इंदौर में 6 साल पहले हुए दंपती अमित-सीमा (परिवर्तित नाम) हत्याकांड में कोर्ट ने हाल ही में आरोपी धनजंय उर्फ शुभांशु यादव को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस चर्चित खौफनाक हत्याकांड ने लोगों को झकझोर दिया था। दरअसल यह केस सिर्फ दंपती की हत्या तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक ऐसी साजिश थी जिसमें प्रेम, परिवार का विरोध, हत्या के बाद पुलिस को गुमराह करने की कोशिश और सबूत मिटाने की कड़ी एक-दूसरे से जुड़ी थी। इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में दिसंबर 2020 की रात दंपती अमित और सीमा (परिवर्तित नाम) अपने घर में सो रहे थे। परिवार के लिए यह सामान्य रात थी, लेकिन आरोपी धनंजय के लिए यह पहले से तय योजना को अंजाम देने की रात थी। धनंजय और परिवार की बेटी के बीच संबंध थे। परिवार इन संबंधों के पक्ष में नहीं था। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि इसी विरोध को रास्ते से हटाने के लिए दोनों ने मिलकर दंपती की हत्या की साजिश रची गई। आरोपी धनंजय ने तड़के घर में प्रवेश किया धारदार हथियारों से दोनों पर हमला किया गया। बाद में कहानी को दूसरी दिशा देने के लिए बेटी के नाम से एक नोट भी छोड़ा गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में यह सामने आया कि नोट में लिखी कहानी वास्तविक घटना नहीं थी, बल्कि जांच को दूसरी दिशा में ले जाने के लिए तैयार की गई थी। कोर्ट में हालांकि पुलिस की पूरी कहानी महज स्वीकारोक्ति के आधार पर नहीं टिकी। पोस्टमॉर्टम, घटनास्थल से मिले रक्त और अन्य भौतिक साक्ष्य, बरामद हथियार, कपड़े, डीएनए रिपोर्ट, च्युइंगम से मिले डीएनए, हथियार पर मिले बाल, गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी से जुड़ी कड़ियां तथा पुलिस गवाहों की गवाही ने अभियोजन के मामले को मजबूत किया। इसी साक्ष्य की कड़ी के आधार जिला कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को धनंजय को दोषी ठहराते हुए दो मामलों में आजीवन कारावास सुनाया। कोर्ट ने अर्थदंड से प्राप्त राशि में से 20 हजार मृतक दंपती के बेटे को मानसिक क्षति के प्रतिकर के रूप में देने का आदेश भी दिया है। कैसे रची गई दोहरे हत्याकांड की साजिश पुलिस की विवेचना में सामने आया कि धनंजय और परिवार की बेटी के बीच प्रेम संबंध थे। परिवार की ओर से इन संबंधों को रोकने का प्रयास किया जा रहा था। इसी वजह से दोनों ने दंपती को रास्ते से हटाने की साजिश रची। 17 दिसंबर 2020 की रात करीब 2 बजे से सुबह 7 बजे के बीच दंपती की हत्या की गई। धनंजय ने धारदार सतूर और हसिए से दोनों पर कई वार किए। घटना के बाद घर को बाहर से बंद किया गया। सुबह परिवार के बेटे ने घर में माता-पिता को खून से लथपथ देखा और पुलिस को सूचना दी। बेटी के नाम से छोड़ा ऐसा नोट घटनास्थल से एक नोट मिला था। शुरुआत में इसे घटना से जुड़ा महत्वपूर्ण सुराग माना गया। बाद में पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार यह सामने आया कि नोट में लिखी कहानी वास्तविक नहीं थी। इसका उद्देश्य घटना की दिशा बदलना और सहानुभूति हासिल करना था। बाद में पुलिस ने नोट, उसकी लिखावट और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्य भी जब्त किए। हत्या के बाद भागने की कोशिश धनंजय की गिरफ्तारी 18 दिसंबर 2020 को सुबह की गई। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने घटना में इस्तेमाल हथियार और घटना के समय पहने कपड़ों को छिपाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस उसे गवाहों के साथ सुपर कॉरिडोर के पास खाली मैदान, सर्विस रोड और झाड़ियों वाले क्षेत्र में ले गई। वहां से खून के धब्बों वाला धारदार हथियार, घटना के समय पहनी गई जींस, टी-शर्ट, जूते हथियारों और कपड़ों को सील कर एफएसएल जांच के लिए भेजा गया। ये खबर भी पढ़ें… बेटी के प्रेमी ने उतारा था मौत के घाट:CCTV,DNA च्यूइंग गम बने सबूत करीब छह वर्ष पुराने संजय-रश्मि (परिवर्तित नाम) डबल मर्डर केस में इंदौर की जिला कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डीजे उर्फ धनंजय उर्फ शुभांशु यादव (25) को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को हत्या के दो अलग-अलग मामलों में दो-दो आजीवन कारावास के अलावा अन्य धाराओं में भी कठोर कारावास और कुल 33 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।पूरी खबर पढ़ें
