उज्जैन में वीर भारत न्यास को एक रुपए में करीब 500 करोड़ रुपए की जमीन देने के आरोपों को लेकर कांग्रेस के भीतर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पीसी में पटवारी के दावों को खारिज करने पर कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तक कर डाली। निधि चतुर्वेदी पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी हैं। उन्होंने अपनी लिखा दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार…उन्होंने लिखा कि उज्जैन भूमि विवाद में कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें कटघरे में खड़ा करना किसी भी वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि यदि जीतू पटवारी से कोई गलती हुई थी तो दिग्विजय सिंह उन्हें फोन पर, आमने-सामने या पार्टी के आंतरिक मंचों पर अपनी बात बता सकते थे। इसके बजाय उज्जैन जाकर मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना पार्टी अनुशासन के खिलाफ है। मंत्री सारंग बोले- अगर कांग्रेसी ही आरोप लगा रहे तो पार्टी को ध्यान देना चाहिए कांग्रेस में मची अंर्तकलह पर एमपी के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- कांग्रेस के नेता ही दिग्विजय सिंह को स्लीपर सेल कह रहे हैं। सही मायनों में कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस की गुटबाजी और आंतरिक कलह अब पूरी तरह जमीन पर उतर आई है। कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी के बयान पर मंत्री सारंग ने कहा- यदि कांग्रेस का कोई नेता ऐसा आरोप लगा रहा है तो कांग्रेस को इस पर ध्यान देना चाहिए। ‘पुत्र-मोह’ में उठाया कदम निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का यह व्यवहार उनके “पुत्र-मोह” का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की महत्वाकांक्षा में दिग्विजय सिंह पार्टी अनुशासन भूल चुके हैं। ‘भाजपा को ऑक्सीजन दे रहे’ पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा और संघ की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, तब पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से कमजोर करना विपक्ष को राजनीतिक फायदा पहुंचाने जैसा है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान पर चोट बताया। 2020 से लेकर राज्यसभा चुनाव तक का जिक्र निधि ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और अंदरूनी खींचतान के कारण 2020 में कांग्रेस सरकार गिरी, 2023 और 2024 के चुनावों में पार्टी को हार मिली और हालिया राज्यसभा चुनाव में भी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी राजनीति संगठन को लगातार कमजोर कर रही है। हाईकमान से कार्रवाई की मांग पोस्ट के अंत में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि पार्टी की साख और कार्यकर्ताओं का मनोबल बचाने के लिए अब हाईकमान को हस्तक्षेप करना चाहिए। अब जानिए… क्या है पूरा मामला दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को लगभग 500 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपए में दे दी गई। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पटवारी के आरोपों से खुद को अलग करते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जमीन आवंटन में अनियमितता का दावा सही नहीं है। दिग्विजय के इस रुख के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिन पर अब निधि चतुर्वेदी की पोस्ट ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। ये खबर भी पढ़ें… पूर्व सांसद की बेटी बोलीं- दिग्विजय वैचारिक दोगले कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी और कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह के RSS संबंधी बयान को लेकर एक फेसबुक पोस्ट किया था उन्होंने पार्टी नेतृत्व से दिग्विजय सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी। निधि ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह के बयान ने पार्टी की वैचारिक लड़ाई को कमजोर किया है। जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा है। निधि ने लिखा- दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा मारा है, जो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ सड़क पर लड़ रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
