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सिर्फ एक्साइज अधिकारी है इसलिए CBI जांच नहीं:शराब कारोबारी मकवाना की मौत मामले में हाई कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन की खारिज

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने शराब दुकान संचालक की मौत से जुड़े मामले में दायर रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि मामले में आरोपी एक्साइज विभाग का अधिकारी है, जांच CBI को सौंपने का आदेश नहीं दिया जा सकता। जस्टिस संदीप एन. भट्ट और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने कहा कि स्थानीय पुलिस को जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला था। सिर्फ आरोपी के एक्साइज अधिकारी होने के आधार पर CBI जांच का निर्देश देना उचित नहीं है। शराब दुकान संचालक ने आत्महत्या की थी मामला देवास और इंदौर में शराब की लाइसेंसी दुकानें संचालित करने वाले दिनेश मकवाना की मौत से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एक एक्साइज असिस्टेंट कमिश्नर ने मृतक से प्रत्येक दुकान के लिए 1.5 लाख रुपए प्रतिमाह की मांग की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार मृतक ने करीब 22 लाख रुपए का भुगतान किया, लेकिन इसके बावजूद उससे लगातार पैसों की मांग और धमकी दी जाती रही। आरोप है कि इसके बाद 8 नवंबर 2025 को दिनेश मकवाना ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। याचिका में यह भी कहा गया कि मौत से पहले उसने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। परिजनों की ओर से आरोप लगाया गया कि स्थानीय पुलिस ने मामले की उचित तरीके से जांच नहीं की। सिंगल बेंच ने CBI को FIR दर्ज कर जांच के निर्देश दिए थे मामला हाई कोर्ट पहुंचने पर सिंगल बेंच ने CBI को FIR दर्ज कर जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। इस आदेश को आरोपी एक्साइज अधिकारी ने डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी। 17 जुलाई 2026 को डिवीजन बेंच ने रिट अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच का आदेश रद्द कर दिया था। इसके बाद मामले से जुड़े याचिकाकर्ता ने डिवीजन बेंच के इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर की। याचिकाकर्ता ने सीनियर अधिकारी के खिलाफ आरोप का दिया हवाला रिव्यू पिटीशन में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि डिवीजन बेंच ने यह मानते हुए फैसला दिया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट आने से पहले CrPC की धारा 154(3), 156(3) और धारा 200 के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। एडवोकेट ने यह भी तर्क दिया कि मामले में आरोप एक्साइज विभाग के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के खिलाफ हैं और इस पहलू पर डिवीजन बेंच ने पर्याप्त विचार नहीं किया। रिव्यू अपील का दूसरा रास्ता नहीं वहीं प्रतिवादी की ओर से कहा गया कि CPC के Order 47 Rule 1 के तहत रिव्यू के लिए जरूरी आधार याचिका में नहीं बताए गए हैं। यह भी तर्क दिया गया कि समीक्षा याचिका को अपील का एक वैकल्पिक या छिपा हुआ रास्ता नहीं बनाया जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी और सीबीआई जांच के आदेश को उचित नहीं माना।

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