मध्य प्रदेश के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में पनीर के शौकीनों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने प्रदेश में असली डेयरी पनीर के नाम पर बेचे जा रहे नकली और सेहत के लिए नुकसानदेह ‘एनालॉग पनीर’ (डेयरी एनालॉग) के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। लैब में भेजे 921 सैंपल 123 अमानक खाद्य सुरक्षा आयुक्त सुखवीर सिंह द्वारा जारी यह आदेश पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। यह कड़ा कदम तब उठाना पड़ा जब राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की जांच में पनीर के 921 सैंपलों में से 123 सैंपल पूरी तरह अमानक पाए गए, जिसने बाजार में असली पनीर के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल का भंडाफोड़ कर दिया है। क्या होता है ‘एनालॉग पनीर’ ? भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के मुताबिक, डेयरी एनालॉग एक ऐसा उत्पाद है जिसमें दूध के प्राकृतिक अवयवों (प्रोटीन और फैट) को आंशिक या पूर्ण रूप से गैर-दुग्ध (Non-Dairy) अवयवों जैसे वनस्पति वसा, घटिया तेल या स्टार्च से बदल दिया जाता है। इसे इस प्रकार तैयार किया जाता है कि इसका रूप, बनावट और उपयोग बिल्कुल असली पनीर जैसा ही लगता है। इसके कारण आम उपभोक्ता खुले रूप में देखकर या खाकर असली पनीर और एनालॉग पनीर के बीच का अंतर बिल्कुल नहीं समझ पाता और धोखे का शिकार हो जाता है। सरकार को यह सख्त फैसला क्यों लेना पड़ा? एमपी में यह बात लगातार सामने आ रही थी कि होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता अपने मेनू कार्ड और रेट लिस्ट में सिर्फ “पनीर” लिखते हैं और ग्राहकों को बिना बताए सस्ते एनालॉग पनीर से बने व्यंजन परोस रहे थे। चूंकि ग्राहकों के सामने यह पैकेट में नहीं बल्कि सीधे थाली में परोसा जाता है, इसलिए आम जनता को इसकी वास्तविक प्रकृति और गुणवत्ता जानने का कोई व्यावहारिक मौका ही नहीं मिल रहा था। पैकेजिंग और लेबलिंग पर जरूरी घोषणाएं गायब होने से उपभोक्ताओं के साथ सीधे तौर पर आर्थिक धोखाधड़ी हो रही थी और उनकी ‘सूचित पसंद’ के अधिकार का हनन हो रहा था। विभाग द्वारा की जाने वाली रूटीन कार्रवाइयां और नमूनों को नष्ट करना इस खेल को रोकने के लिए नाकाफी साबित हो रहा था, जिसके चलते पब्लिक की सेहत को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लेना पड़ा। सेहत के लिए है नुकसानदेह वैज्ञानिक तथ्यों और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक दूध के प्रोटीन और वसा को हटाकर वनस्पति स्रोतों के इस्तेमाल से उत्पाद की जैविक पोषण वैल्यू समान नहीं रहती। यदि इसमें घटिया वनस्पति वसा या हाइड्रोजनीकृत फैट (वसा) का उपयोग किया गया हो, तो इसका स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल और गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, कृत्रिम रूप से पनीर जैसी बनावट देने के लिए इस्तेमाल होने वाले अतिरिक्त स्टार्च और फूड एडिटिव्स के कारण कई संवेदनशील व्यक्तियों में पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने की पूरी संभावना रहती है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और विशेष पोषण आवश्यकताओं वाले रोगियों के स्वास्थ्य के लिए असली पनीर के स्थान पर इसका नियमित उपयोग बेहद जोखिम भरा है। पैकेट और लेबल पर कौन सी जानकारियां लिखनी होंगी? FSSAI के नियमों के अनुसार, डेयरी एनालॉग श्रेणी के उत्पादों के लिए पृथक लेबलिंग और पैकेजिंग संबंधी कड़े प्रावधान हैं। यदि कोई निर्माता इन उत्पादों को पैकेट में बेचता है, तो उसे पैकेजिंग पर ‘Analogue in Dairy Context’ की स्पष्ट परिभाषा और विनियमों के तहत निर्धारित की गई आवश्यक घोषणाएं साफ-साफ अंकित करनी होंगी। लेबल पर उत्पाद का ऐसा सटीक नाम लिखना अनिवार्य होगा जिससे उसकी वास्तविक प्रकृति, संघटन यानी कम्पोजिशन और पोषणीय विशेषताओं का साफ पता चल सके, ताकि आम उपभोक्ता पैकेजिंग देखकर उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता को एक नजर में समझ सके। होटल और रेस्टोरेंट के लिए क्या नए नियम होंगे? होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, स्ट्रीट फूड विक्रेता और कैटरिंग जैसे खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों के लिए अब खुले रूप में एनालॉग पनीर या एनालॉग मावे का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नए नियमों के तहत इन प्रतिष्ठानों को उपभोक्ताओं को परोसे जाने वाले व्यंजनों में प्रयुक्त सामग्री की वास्तविक पहचान को पारदर्शी रूप से प्रकट करना होगा। वे मेनू कार्ड या मूल्य सूची में केवल “पनीर” लिखकर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकते। यदि वे भविष्य में किसी भी स्वीकृत गैर-दुग्ध विकल्प का उपयोग करते हैं, तो उन्हें प्रत्येक विक्रय स्थल पर उत्पाद की वास्तविक पहचान की पारदर्शी सूचना ग्राहकों को देनी होगी, ताकि उपभोक्ताओं की स्वतंत्र और सूचित पसंद का अधिकार बना रहे। अब आगे क्या कार्रवाई होगी? एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध का यह आदेश पूरे मध्य प्रदेश की भौगोलिक सीमा के भीतर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके तहत एनालॉग पनीर और एनालॉग मावे के विनिर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण, आपूर्ति और बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रदेश के सभी जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और प्रवर्तन कार्यवाहियां तेज की जाएंगी। नियमों का उल्लंघन कर बिना समुचित पहचान या भ्रामक लेबलिंग के ऐसे उत्पाद बेचने वाले खाद्य कारोबार संचालकों के खिलाफ न्यायनिर्णयन और अन्य कड़ी वैधानिक कार्यवाहियां प्रचलित की जाएंगी, तथा अवैध रूप से पाए जाने वाले अमानक उत्पादों को तत्काल नष्ट या जब्त करने का काम किया जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… MP में दूध की जगह वनस्पति से बना पनीर बैन महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात रवाना होने से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की बैठक में इस तरह के पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दिए। पूरी खबर पढ़ें
