धार जिले के तिरला स्थित सांदीपनी शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल के आदिवासी छात्र-छात्राओं ने रसायन शास्त्र शिक्षिका दीपिका शक्तावत पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को 11वीं और 12वीं कक्षा के कई छात्र-छात्राएं करीब 7 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त पारुल जैन को ज्ञापन सौंपकर शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने अपने ज्ञापन में बताया कि शिक्षिका दीपिका शक्तावत पिछले लगभग एक वर्ष से आदिवासी विद्यार्थियों के साथ कथित तौर पर जातिसूचक और अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रही हैं। उनका आरोप है कि शिक्षिका उन्हें पढ़ाई और नौकरी के लिए अयोग्य बताती हैं, मजदूरी करने या गोबर उठाने जैसी बातें कहती हैं। विरोध करने पर छात्रों को डराया-धमकाया जाता है। बच्चे बोले- कई बार लिखित शिकायतें कर चुके
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों ने यह भी बताया कि 20 जुलाई 2026 को भी अभिभावकों ने प्राचार्य सीमा मिश्रा को लिखित आवेदन देकर दीपिका शक्तावत को हटाने की मांग की थी, लेकिन उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। छात्रों के अनुसार, शिकायतों की अनदेखी के कारण विद्यालय में भय का माहौल है और वे मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। मार्च के दौरान चार छात्राओं की तबीयत बिगड़ी
ज्ञापन में प्राचार्य सीमा मिश्रा और संबंधित बीईओ पर भी शिकायतों की अनदेखी करने और छात्रों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, छात्रों ने छात्रावास में गुणवत्तापूर्ण भोजन न मिलने, शिकायत करने पर बाहर निकालने की धमकी देने और उनसे झाड़ू-पोछा तथा बर्तन साफ कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। कलेक्ट्रेट तक लगभग 7 किलोमीटर के पैदल मार्च के दौरान चार छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि दीपिका शक्तावत, प्राचार्य सीमा मिश्रा और संबंधित बीईओ के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आदिवासी छात्र संगठन जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेगा। सहायक आयुक्त बोलीं- नियमानुसार कार्रवाई होगी
मामले में जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त पारुल जैन ने छात्रों से ज्ञापन लेकर कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को विद्यालय से अवकाश देकर जिला मुख्यालय आने की अनुमति किस स्तर पर दी गई, इसकी भी जांच होगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
