मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मुलाकात की। प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जल्द छात्रसंघ चुनाव कराने सहित शासकीय कॉलेजों में मूलभूत सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने की मांग को लेकर मंत्री को ज्ञापन सौंपा। अभाविप ने ज्ञापन में कहा कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव बंद हैं। इसके कारण प्रदेश के लाखों विद्यार्थी परिसरों में अपने लोकतांत्रिक प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से वंचित हैं। परिषद ने कहा कि वह लंबे समय से उच्च शिक्षण संस्थानों में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने और विद्यार्थियों को नेतृत्व का अवसर देने के लिए छात्रसंघ चुनाव की मांग करती रही है। सितंबर में चुनाव कराने का आश्वासन, अब तक अधिसूचना नहीं प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से भी परिसरों में छात्रसंघ चुनाव कराने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकार ने सितंबर में चुनाव कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना और चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। अभाविप ने मांग की कि अकादमिक कैलेंडर के अनुरूप लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रत्यक्ष, पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध चुनाव कराए जाएं। सरकारी कॉलेजों के लिए अलग बजट की मांग प्रतिनिधिमंडल ने करीब 15 दिन पहले प्रदेशभर में शासकीय महाविद्यालयों की बदहाल व्यवस्थाओं और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर कलेक्ट्रेट स्तर पर किए गए प्रदर्शनों का भी हवाला दिया। अभाविप ने कहा कि कई सरकारी कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति में सुधार की जरूरत है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग तत्काल विशेष अतिरिक्त बजट जारी करे। ‘चुनाव सिर्फ राजनीतिक प्रक्रिया नहीं’ अभाविप के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की वास्तविक सहभागिता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं होने से विद्यार्थियों में रोष है। सरकार को विद्यार्थियों की इस मांग पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभाविप के ‘विद्यार्थी हुंकार अभियान’ के तहत प्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं की कमियों को सामने लाया गया है। इन कमियों को दूर करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को छात्रहित में तत्काल अतिरिक्त बजट जारी करना चाहिए।
