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पारिवारिक कारण…चारा घोटाला, अभिषेक बंटी का टिकट क्या इसलिए कटा:BJP असली वजह क्यों नहीं बता रही, बांकीपुर में खेला के पीछे की कहानी

बांकीपुर विधानसभा सीट से अभिषेक कुमार बंटी ने नामांकन करने के 24 घंटे बाद टिकट वापस कर दिया। इसके बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को नया प्रत्याशी बनाया। नीरज आज यानी 13 जुलाई को नामांकन करेंगे। बंटी ने टिकट वापस क्यों किया, इस वक्त सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। पार्टी ने सूत्रों के हवाले से मीडिया को तरह-तरह के कारण बताए हैं। लेकिन इसके पीछे क्या वही कारण हैं, जो बताए जा रहे हैं या कहानी कुछ और है, समझेंगे, बूझे की नाही में…। टिकट कटने के 4 कारण बताए जा रहे, क्या वह सही हैं? 1. पारिवारिक कारण 10 जुलाई की दोपहर अभिषेक कुमार बंटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मैं पारिवारिक कारणों से चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं। इसी वजह से अपना नामांकन वापस ले रहा हूं। बंटी ने भाजपा नेतृत्व को इस संबंध में पत्र भी लिखा और मौका देने के लिए आभार जताया। यह थोड़ा अटपटा है। क्योंकि… 2. चारा घोटाले में माता-पिता को मिली है सजा भाजपा ने सूत्रों के हवाले से मीडिया में जानकारी दी कि अभिषेक कुमार बंटी के माता-पिता पर चारा घोटाला का केस है। उनकी मां चंचला सिन्हा और पिता रविंद्र प्रसाद सिन्हा को चारा घोटाले में सजा हो चुकी है। पार्टी चारा घोटाले के खिलाफ लगातार मुहिम चला रही थी। ऐसे में टिकट देने से पार्टी की इमेज खराब होती। हां, यह सच बात है कि CBI अदालत ने अभिषेक की मां और पिता को डोरंडा ट्रेजरी घोटाले में 3-3 साल की सजा सुनाई है। दोनों अभी जमानत पर बाहर हैं। केस झारखंड हाईकोर्ट में पेंडिंग है। हालांकि, यह तर्क बहुत कमजोर है, क्योंकि… 3. मैट्रिक के सर्टिफिकेट में गड़बड़ी की चर्चा पार्टी ने सूत्रों के हवाले से दूसरा बड़ा कारण बताया कि अभिषेक कुमार बंटी के मैट्रिक के सर्टिफिकेट में गड़बड़ी थी। कुछ तकनीकी गड़बड़ी थी। इससे पार्टी की फजीहत होती। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर उनकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे। उससे गलत मैसेज जाता। वहीं, अभिषेक के पिता का दावा है कि बेटे के मैट्रिक के सर्टिफिकेट में कोई गड़बड़ी नहीं है। चाहे तो कोई जांच कर सकता है। BJP का यह तर्क उसकी दोहरी नीतियों को उजागर कर रहा। क्योंकि… 4. नामांकन रद्द होने का खतरा पार्टी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अभिषेक ने नामांकन में गलत जानकारी दी थी। उन्होंने पढ़ाई से जुड़ी जानकारियां भी छिपाई थी। इस गलती की वजह से उनका नॉमिनेशन रद्द हो सकता था। ऐसे में भाजपा ने जोखिम नहीं लेने का फैसला किया। पार्टी का यह तर्क व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि… अभिषेक ने 9 जुलाई को 2 सेट में नामांकन किया था। अगर पार्टी को जानकारी हो गई थी कि नामांकन में गलत जानकारी दी गई है तो वह दोबारा 2 सेट या एक सेट में नामांकन दाखिल करा सकती थी। क्योंकि अभी नामांकन में 2 दिन और बाकी थे। 10 और 13 जुलाई। …तो अभिषेक बंटी का टिकट क्यों कटा हमारी पड़ताल में मौटे तौर पर 3 बड़े कारण सामने आए हैं… 1. अभिषेक के पीछे सीनियर नेताओं की लॉबी लगी थी तारीख-7 जुलाई 2026। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जम्मू-कश्मीर के दौरे पर थे। तभी उन्हें जानकारी मिली कि उनकी अपनी सीट (बांकीपुर) पर कैंडिडेट के नाम का आज ही ऐलान होना है। वे जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे को बीच में ही छोड़कर दिल्ली लौट आए। दिल्ली लौटने के बाद नितिन नवीन ने बंटी का नाम फाइनल किया। इसके बाद पार्टी ने तुरंत इसका ऐलान कर दिया। बताया जा रहा है कि जैसे ही बंटी के नाम का ऐलान हुआ। पटना में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई। अपनी पसंद के नेता को टिकट नहीं दिला पाने से निराश नेताओं की एक लॉबी एक्टिव हुई। दिल्ली में मजबूत पोजिशन में बैठे एक नेता के माध्यम से टॉप लीडरशिप को सीनियर नेताओं ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद टॉप लीडरशिप ने नितिन नवीन के पटना दौरे को रोक दिया। चूंकि नितिन नवीन को 9 जुलाई को बंटी के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होना था। तब कहा गया कि अब नितिन नवीन 10 जुलाई को पटना आएंगे। 2. प्रशांत किशोर फैक्टर और खराब इमेज का फीडबैक सीनियर नेताओं की नाराजगी के फीडबैक के बीच पार्टी हाईकमान को बांकीपुर सीट की एक रिपोर्ट दी गई। इसमें बताया गया कि प्रशांत किशोर के खुद मैदान में उतरने से बांकीपुर का मुकाबला बेहद कड़ा और हाई-प्रोफाइल हो गया है। अभिषेक बंटी एक कमजोर उम्मीदवार हैं। बंटी की इलाके में इमेज कथित तौर पर बहुत साफ-सुथरी नहीं है। ना ही वह मैच्योर नेता हैं। इलाके में उनकी पहचान सिर्फ नितिन नवीन के कामों को मैनेज करने वाले की है। 3. बड़े नेताओं की लड़ाई में नीरज की चमकी किस्मत बताया जा रहा है कि लगातार मिल रहे फीडबैक पर टॉप लीडरशिप ने नितिन नवीन से बात की। उन्हें पुनर्विचार करने की सलाह दी गई। और अंतिम फैसला भी नितिन नवीन के ऊपर छोड़ दिया गया। चूंकि टॉप लीडरशिप नितिन नवीन के मर्जी के बिना प्रत्याशी नहीं बदलना चाहती थी। क्योंकि वह इलाका उनका है। चर्चा है कि इसके बाद नितिन नवीन ने पासा पलट दिया। उन्होंने अपने दूसरे भरोसेमंद नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिला दिया। वह जानते थे कि नीरज के नाम पर पार्टी को ज्यादा आपत्ति नहीं हो सकती है क्योंकि… नीरज को खुद नहीं पता था कि हमको टिकट मिलेगा। एक इंटरव्यू में नीरज ने बताया, ‘10 जुलाई की दोपहर हम बूथ पर पर्ची बांट रहे थे। तब दोस्तों का फोन आया कि तुम्हारा नाम टिकट की रेस में है। हमको भरोसा नहीं हुआ। कुछ देर बाद पार्टी के सीनियर नेताओं का फोन आया और पार्टी दफ्तर बुलाया गया। दफ्तर पहुंचे तो बताया गया कि आपको चुनाव लड़ना है। हम तो खानदानी जनसंघी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरोसा जताया है तो उनके भरोसे पर खरा उतरेंगे। उनके कामों का आगे बढ़ाएंगे।’

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