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नर्सिंग की ट्रेनिंग लेने आई छात्रा की संदिग्ध मौत:IPS कॉलेज ग्वालियर का मामला, अचानक होने लगी थीं उल्टियां; परिजनों का आरोप-समय पर नहीं कराया इलाज

ग्वालियर के आईपीएस कॉलेज में मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना के तहत नर्सिंग ट्रेनिंग लेने आई 23 वर्षीय छात्रा नीलू प्रजापति पुत्री लक्ष्मण प्रजापति की मंगलवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। नीलू को सोमवार-मंगलवार दरमियानी रात करीब 12 बजे उल्टी होने लगी थीं। नीलू के परिजनों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने समय से इलाज नहीं कराया। उसे बीमार होने के करीब 6 घंटे बाद (सुबह 6 बजे) अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल प्रबंधन की घोर लापरवाही ने उनकी बेटी की जान ले ली। छात्रा केआरजी कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी और 45 दिन की विशेष ट्रेनिंग के लिए 14 मई को आईपीएस कॉलेज पहुंची थी। वह अपनी चचेरे भाई की बेटी तनु के साथ हॉस्टल में रह रही थी। परिजनों के अनुसार शुक्रवार को वह दो-तीन दिन के लिए घर भी आई थी और अपने खराब हो चुके जूते बदलवाकर वापस ट्रेनिंग के लिए कॉलेज लौट गई थी। 45 दिन की ट्रेनिंग पर गई थी आईपीएस कॉलेज सोमवार देर रात करीब 12 बजे नीलू की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे उल्टियां होने लगीं। उसके साथ रह रही तनु ने फोन कर परिजनों को इसकी जानकारी दी। मृतका के पिता लक्ष्मण प्रजापति का आरोप है कि बेटी की हालत बिगड़ने के बावजूद हॉस्टल प्रबंधन ने उन्हें तत्काल सूचना नहीं दी और न ही समय रहते अस्पताल पहुंचाया। उनका कहना है कि रात 12 बजे तबीयत खराब होने के बाद नीलू को सुबह करीब 5 बजे अस्पताल ले जाया गया, जिससे इलाज में देरी हुई और उनकी बेटी की जान चली गई। हॉस्टल प्रबंधन ने खारिज किए आरोप हॉस्टल स्टाफ ने इन आरोपों को खारिज किया है। स्टाफ का कहना है कि छात्रा की तबीयत खराब होने पर उसे प्राथमिक उपचार के तहत ORS दिया गया था, जिसके बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गई थी, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल जयारोग्य अस्पताल की डिस्पेंसरी ले जाया गया। स्टाफ का दावा है कि एम्बुलेंस का इंतजार करने में और अधिक समय बर्बाद होता, इसलिए छात्रा को स्कूटी से अस्पताल पहुंचाया गया। मृतका के पिता ने हॉस्टल की क्षमता पर भी सवाल उठा दिए। उनका आरोप है कि जब हॉस्टल में सीमित बच्चों के रहने की व्यवस्था थी, तब भी मुख्यमंत्री योजना के तहत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को वहां ठहराया गया। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में हॉस्टल में 80 छात्राएं और 120 छात्र प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। छात्रा को स्कूटी पर लेकर अस्पताल पहुंचा था स्टाफ आईपीएस हॉस्टल के ओबीसी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट डायरेक्टर कृति दीक्षित का यह भी कहना है कि नीलू को पहले से थायराइड की समस्या थी और कुछ दिन पहले पेट दर्द की शिकायत के चलते वह घर भी गई थी, जहां उसका उपचार हुआ था। उनका आरोप है कि परिजनों ने छात्रा की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी कॉलेज को नहीं दी थी। वहीं परिजनों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और ट्रेनिंग के दौरान हुई लापरवाही के कारण उसकी मौत हुई है। पैनल पोस्टमार्टम कराया जाएगा, अधिकारी रहेंगे मौजूद मामले को गंभीरता से लेते हुए एडिशनल एसपी सुमन गुर्जर ने बताया कि छात्रा की मौत की हर एंगल से जांच की जा रही है। हॉस्टल के कमरे की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है और महिला पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम गठित की गई है। मृतका का पैनल पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसमें एसडीएम, तहसीलदार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि जांच में किसी तरह की शंका न रहे। ORS देने पर हुआ था छात्रा की तबीयत में सुधार नीलू प्रजापति एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसके पिता लक्ष्मण प्रजापति आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कचरा वाहन चलाते हैं। परिवार में उसकी छोटी बहन मोनिका भी बीकेआरजी कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि 12 वर्षीय छोटा भाई नकुल आठवीं कक्षा का छात्र है। रोज कराई जाती है फिजिकल एक्टिविटी इस ट्रेनिंग में छात्रों को प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 6:30 बजे तक फिजिकल एक्टिविटी कराई जाती थी, जिसमें दौड़, रस्सीकूद और अन्य शारीरिक अभ्यास शामिल थे। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या प्रशिक्षण के दौरान छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं थीं? क्या छात्रा को समय पर इलाज मिल पाता तो उसकी जान बच सकती थी? और आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन है?
फिलहाल इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन नीलू की मौत ने मुख्यमंत्री योजना के तहत संचालित ट्रेनिंग व्यवस्थाओं और हॉस्टल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह जरूर लगा दिए हैं।

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