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देश की पहली स्पेस सिटी जल्द:आंध्र में इसी महीने से आकार लेगी, यहां दुनिया के लिए रॉकेट बनेंगे

यदि सबकुछ योजना के अनुसार हुआ तो इसी महीने देश की पहली स्पेस सिटी बननी शुरू हो जाएगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिछले साल इसका आइडिया सामने रखा था। उनकी सरकार अब इसका ब्लू प्रिंट तैयार कर चुकी है। इस ‘अंतरिक्ष शहर’ में न केवल सैकड़ों छोटी कंपनियां रॉकेट के पुर्जे, सेंसर बनाएंगी, बल्कि स्काईरूट, कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स, एचएफसीएल जैसी बड़ी कंपनियां दुनियाभर के लिए प्राइवेट रॉकेट बनाकर देंगी। सरकार ने यहां 570 एकड़ का स्टार्टटप एक्टिवेशन जोन बनाया है, जिसमें अग्निकुल, कॉसमॉस, पिक्सेल जैसे स्पेस स्टार्टअप भविष्य की अंतरिक्ष संभावनाओं को आकार देंगे। यह सिटी गगनयान जैसे भारत के महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए बेस कैंप का काम करेगी। नायडू सरकार ने पांच राज्यों में सरकार गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों स्पेस सिटी की आधारशिला रखने की योजना तैयार की है। स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदना ने बताया कि तिरुपति जिले के थोट्टाम्बेडु मंडल के रौथुसुरमाला गांव में 2600 एकड़ जमीन तैयार की जा रही है। यह अंतरिक्ष औद्योगिक क्लस्टर होगा। यहां एयरोस्पेस, रक्षा विनिर्माण, निजी अंतरिक्ष इनोवेशन के अलग-अलग हब बनने हैं। इस पर 3400 करोड़ रु. से ज्यादा खर्च होंगे। इन कंपनियों के बड़े बेस होंगे स्काई रूट: स्काई रूट इस प्रोजेक्ट की ‘एंकर यूनिट’ है। कंपनी ने यहां रॉकेट निर्माण, असेंबली और टेस्टिंग के लिए ₹400 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। उन्हें 300 एकड़ जमीन मिली है, जहां वे अपने ‘विक्रम’ सीरीज के रॉकेट तैयार करेंगे। कल्याणी स्ट्रैटजिक सिस्टम्स: भारत फोर्ज की यह सहायक कंपनी पास ही के मदाकाशिरा धहब में ₹1,430 करोड़ निवेश कर रही है। इसके पास डिफेंस पेलोड और रॉकेट एनर्जेटिक्स का काम है। एचएफसीएल: यह कंपनी ₹1,186 करोड़ निवेश कर आर्टिलरी और गोला-बारूद निर्माण इकाई लगा रही है, जो रक्षा अनुप्रयोगों के लिए स्पेस सिटी के डेटा का उपयोग करेगी। स्टार्टअप जोन: सरकार ने 570 एकड़ का ‘स्टार्टअप एक्टिवेशन जोन’ बनाया है, जिसमें अग्निकुल कॉसमॉस और पिक्सेल जैसे स्टार्टअप्स अपना विस्तार करेंगे। भारत का एक्सपोर्ट बनाने का लक्ष्य भारत का लक्ष्य अपनी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। तिरुपति की स्पेस सिटी इस लक्ष्य में ‘एक्सपोर्ट हब’ की भूमिका निभाएगी। इस क्लस्टर से 5,000 प्रत्यक्ष और 30,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इसमें वैज्ञानिकों से लेकर लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों तक की जरूरत होगी। यह सिटी छोटे उद्योगों के लिए एक ‘हब और स्पोक’ मॉडल पर काम करेगी। समझें… क्या है इस ब्लूप्रिंट में 1. लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर जोन: छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के लिए पैड और मिशन कंट्रोल सेंटर। 2. सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर: नैनो और माइक्रो सैटेलाइट बनाने के लिए एडवांस क्लीन रूम। 3. अनुसंधान और नवाचार कॉरिडोर: स्टार्टअप्स और इसरो के बीच सहयोग के लिए इनक्यूबेशन सेंटर। 4. स्पेस डेटा हब: कृषि और रक्षा के लिए सैटेलाइट डेटा प्रोसेसिंग सेंटर भी यहीं से ऑपरेट होगा। 5. सहायक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र: सटीक इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयों का निर्माण।

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