भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई का मामला सुर्खियों में है। गैस पीड़ितों के 4 संगठनों का कहना है कि भोपाल नगर निगम दूषित पानी आपूर्ति कर रहा है। जिससे यह इलाका इंदौर का भागीरथपुरा हो रहा है। वहां गंदा पानी पीने से कई जानें जा चुकी हैं। शनिवार को संगठनों ने सीवेज और पानी की लाइन को लेकर वीडियो भी जारी किए। इसके बाद नगर निगम की टीम प्रभावित इलाकों में पहुंची और पानी के सैंपल लिए। इससे पहले शुक्रवार को संगठनों ने प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की जांच कराई जांच रिपोर्ट मीडिया के सामने रखी थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक जांचे गए पानी के करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (मल से जुड़े बैक्टीरिया) पाए गए। इससे संकेत मिलता है कि इन इलाकों में बड़ी मात्रा में मल से दूषित पानी लोगों तक पहुंच रहा है। तारा एक्वाचेक H2S वायल टेस्ट के जरिए यह टेस्ट कराए गए थे। शहर से पानी के 132 नमूनों की जांच
नगर निगम की टीम शनिवार को चांदबाड़ी, गरीब नगर, शिव शक्ति नगर, प्रीत नगर, शिवनगर फेस-3, कल्याण नगर, लक्ष्मी नगर, चंदन नगर, नबाव कॉलोनी, अन्नू नगर, सुंदर नगर, प्रेम नगर, टिम्बर मार्केट, शंकर नगर, उड़िया बस्ती, नगर निगम कॉलोनी, नवजीवन कॉलोनी, छोला मंदिर, संत कंवर राम कॉलोनी, ग्रीन पार्क कॉलोनी, जेपी नगर, रंभा नगर, चौकसे नगर, अटल अयूब नगर, न्यू आरिफ नगर, करीम बख्त कॉलोनी, रिसालदार कॉलोनी, शक्ति नगर, एकता नगर, राजगढ़ कॉलोनी, दुलीचंद का बाग, द्वारका नगर, कृष्णा नगर, कैंची छोला, मस्जिद एहल ए हदीस, न्यू कबाड़खाना, फूटा मकबरा, ब्लूमून कॉलोनी एवं निशातपुरा पहुंची। यहां से पानी के 132 नमूने लिए। वहीं, क्लोरीन की जांच की गई। निगम का दावा है कि जांच में रेसिडुअल क्लोरीन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। मानक स्तर की मात्रा में रेसिडुअल क्लोरीन का पाया जाना जीवाणु रहित जल होने का सूचक है। उक्त स्थलों से एकत्र किए गए नमूनों का विस्तृत रासायनिक परीक्षण की 08 जल परीक्षण शालाओं में भी किया जा रहा है। निगम का दावा था कि शुद्ध जलापूर्ति कर रहे
गैस पीड़ित संगठनों की रिपोर्ट पर निगम ने कहा था कि 42 गैस प्रभावित बस्तियों में पाइप लाइन के जरिए उपचारित शुद्ध जलापूर्ति की जा रही है। यहां कहीं भी ट्यूबवेल के जरिए जलापूर्ति नहीं की जा रही। इसकी मानीटरिंग की जाती है। नियमित रूप से जल की गुणवत्ता का परीक्षण भी प्रशिक्षित कर्मचारियों के माध्यम से कराया जा रहा है। गैस प्रभावित बस्तियों में यदाकदा गंदे पानी की जानकारी प्राप्त होने पर निगम तत्काल जांच करवाता है। पाइप लाइन के माध्यम से प्रदाय किए जा रहे जल की गुणवत्ता के परीक्षण में पानी के रंग, गंध, स्वाद, रेसिडुअल क्लोरीन, पीएच, टरबीडिटी व बैक्टेरिया आदि की जांच अलग-अलग क्षेत्रों से जल के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में नियमित रूप से की जा रही है। जल परीक्षण की रिपोर्ट अनुसार गैस प्रभावित क्षेत्रों में कहीं भी पानी में किसी भी प्रकार की अशुद्धि नहीं पाई गई। निगम के दावे पर पलटवार, जारी किए वीडियो
निगम के दावे पर गैस पीड़ित संगठनों ने पलटवार किया है। भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने शनिवार को कुछ वीडियो भी जारी किए। इसमें पाइप लाइन के बीच से सीवेज के बहने की तस्वीरें हैं। उन्होंने बताया कि यूनियन कार्बाइड के पीछे स्थित उड़िया बस्ती में आज सप्लाई का पानी आया। आप खुद ही बताए कि सीवेज कैसे पानी में नहीं मिलेगा? उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा जैसी घटना का इंतजार करने के बजाय दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था भी तत्काल शुरू की जाए। 30 बस्तियों से 63 सैंपल लिए थे
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान की माने तो जुलाई में 30 बस्तियों के नलों से 63 पानी के नमूने एकत्र किए गए थे। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनके अनुसार, इसका मतलब है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों को दूषित पेयजल मिल रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ा तालाब (अपर लेक) से सप्लाई किए गए पानी के 90 प्रतिशत नमूने और कोलार डैम से सप्लाई किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में दूषित पाए गए। दूषित पानी से बढ़ रहीं गंभीर बीमारियां
संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के लोग लंबे समय से सीवेज से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड समेत जलजनित बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन इलाकों में पानी मिला प्रदूषित
अन्नू नगर, अटल अयूब नगर, ब्लू मून कॉलोनी, चंदन नगर, चांदबाड़ी, गरीब नगर, जेपी नगर, कल्याण नगर, नवाब कॉलोनी, न्यू आरिफ नगर, प्रीत नगर, प्रेम नगर, शंकर नगर, शिव नगर, शिव शक्ति नगर, सुंदर नगर, उड़िया बस्ती में पानी के सैंपल प्रदूषित मिले हैं। वहीं, द्वारका नगर, कैंची छोला, कैंची छोला न्यू ब्लॉक, कृष्णा नगर, न्यू कबाड़खाना, निशातपुरा, फूटा मकबरा, शाहीन कॉलोनी, शक्ति नगर में पानी के सैंपल ठीक मिलें। यहां किसी प्रकार का प्रदूषित पानी नहीं मिला है।
