दमोह जिले में सरकारी रिकॉर्ड से ही 12 तालाब ‘गायब’ कर दिए गए। मामला 2022-23 में ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा (आरईएस), मनरेगा, वॉटरशेड और वन विभाग की ओर से बनाए गए 125 अमृत सरोवरों का है। जब इन तालाबों में कथित गड़बड़ियों की ईओडब्ल्यू जांच की नौबत आई, तो आरईएस ने जांच टीम को सिर्फ 113 तालाबों का रिकॉर्ड सौंपा। बाकी 12 तालाब सरकारी रिकॉर्ड से ही हटा दिए गए। भास्कर ने इन 12 तालाबों की पड़ताल की तो उनमें से 4 का पता लगाया। इन तालाबों का उल्लेख आरईएस के मूल रिकॉर्ड में है और इनके नाम पर लाखों रुपए का भुगतान भी हो चुका है। यही नहीं, भास्कर ने अमृत सरोवरों पर खेती का मामला भी उजागर किया तो भोपाल व जिला स्तर पर जांच हुई। यहां तक कि ईओडब्ल्यू भी मौके पर पहुंची। पर एक साल बाद आई जांच रिपोर्ट में ये 12 तालाब शामिल ही नहीं थे। हेराफेरी के समय पदस्थ आरईएस के ईई, सब इंजीनियर और क्लर्क अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नाले को गहरा कर उसे बताया नया तालाब, निकाल लिए 27 लाख रुपए आरईएस ने बटियागढ़ जनपद के रौंसरा के बड़ागांव में 27.08 लाख रुपए से अमृत सरोवर निर्माण दिखाया। मौके पर सिर्फ नाले का गहरीकरण और दो ट्रॉली पत्थर मिले। ग्रामीण बबलू पटेल बोले- नाले को ही तालाब बताकर भुगतान कर दिया गया। शिकायत पंचायत मंत्री, विधायक और राज्यमंत्री लखन पटेल से भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 47.71 लाख में नया तालाब बताया, वहां 19 लाख से बना पुराना तालाब ही ग्राम कुटरी के खर्राघाट पिपरिया मिसर में आरईएस ने 2023 में 47.71 लाख का अमृत सरोवर निर्माण दिखाया, जिसमें 20 लाख रु. का भुगतान हो चुका है। मौके पर 2018 में बना पुराना तालाब मिला। केवल झंडावंदन के लिए प्लेटफॉर्म व साइन बोर्ड बनाकर अमृत सरोवर बता दिया गया, जबकि 50 मीटर लंबी बंड व वेस्ट वियर पहले मौजूद थे। पुराने तालाब को बताया अमृत सरोवर : पटेरा जनपद के लुहारी में आरईएस ने 27.07 लाख का अमृत सरोवर निर्माण दिखाया, जिसमें अब तक 11 लाख खर्च भी दिखाए गए हैं। मौके पर 2019 में 23.68 लाख से बना पुराना तालाब ही मिला। उसी तालाब को अमृत सरोवर बताकर भुगतान किया गया। वहां आज भी खेती हो रही है। यदि जांच में तालाब छिपाए गए हैं या रिकॉर्ड से हटाए गए हैं, तो उनकी सूची मुझे भेजिए। मैं पूरे मामले की जांच कराऊंगा और यदि कहीं गड़बड़ी मिली तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।’ -प्रहलाद पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री
