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पीएचई विभाग को दो विभागों में मर्ज करने की तैयारी:हाईलेवल पर मंथन, पंचायत और ग्रामीण विकास व नगरीय विकास में मर्ज हो सकता है विभाग

मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य और यांत्रिकी विभाग (पीएचई) को राज्य सरकार पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज करने का फैसला ले सकती है। इसको लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की मौजूदगी में हाई लेवल मीटिंग में फैसला होना बाकी है। इसके साथ ही राज्य सरकार महानगरीय क्षेत्र में काम करने वाले पीएचई विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर नगरीय विकास विभाग को सौंपने की तैयारी भी कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा सरकार के ढाई साल पूरे होने पर की जाने वाली समीक्षा में यह विषय चर्चा में रखा है। पीएचई विभाग के धीरे-धीरे घटते कामों को देखते हुए अब राज्य सरकार इसे दूसरे विभाग में मर्ज करने की तैयारी कर रही है। इस विभाग के पास शहरी इलाकों में अब कोई काम नहीं है जबकि पहले पेयजल सप्लाई पीएचई विभाग के पास होती थी। इसके बाद अब गांवों की नल जल योजनाओं और पेयजल योजनाओं का काम पीएचई विभाग के पास रह गया है। अभी गांवों के हैंडपंप संधारण की जिम्मेदारी पीएचई विभाग के पास है। पीएचई विभाग के एक सीनियर अफसर ने प्रशासनिक स्तर पर चल रही चर्चा की पुष्टि की है। अधिकारी के मुताबिक जल्दी ही सब कुछ साफ हो जाएगा। ऐसा है पीएचई विभाग में स्टाफ का स्ट्रक्चर अभी जो स्ट्रक्चर पीएचई विभाग का है उसमें एक पद मुख्य अभियंता का है। अधीक्षण यंत्री के 5 पद हैं, 35 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं तथा 175 सहायक यंत्री और 700 उपयंत्री हैं। इसके अलावा संविदा पर लगभग 1000 कर्मचारी हैं। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी लगभग 4000 हैं तथा कार्य भारित कर्मचारी लगभग 4000 हैं। इसके अलावा बाबू चपरासी की संख्या भी 2000 के आसपास है। इस तरह करीब 12 हजार कर्मचारी अधिकारी हैं। जल निगम ने नल जल योजनाओं को ग्राम पंचायतों को सौंपने का आदेश किया जारी इस बीच जल निगम ने मध्य प्रदेश की ग्रामीण इलाकों में संचालित नल जल योजनाओं को ग्राम पंचायत को सौंपने के आदेश जारी कर दिए हैं। जल निगम के एमडी ने गुरुवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक के दौरान पीएचई विभाग के मैदानी अफसरों को इसकी जानकारी दी और कहा कि इसके आदेश भी जारी किए जा रहे हैं। इसके बाद अब पंचायतों में नल जल योजना की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग के हवाले रहेगी। शहरी इलाकों का अमला मिलेगा निकायों को दूसरी ओर यह तय हो गया है कि प्रदेश के महानगरों में पानी और सीवरेज के प्रबंधन लिए PHE का अमला शहरी निकायों को दिया जाना है। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा इसे समीक्षा बैठक के प्रस्तावित एजेंडे में भी शामिल किया है। सीएम द्वारा ली जाने वाली समीक्षा बैठक में PHE से थोकबंद अमले की प्रतिनियुक्ति के लिए शहरी निकायों के लिए प्रस्ताव एवं नीति बनाने की कार्यवाही की जाएगी।

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