कहते हैं रिश्ते सिर्फ इंसानों से नहीं बनते, कभी-कभी एक बेजुबान भी परिवार का ऐसा हिस्सा बन जाता है कि उसके बिना घर सूना लगने लगता है। ग्वालियर के अलकापुरी-कलेक्ट्रेट रोड स्थित एनजी ग्रांड में रहने वाले अनिल ओझा का परिवार इन दिनों ऐसी ही पीड़ा से गुजर रहा है। उनके घर का चहेता तोता ‘शकुंतला’ उर्फ मिट्ठू (मादा) तीन दिन पहले उड़ गई। तब से घर में सन्नाटा पसरा है। हर दरवाजे पर दस्तक दी जा रही है, हर गली और हर कॉलोनी में उसकी तलाश हो रही है। उसे सुरक्षित वापस लाने वाले के लिए परिवार ने 50 हजार रुपए के इनाम की घोषणा भी की है। अनिल ओझा भावुक होकर कहते हैं, 50 हजार हमारे लिए मायने नहीं रखते। हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी वही होगी, जब मिट्ठू फिर से घर लौट आएगी। जिस दिन वह वापस आएगी, उसी दिन मेरी मां और बेटी के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान भी लौट आएगी। एक साल में बन गया घर का सबसे प्यारा सदस्य अनिल ओझा बताते हैं कि करीब एक वर्ष पहले शकुंतला उनके घर आई थी। उसने धीरे-धीरे पूरे परिवार का दिल जीत लिया। उसे कभी पिंजरे में कैद नहीं रखा गया। वह पूरे घर में बेफिक्र होकर घूमती थी, परिवार के लोगों की आवाज सुनते ही उनके कंधे या हाथ पर आ बैठती थी। उसके बिना घर की सुबह और शाम की कल्पना भी मुश्किल थी। एक खुली खिड़की और बिछड़ गया अपना सोमवार को सब कुछ सामान्य था। शकुंतला कमरे में इधर-उधर घूम रही थी। इसी दौरान खिड़की खुली रह गई और वह उड़कर बाहर निकल गई। परिवार को भरोसा था कि वह थोड़ी देर में लौट आएगी, लेकिन घंटों बीत गए और मिट्ठू वापस नहीं आई। इसके बाद रिश्तेदारों, पड़ोसियों और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू हुई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। दादी-पोती की आंखों से नहीं थम रहे आंसू मिट्ठू के गुम होने का सबसे ज्यादा असर परिवार की बुजुर्ग मां और छोटी बेटी पर पड़ा है। दोनों उससे इस कदर जुड़ी थीं कि अब उसके बिना उनका मन किसी काम में नहीं लगता। परिजनों का कहना है कि दोनों ने ठीक से खाना-पीना भी छोड़ दिया है। दिनभर दरवाजे की ओर नजरें लगी रहती हैं कि शायद मिट्ठू वापस लौट आए। ई-रिक्शा से पूरे शहर में हो रही मुनादी मिट्ठू को खोजने के लिए परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। एक प्रचार एजेंसी की मदद से उसकी तस्वीर और पहचान वाले पोस्टर तैयार कराए गए। इन्हें ई-रिक्शा पर लगाकर शहर के अलग-अलग इलाकों में लगातार मुनादी कराई जा रही है। पिछले तीन दिनों में इस अभियान पर करीब 8 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। ई-रिक्शा चालक सोनू रोजाना 5 से 6 घंटे तक नई कॉलोनियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में जाकर लोगों से अपील कर रहा है कि यदि कहीं यह तोता दिखाई दे तो तुरंत परिवार को सूचना दें।
