पते डालते थे। रियल टाइम नहीं मिल पाता था अलर्ट ई-कॉमर्स कंपनी की पॉलिसी के अनुसार 10-12 दिन में डिलीवरी न होने पर रिफंड ऑटो-ट्रिगर हो जाता है। तकनीकी खामी यह रही कि कंपनी और कूरियर पार्टनर (ब्लूडार्ट) के बीच रियल-टाइम डेटा सिंक नहीं था। सिस्टम से रिफंड अप्रूव होने के बाद भी डिलीवरी बॉय के ऐप पर पार्सल पेंडिंग डिलीवरी ही दिखाता रहता था। पुलिस अब ई-कॉमर्स कंपनी की लीगल और आईटी टीम से इस खामी की तकनीकी रिपोर्ट मांग रही है।
