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पब्लिक प्लेस पर पोर्न देखने पर रोक की मांग खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- यह नीति का मामला, सरकार के पास जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर पोर्नोग्राफी देखने पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह कानून का नहीं बल्कि पॉलिसी का मामला है। इस पर फैसला केंद्र सरकार और विषय विशेषज्ञों को करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा निश्चित रूप से अहम है, लेकिन इसमें ऐसा कोई कानूनी प्रश्न नहीं है जिस पर कोर्ट को विचार करना पड़े। यह तकनीकी विकास और विशेषज्ञों की स्टडी से जुड़ा नीतिगत विषय है, जो मुख्य रूप से सूचना मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के सामने अपनी बात रखने की सलाह दी। साथ ही कहा कि इस मामले में अदालत के हस्तक्षेप जरूरी नहीं है। याचिकाकर्ता के 2 दावे… याचिका में दावा- इंटरनेट पर अश्लील सामग्री तक पहुंच आसान यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बीएल जैन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी ताकि विशेषकर नाबालिगों के बीच पोर्नोग्राफी की पहुंच को रोका जा सके। याचिका में दावा किया गया कि इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी कंटेट आसानी से मिल जाता है। और यह लगातार बढ़ रहा है। हर सेकंड हजारों पोर्न वेबसाइट देखी जा रही हैं। अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता के कारण इसकी लत बढ़ रही है और इससे यौन अपराधों में भी बढ़ोतरी हो रही है। याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का हवाला देते हुए कहा गया था कि केंद्र सरकार के पास आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच रोकने की शक्ति है। क्या भारत में पोर्न देखना अपराध है? भारतीय कानून में वयस्क व्यक्ति द्वारा निजी स्थान पर पोर्न देखना अपने-आप में अलग से अपराध घोषित नहीं किया गया है। लेकिन ये कार्य अपराध हो सकते हैं, जब कोई पोर्न बनाता है या बेचता है। सार्वजनिक रूप से अश्लील सामग्री दिखाना, बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना, देखना या शेयर करना भी अपराध के दायरे में आता है। इसके अलावा बिना सहमति किसी का निजी वीडियो फैलाना, अश्लील सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण करना भी कानूनन अपराध माना जाएगा। ——————– ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने POCSO के दुूरुपयोग पर चिंता जताई: कहा- लड़का-लड़की को भागने से सरकार कैसे रोकेगी, यह नई चीजें आजमाने की उम्र सुप्रीम कोर्ट ने किशोर-किशोरियों के बीच सहमति से बने संबंधों में पॉक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। अदालत ने सोमवार को कहा कि जब किसी लड़के और लड़की के बीच संबंध हो और वे साथ चले जाएं, तो हर मामले को स्वतः पॉक्सो का केस नहीं माना जा सकता।पढ़ें पूरी खबर…

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